मेरठ 29 अगस्त (प्र)। पिछले कुछ वर्षों से थोड़ी सी बारिश हुई नहीं शहर भर में पानी भर जाता है यह कभी कभी तो यह कुछ स्थानों पर कई दिनों तक भरा रहता है। जिससे उत्पन्न गंदगी आवागमन तो परेशान करती ही है कई प्रकार की बिमारियां फैलने का खतरा उससे बना रहता है। क्योंकि महानगर की सफाई के बारे में तो सभी जानते है। ऐसा नहीं है कि नगर निगम और संबंधित विभाग इससे राहत दिलाने के प्रयास न करते हो। क्योंकि कई बार पढ़ने को मिलता है कि सलाहकार टीम गठित की गई वो सर्वे करेंगी या विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है मगर समस्या गंदगी और जल भराव की कम होने की बजाए सुरसा के मुंह की भांति बढ़ती ही चली जा रही है।
जनहित में मेरा मानना है कि माननीय प्रधानमंत्री जी के स्वच्छता अभियान नागरिक स्वस्थ रहे और मुख्यमंत्री जी द्वारा जलभराव और गंदगी से राहत दिलाने के दिये गये निर्देशों और आदेशों के बाद भी नागारिकों के सामने ग्रामीण कहावत ज्यो ज्यो दवा की मर्ज बढ़ता ही गया के सामने जलभराव और गंदगी की समस्या मुंह बाये खड़ी ही है। वैसे तो जिला प्रशासन नगर निगम आदि को इस बारे में सोचना और निर्णय लेना है। लेकिन मेरा मानना है कि नगर निगम मेडा आवास विकास कैन्ट बोर्ड के अधिकारियों के साथ जनहित में जिलाधिकारी जी महापौर हरिकांत अहलुवालिया की उपस्थिति में रूड़की रोड स्थित रिहायशी कालोनी शीलकुंज का सघन दौरा करें और फिर कालोनी निर्माता अजय गुप्ता और उनके सहयोगियों के साथ एक विचार विमर्श गोष्ठी की जाए और पता किया जाए कि कितनी ही बारिश क्यों न पड़ जाए घंटे दो घंटे में पानी कैसे निकल जाता है और कालोनी के निर्माणकर्ताओं डा0 संजय गुप्ता और अजय गुप्ता ने अपने सहयोगियों के माध्यम से कौन सी टक्नीकी अपनाई कि उनकी शिविर व्यवस्था हमेशा चाकचौबंद रहती है और शीलकुंज की सड़के कुछ ही घंटों में खाली कैसे हो जाती है। और वहां गंदगी भी नजर नहीं आती। जैसी शहर के गली मौहल्लों व मुख्य मार्गों पर बनी रहती है और जिससे लेकर नागरिकों को धरना प्रदर्शन भी करने पड़ते है। इसलिए मेरा मानना है कि जनहित में अफसर इससे अहम का मुद्दा ना बनाकर रूड़की रोड स्थित शीलकुंज व यशोदाकुंज का निरीक्षण करें।
बताते चले कि जब मेरठ विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष के पद पर वरिष्ठ आईएएस इफ्तकारूद्दीन विराजमान थे तब सरकार ने जिले में मौजूद कालोनियों के बारे में एक रिपोर्ट मांगी थी जिस पर पूरा सर्वे करने के बाद इफ्तकारूद्दीन ने यशोदाकुंज के फोटो और उससे संबंध विवरण भिजवाया था इसी प्रकार जब प्रभात मित्तल मेरठ विकास प्राधिकरण मेडा के उपाध्यक्ष थे तब उनके द्वारा भी यशोदाकुंज का गहन निरीक्षण कर उसके रखरखाव और व्यवस्थाओं की जमकर प्रशंसा की थी। बताते चले कि जल संग्रह योजना के तहत इंड्सवैली ग्रुप की कालोनियों में सर्वप्रथम इस योजना को लागू कर जल संग्रह की पूर्ण व्यवस्था अपनी कालोनियो में कराई गई थी।