मेरठ 04 फरवरी (प्र)। भारत निर्वाचन आयोग के निर्देश पर जिले में चल रही एसआईआर प्रक्रिया में अब मतदाता सूची को लेकर प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। डेटा में गड़बड़ी और मैपिंग न होने के कारण अब 6.48 लाख मतदाताओं को अपनी जानकारी स्पष्ट करनी होगी, जिसमें 3.73 लाख मतदाताओं का नाम किसी न किसी कारण से मिसमैच हो रहा है। वहीं 2.75 लाख से अधिक वे मतदाता हैं, जिनका नाम 2003 के वोटर लिस्ट से मैपिंग नहीं हुई है।
मेरठ जिले के करीब 6.48 लाख मतदाता प्रशासन के रडार पर हैं। इन मतदाताओं को अपनी पहचान और विवरण सत्यापित करने के लिए नोटिस जारी किए जा रहे हैं। डीएम व जिला निर्वाचन अधिकारी डा.वीके सिंह के अनुसार करीब चार लाख नोटिस जारी हो चुके हैं। डीएम के अनुसार आयोग के स्तर से जिले के 3.73 लाख मतदाताओं के रिकार्ड में विसंगतियांपाई गई हैं। ऐसे मतदाताओं के नाम, उपनाम, माता-पिता या दादा-दादी के नाम में स्पेलिंग की गलतियां या अन्य तकनीकी त्रुटियां हैं।
अब इन सभी को नोटिस भेजकर सही जानकारी मांगी जा रही है। 2.75 लाख से अधिक मतदाता ऐसे हैं, जिनकी ‘मैपिंग’ नहीं हो पाई है (यानी उनका भौतिक सत्यापन या लोकेशन डेटा स्पष्ट नहीं है)। इनको पहले से नोटिस भेजने की प्रक्रिया चल रही थी। अब इन सभी तरह के नोटिस की सुनवाई प्रक्रिया 28 फरवरी तक पूर्ण किया जाना है।
डीएम के अनुसार वर्तमान में सात विधानसभा क्षेत्रों के 2.75 लाख से अधिक के नो मैपिंग वाले मतदाताओं के नोटिस की सुनवाई के लिए 25 केंद्र बनाए गए थे। अब जनप्रतिनिधियों और मीडिया रिपोर्ट के आधार पर 10 से 15 सुनवाई केंद्र बढ़ाए जा रहे हैं। इस तरह करीब 35 से 40 केंद्रों पर सुनवाई होगी।
मिसमैच को बीएलओ ही सुधार कर सकते हैं
तार्किक विसतंगियों या मिसमैच वाले मामले में संबंधित बूथ के बीएलओ ही नोटिस के जवाब में जानकारी, कागजात लेकर सुधार कर सकते हैं। भारत निर्वाचन आयोग ने बीएलओ एप में यह व्यवस्था कर दी है।
डीएम व जिला निर्वाचन अधिकारी डा.वीके सिंह का कहना है कि जिले में 6.48 लाख मतदाताओं को नोटिस जारी होने जा रहे हैं, करीब चार लाख नोटिस जारी हो चुके हैं। नोटिस के जवाब में हर एक मतदाता को सुनवाई केंद्र जाने की आवश्यकता नहीं है। घर का कोई एक सदस्य, प्रतिनिधि नोटिस का जवाब में सुनवाई केंद्र जाकर आवश्यक कागजात उपलब्ध करा सकता है।
