मेरठ 28 अगस्त (प्र)। देशभर के विश्वविद्यालयों में राजनीति विज्ञान के विद्यार्थी वेद, रामायण, महाभारत, मनुस्मृति, शुक्रनीति और कौटिल्य अर्थशास्त्र में दर्ज राजधर्म को विस्तार से जानेंगे। ‘भारत में राजधर्म परंपरा’ के इस पेपर में भारत में राजधर्म के मायने, नीति और सिद्धांतों को पढ़ाया जाएगा।
वाल्मीकि रामायण के अयोध्याकांड और महाभारत का शांतिपर्व इस पेपर का हिस्सा होंगे। अयोध्याकांड में भगवान श्रीराम और भरत के बीच 76 प्रश्नों के रूप में दर्ज संवाद से राजधर्म की विशेषताएं बताई जाएंगी। इस संवाद में राम भरत को आदर्श राजा, राज्य और आदर्श नीतियों का वर्णन करते हैं।
एमए में यह हुए हैं बदलाव
एमए राजनीति विज्ञान के छात्र इलेक्टिव कोर्स के तहत अपनी रुचि के अनुसार पढ़ने का विकल्प मिलेगा। इसमें उत्तर-पूर्व का पहली बार पाठ्यक्रम में जगह दी गई है। छात्र उत्तर-पूर्व का देश में योगदान एवं संस्कृति समझेंगे। उपनिवेशवाद के पेपर में भारत में इसकी शुरुआत और इससे मुक्त होने का संघर्ष पढ़ाया जाएगा। ‘पॉलिटिकल इकॉनमी ऑफ टेम्पल्स’ के पेपर में देशभर के मंदिरों का आर्थिकी में योगदान एवं इसका राजनीति से जुड़ाव पढ़ने को मिलेगा। पाठ्यक्रम में ‘द आइडिया ऑफ भारत’ और ‘इंडियन डायसपोरा’ शीर्षक से दो पेपर जोड़े हैं। इसमें भारत का स्वर्णिम इतिहास, प्रवासी भारतीयों की गाथाएं पढ़ाई जाएंगी।
स्नातक में राजनीति विज्ञान के छात्र ये भी पढ़ेंगे
स्नातक में राजनीति विज्ञान के छात्र सोमदेव सूरी, तिरुवल्लूर नए चिंतक के रूप में पढ़ाए जाएंगे। आधुनिक चिंतक में केरल के नारायण गुरु को जगह मिली है। ’भारतीय राजनीतिक चिंतन की आधारशिला’ के पेपर में धर्म, दंड, न्याय, कराधान पढ़ाया जाएगा। राष्ट्रीय सुरक्षा नया पेपर जोड़ा गया है। ’भारत की संविधान सभा’ के पेपर में संविधान सभा में सभी सदस्यों के निर्णय, भाषण, लेख को विस्तार से पढ़ाया जाएगा। ’भारत में राजधर्म परंपरा’ के पेपर में वेद, कौटिल्य, रामायण, महाभारत पढ़ने को मिलेगा।
नया पाठ्यक्रम लागू करने वाला सीसीएसयू पहला विवि
उक्त बदलाव यूजीसी द्वारा प्रस्तावित लर्निंग आउटकम बेस्ड कुरीकुलम फ्रेमवर्क (एलओसीएफ) में यूजी-पीजी स्तर पर राजनीति विज्ञान के पेपर में हैं। सीसीएसयू में राजनीति विज्ञान के विभागाध्यक्ष प्रो.संजीव शर्मा भी यूजीसी की उक्त पाठ्यक्रम निर्माण समिति के सदस्य रहे हैं। प्रो.संजीव शर्मा के अनुसार सीसीएसयू देश का पहला विवि है जिसने प्रस्तावित पाठ्यक्रम को अपने यहां लागू किया है। इसी सत्र से छात्र यूजीसी के प्रस्तावित सिलेबस को पढ़ेंगे। पाठ्यक्रम में जो भी बदलाव किए गए हैं वह छात्र हित में है। समिति ने पहले से मौजूद सिलेबस से किसी को हटाया नहीं है।