देहरादून 18 अगस्त। उत्तराखंड की धामी सरकार और कैबिनेट ने मदरसा बोर्ड को लेकर बड़ा फैसला लिया है। जानकारी के मुताबिक सीएम पुष्कर सिंह धामी ने कैबिनेट बैठक में कांग्रेस सरकार से चले आ रहे मदरसा शिक्षा बोर्ड अधिनियम समाप्त करने का फैसला लिया है। इसकी जगह उत्तराखंड अल्पसंख्यक शैक्षिक संस्थान विधेयक 2025 विधानसभा में पास कराया जाएगा। ऐसे होने के बाद 1 जुलाई 2026 से उत्तराखंड मदरसा शिक्षा बोर्ड खत्म हो जाएगा। वहीं नए प्रस्ताव के तहत मुस्लिम समेत सिख, इसाई, जैन, पारसी समेत अन्य धर्मों को भी इससे जोड़कर लाभ दिया जाएगा।
जानकारी के मुताबिक उत्तराखंड मदरसा शिक्षा बोर्ड के तहत फिलहाल प्रदेश में 452 मदरसे रजिस्टर्ड हैं। धामी कैबिनेट की बैठक में उत्तराखंड अल्पसंख्यक शैक्षिक संस्थान विधेयक 2025 को लेकर सहमति बन गई है। अब शिक्षा विभाग के इस प्रस्ताव पर हरी झंडी मिलने के बाद उत्तराखंड विधानसभा मानसून सत्र में पास कराने की तैयारी शुरू कर दी गई है।
बता दें कि उत्तराखंड विधानसभा मानसून सत्र 2025 गैरसैंण में 19 से 22 अगस्त के बीच चलेगा। सीएम धामी भी कह चुके हैं कि विधानसभा सत्र के लिए सारी तैयारी पूरी कर ली गई है। इस बीच कई विधेयकों में से उत्तराखंड अल्पसंख्यक शैक्षिक संस्थान विधेयक 2025 सबसे बड़ी चर्चा का मुद्दा बनने वाला है।
बताया जा रहा है कि अल्पसंख्यक कल्याण बोर्ड की नियमावली में संशोधन करने के बाद सिख, इसाई, जैन, पारसी धर्म के स्कूलों को भी इससे जोड़ा जाएगा, ताकि उन्हें अल्पसंख्यक के लाभ मिल सकें। वहीं यूसीसी की रजिस्ट्रेशन की अवधि बढ़ाने को लेकर भी फैसला होगा।
यही नहीं, मान्यता प्राप्त अल्पसंख्यक संस्थानों में गुरुमुखी व पाली भाषा भी पढ़ाई जा सकेगी। इसके साथ ही मुस्लिम समुदाय के शैक्षिक संस्थानों को मान्यता देने वाले मदरसा शिक्षा बोर्ड अधिनियम, 2016 और उत्तराखंड गैर सरकारी अरबी व फारसी मदरसा नियम, 2019 को एक जुलाई, 2026 से समाप्त कर दिया जाएगा।
अल्पसंख्यक शैक्षिक संस्थान विधेयक के अधिनियम बनने पर यह देश ऐसा पहला अधिनियम होगा, जो राज्य में सभी अल्पसंख्यक समुदायों द्वारा स्थापित शैक्षिक संस्थानों को पारदर्शी ढंग से न केवल मान्यता देगा, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता व उत्कृष्टता भी सुनिश्चित करेगा।