Friday, March 1

फर्जी वीजा बनाकर 1000 लोगों से छह करोड़ ठगने वाले गिरोह के 7 पकड़े

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नई दिल्ली 24 अक्टूबर। दिल्ली में फर्जी वीजा बनाने वाला एक गिरोह पकड़ा गया है। गिरोह के मास्टरमाइंड का रिश्तेदार इंडियन मुजाहिद्दीन से जुड़ा है। गिरोह अब तक 1000 से ज्यादा लोगों से वीजा देने के नाम पर छह करोड़ रुपए ठग चुका है। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच के स्पेशल सीपी रविन्द्र यावद ने बताया कि गिरोह के सात लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस अब यह जानकारी जुटा रही है कि गिरोह के तार कहां-कहां जुड़े हुए हैं।

फर्जी वीजा रैकेट का मास्टरमाइंड ईमान-उल-हक बताया जा रहा है जो बिहार के दरभंगा का रहने वाला है। वह फिलहाल दिल्ली के जाकिर नगर में रह रहा था। गिरोह के शिकार ज्यादातर लोग केरल से हैं। गिरोह अलग-अलग जगह ऑफिस खोलता था। वहां कॉल सेंटर बनाकर पीड़ितों को कॉल किए जाते थे। गिरोह लोगों को खाड़ी देशों और मलेशिया भेजने के नाम पर ठगी करता था।

अन्य गिरफ्तार आरोपितों में ताबिश हासमी, मोहम्मद तबरेज़ आलम उर्फ तबरेज, एकराम मुजफ्फर भी दरभंगा के हैं। जबकि तारिक सीवान, सोमनाथ कुमार अररिया का रहने वाला है। सातवां आरोपित महेश कुमार दिल्ली के खिजराबाद का रहने वाला है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए प्रचार भी किया जाता था। पुलिस ने गिरोह से 100 पासपोर्ट, कई लैपटॉप और फर्जी आधार कार्ड बरामद किए हैं। ये लोग फर्जी आधार कार्ड बनाते थे। ईमान-उल-हक का एक रिश्तेदार इंडियन मुजाहिद्दीन से जुड़ा है। ईमान ने इंजीनियरिंग की है जबकि एक आरोपी ने बिट्स भोपाल से एम टेक किया है।
गिरोह एक वीजा बनाने के लिए 60 हजार रुपए लेता था। बाद में पीड़ित को पेपर पूरे करने के चक्कर में उलझाए रखा जाता था। एक सेंटर पर काफी लोगों को जाल में फंसाने के बाद गिरोह के लोग ऑफिस बंद कर देते थे। फिर नई जगह सेटअप लगाते थे। लोगों को फंसाने के लिए ये नौकरी डॉट कॉम जैसी कंपनियों पर नौकरियों के प्रोफाइल अपलोड कर देते थे।

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