Saturday, July 13

जमीन खरीद को लेकर जम्मू कश्मीर व उत्तराखंड़ सरकार के निर्णय में फर्क क्या! मुख्यमंत्री फैसले पर पुनः करे विचार

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एक तरफ केन्द्र सरकार जम्मू कश्मीर में दूसरे राज्यों के लोगों द्वारा जमीनों की खरीद फरोख्त आदि पर लगे प्रतिबंध को हटाने में काफी संघर्षो के बाद सफल हुई है तो दूसरी तरफ उत्तराखंड़ की भाजपा सरकार बाहरी राज्यों के लोगों के जमीन खरीदने पर रोक लगा रही है। भले ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में फिलहाल कृषि एवं उद्यान के लिए दूसरे राज्यों के लोगों के जमीन खरीदने पर रोक लगाई है। कुछ लोगो के द्वारा इस पर व्यक्त की जारी येे शंका बिल्कुल निरमूल नहीं कही जा सकती कि अभी तो कृषि और उद्यान के जमीन खरीदने पर रोक लगी है कुछ दिनों बाद इसका विस्तार कर बाकी उपयोग की भूमि खरीदने पर भी रोक लगाने की संभावनाओं से इनकार नहीं किया जा सकता। कुछ जागरूक नागरिकों का यह मत गलत नहीं है कि फिर जम्मू कश्मीर और उत्तराखंड़ सरकार के निर्णय में फर्क ही क्या रह जाएगा।
एक खबर के अनुसार अब उत्तराखंड में बाहरी लोग जमीन नहीं खरीद पाएंगे। सीएम पुष्कर सिंह धामी ने इस संबंध में आदेश जारी किया गया है। बताते चले कि सीएम पुष्कर सिंह धामी के आदेश के तहत बाहरी लोगों के कृषि एवं उद्यान के उद्देश्य से जमीन खरीदने पर अंतरिम रोक लगा दी गयी है। सरकार की ओर से जारी इस आदेश के संबंध में कहा गया है कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर प्रदेशहित और जनहित में यह निर्णय लिया गया है।
कहा गया है कि भू-कानून समिति की आख्या प्रस्तुत किये जाने तक या अग्रिम आदेशों तक जिलाधिकारी राज्य से बाहर के व्यक्तियों को कृषि एवं उद्यान के उद्देश्य से जमीन खरीदने के प्रस्ताव में अनुमति नहीं देंगे। इससे पहले भी मुख्यमंत्री ने प्रदेश में भूमि खरीद से पहले खरीददार की पृष्ठभूमि के सत्यापन के उपरांत ही उसे इसकी अनुमति देने के निर्देश दिए
बता दें कि सीएम धामी की अध्यक्षता में हुई बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि भू-कानून के लिए बनाई गई समिति की ओर से बड़े पैमाने पर जन सुनवाई की जाए। विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों और विशेषज्ञों की राय ली जाए। उत्तर प्रदेश जमींदारी एवं भूमि व्यवस्था अधिनियम 1950 की धारा 154 में 2004 में किए गए संशोधन के अनुसार ऐसे व्यक्ति, जो उत्तराखंड में 12 सितंबर 2003 से पूर्व अचल संपत्ति के धारक नहीं हैं, को कृषि एवं उद्यान के उद्देश्य से भूमि क्रय करने की जिलाधिकारी द्वारा अनुमति प्रदान किए जाने का प्रावधान है।
इसके लिए राज्य सरकार की ओर से प्रारूप समिति गठित की गई है। तेजी से मसौदा बनाने के निर्देश देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा सभी निर्णय प्रदेश के हित में लिए जा रहे हैं। राज्य की जनभावनाओं के अनुरूप राज्यहित में जो सर्वाेपरि होगा, सरकार द्वारा उस दिशा में निरंतर कार्य किए जायेंगे। उत्तराखंड सरकार का यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब कड़े भू-कानून तथा मूल निवास के मुददे को लेकर प्रदेश भर में लोग आंदोलन कर रहे हैं।
मेरा मानना है कि अभी जम्मू कश्मीर का मामला सुर्खियों में है इस तथ्य को दृष्टिगत रख उत्तराखंड के माननीय मुख्यमंत्री और सरकार को अपने इस निर्णय पर पुनः विचार करना चाहिए और खासकर भाजपा नेतृत्व को। आम आदमी के हित में इस फैसले पर लगवाई जानी चाहिए रोक।

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