देश की ऐसी कोई समस्या नहीं है जिसको उजागर करने और सही मार्ग दिखाने का प्रयास हमारे कलाकारों द्वारा ना किया जाता हो। जैसे अन्य क्षेत्रों में व्यक्ति संलग्न होते हैं ऐसे ही कला के क्षेत्र में कलाकारों की संख्या अब बढ़ रही है क्योंकि पहले चित्रकारी सिर्फ व्यक्तिगत मेहनत करने पर सीखी जाती थी और ड्रामा नाटक नौटंकी कर नागरिकों का ध्यान विशेष परिस्थितियों की ओर करते नजर आते हैं। देश में कला और उसकी महत्ता आज से नहीं आदिकाल से चली आ रही है। राजा महाराजाओं के समय में यह कलाकार अपनी नौटंकी सांग के माध्यम से मनोरंजन के साथ सूचनाओं का आदान प्रदान करते हुए अच्छी आदतों को बढ़ावा और बुरी को तिलांजलि दी जाती थी। पूरे विश्व में बड़ी अकादमी कला में पारंगत करने केलिए खुली हैं। कहीं दस हजार रुपये महीना तो कहीं दस लाख में ट्रेनिंग दी जाती है। परिणामस्वरूप बड़े कलाकार अपने यहां हुए और अब बहरुपिये के रुप में अपनी कला का प्रदर्शन करते नजर आते हैं। कहीं पर छोटी बच्चियां रस्सी पर बिना किसी सहारे के चलती है और पेटभर रोटी का जुगाउ़ करती है। कलाकार अपना कार्य उत्साह से कर रहे हैं। नामचीन लोगों को पुरस्कार और सम्मान मिलते हैं लेकिन अपनी कला से सबको अचंभित करने वाले युवा कलाकारों का कोई बहुत बड़ा स्थान नहीं है। जहां चित्रकारी और नौटंकी सांग करने वाले कलाकारों को संयुक्त शिक्षा दी जाए। कुछ समय पहले सुरेंद्र कौशिक और वर्मा जैसे मुंझे हुए नाटककार चमन सिंह जैसे चित्रकार कलाकारों को प्रोत्साहन देते हुए मार्ग दिखाया करते थे। वर्तमान में ऐसी व्यवस्था कहीं नजर नहीं आ रही है और कहीं है तो वह सरकारी अफसरों की उदासीनता की भेंट चढ़ जाती है। मेरा मानना है कि देश में जहां आर्ट गैलरी और नाटक सिखाने वाली कार्यशालाओं को सक्रिय किया जाए और युवाओं को सीखाने के साथ साथ जिस प्रकार सरकार अन्य क्षेत्रों के लोगेां को पेंशन व राहत राशि देते है और चुनावों के दौरान बांटी जाने मुफ्त की रेवड़िया की परंपरा निकली है उसमें राजनीतिक दलों को नौटकी व नाटक में काम करने वालों के लिए राशि की घोषणा की जानी चाहिए क्योंकि यह चित्रकार व कलाकार वह काम करते हैं जो हम नहीं कर सकते। कोई अपनी चित्रकारी से कुरीतियों को उजागर कर रहा है तो कोई सड़कों पर ड्रामे कर कुरीतियों को दूर करने का संदेश दे रहा है। समाज में इनके योगदान को देखते हुए विश्व कला दिवस के अवसर पर मैं तो केंद्र प्रदेश सरकारों से मांग करता हूं कि रजिस्टर्ड कलाकारों को हर माह एक राशि दी जाए।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
चित्रकार हो या कलाकार युवाओं को प्रोत्साहन देने हेतु
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