Friday, August 29

गुजरात बिटकॉइन घोटाले में पूर्व एमएलए नलिन कोटडिया समेत 14 दोषियों को उम्रकैद

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अहमदाबाद 29 अगस्त। गुजरात के बिटकॉइन घोटाले मामले में कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने पूर्व एमएलए नलिन कोटडिया, अमरेली के पूर्व एसपी जगदीश पटेल, पूर्व पुलिस निरीक्षक अनंत पटेल और 14 अन्य आरोपियों को दोषी करार दिया है। कोर्ट ने इस सभी आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है।

2012 विधानसभा चुनावों में नलिन काेटडिया केशुभाई पटेल की गुजरात परिवर्तन पार्टी (GPP) से जीते थे। कोर्ट ने धारी के पूर्व विधायक कोटडिया, अमरेली के तत्कालीन एसपी जगदीश पटेल, पूर्व पीआई अनंत पटेल समेत 15 में से 14 आरोपियों को दोषी ठहराया। इसके बाद आजीवन कारावास की सजा सुनाई। यह मामला 2018 में बिल्डर शैलेश भट्ट पर 176 बिटकॉइन और 32 लाख रुपये नकद अपहरण से जुड़ा है। बचाव पक्ष के वकीलों ने कोर्ट के फैसले को गुजरात हाईकोर्ट में चुनौती देने की बात कही है।

सूरत के बिल्डर शैलेश भट्ट से जुड़े 2018 के सनसनीखेज अपहरण और बिटकॉइन जबरन वसूली मामले में तत्कालीन पुलिस निरीक्षक (पीआई) अनंत पटेल, पूर्व विधायक नलिन कोटडिया, अमरेली के पूर्व एसपी जगदीश पटेल और एक वकील सहित कुल 14 लोगों को आरोपी बनाया गया था। आरोप लगा था कि भट्ट का कथित तौर पर पीआई अनंत पटेल और उनकी टीम ने सरकारी वाहनों का इस्तेमाल करके अपहरण किया था। आरोपी उन्हें गांधीनगर के पास ले गए और कथित तौर पर उनसे लगभग 9 करोड़ रुपये मूल्य के 176 बिटकॉइन ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया। ट्रांसफर के बाद उन्होंने उनसे फिरौती की भी मांग की। बाद में इस मामले की जांच सीआईडी क्राइम ने की थी। सीआईडी क्राइम ब्रांच ने पीआई, 10 अन्य पुलिसकर्मियों और सूरत के वकील केतन पटेल को गिरफ्तार किया। केतन पटेल से पूछताछ में पूर्व विधायक नलिन कोटडिया और तत्कालीन अमरेली एसपी जगदीश पटेल की कथित संलिप्तता का पता चला।

सीआईडी ने जगदीश पटेल को भी गिरफ्तार कर लिया और आगे की जांच जारी रखी थी। कोटडिया की भूमिका एक ‘फिक्सर’ के रूप में सामने आई। यह मामला गुजरात के सबसे हाई-प्रोफाइल साइबर अपराध से संबंधित जबरन वसूली के मामलों में से एक है, जिसमें पुलिस अधिकारियों, राजनीतिक हस्तियों और निजी व्यक्तियों के बीच गहरे संबंधों का खुलासा हुआ था। अहमदाबाद में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 2,091 बिटकॉइन, 11,000 लाइटकॉइन और 14.50 करोड़ रुपये नकद, कुल 1232.50 करोड़ रुपये की जबरन वसूली की चल रही जांच के तहत अगस्त 2024 में शैलेश भट्ट को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के प्रावधानों के तहत गिरफ्तार किया था।
ईडी की जांच में सामने आया था कि शैलेश भट्ट ने सतीश कुंभानी से अपना निवेश वापस पाने के लिए उनके दो कर्मचारियों का अपहरण कर लिया और अपहृत कर्मचारियों की रिहाई के बदले 2,091 बिटकॉइन, 11,000 लाइटकॉइन और 14.50 करोड़ रुपये नकद वसूले। बिटकनेक्ट कॉइन के प्रमोटर सतीश कुंभानी पर 2017-18 में लोगों को कंपनी में निवेश करने का लालच देकर आम जनता को ठगने का आरोप लगाया गया था। इसके बाद, सतीश कुंभानी ने जनवरी 2018 में बिटकनेक्ट कॉइन और उसके लैंडिंग प्लेटफॉर्म की बिक्री अचानक बंद कर दी और जनता का पैसा हड़पकर फरार हो गया।

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