मेरठ 10 फरवरी (प्र)। सरधना थाना क्षेत्र के बहुचर्चित कपसाड़ कांड के हत्या और अपहरण के आरोपी को कोर्ट ने नाबालिग माना है. अब इस केस की सुनवाई जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड (किशोर न्याय बोर्ड) के द्वारा की जाएगी.
मेरठ के कपसाड़ गांव में 8 जनवरी को हुए युवती के अपहरण और उसकी मां सुनीता की निर्मम हत्या के मामले में आरोपी पारस सोम की उम्र को लेकर सोमवार को अदालत में अहम सुनवाई हुई. इसके बाद कोर्ट ने आरोपी की तरफ से पेश किये गए तमाम उम्र संबंधित साक्ष्यों को परखने के बाद सही माना. और आरोपी नाबालिग़ है, ये बात स्पष्ट हो गई.
कपसाड़ की घटना के बाद प्रदेश भर में इस घटना के बाद न सिर्फ पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े हुए थे, बल्कि विपक्ष की पार्टियों ने आंदोलन तक किये थे. पूरे गांव को छावनी में तब्दील कर दिया गया था. कई दिन के बाद हत्या के आरोपी पारस सोम को गिरफ्तार किया गया था. साथ ही अपह्रत युवती को भी बरामद किया गया था. इस मामले में आरोपी पक्ष की ओर से तीन वकीलों का एक पैनल मुकदमा लड़ने के लिए आगे आया था.
पारस सोम के अधिवक्ता विजय शर्मा ने बताया कि पैनल की तरफ से कोर्ट में आरोपी की जन्मतिथि 11-5-2008 को लेकर तमाम साक्ष्य पढ़ाई के सर्टिफिकेट सहित हाईस्कूल की मार्कशीट और अन्य साक्ष्य अदालत में पेश किये गए थे. कल मामले की सुनवाई हुई, जिसके बाद कोर्ट ने 14 जनवरी को जन्मतिथि से जुड़ी याचिका को कोर्ट ने स्वीकार किया था. जिसके बाद बीते महीने 22 जनवरी को कोर्ट ने सुनवाई के बाद इस याचिका को मंजूर करते हुए कोर्ट ने वादी पक्ष के सभी लोगों को नोटिस भी जारी किये थे.
वादी पक्ष ने तब ये कहकर 31 जनवरी तक का समय मांगा था कि बेसिक शिक्षा से जुड़े सर्टिफिकेट की रूलिंग लाएंगे. वादी पक्ष रूलिंग उपलब्ध नहीं कर पाया और आगे फिर एक बार तारीख की मांग की थी, तब कोर्ट ने 4 फरवरी की तिथि निर्धारित कर दी थी.
इसके बाद वादी पक्ष की तरफ से 4 फरवरी को कक्षा 5 का जारी किया गया सर्टिफिकेट पेश किया गया, तो उसमें भी आरोपी की जन्मतिथि हाईस्कूल के प्रमाणपत्र के अनुसार अनुसार 11-5-2008 ही निकली थी.
अब इस मामले मे सोमवार को कोर्ट ने मामले को जेजे बोर्ड ट्रांसफर करने का निर्णय लिया. इस बारे में एडवोकेट संजीव राणा ने बताया कि जन्मतिथि के अनुसार वारदात के वक्त आरोपी की उम्र महज 17 साल, 7 महीने, 25 दिन ही थी. जेजे बोर्ड के अंतर्गत अब इस मामले में सुनवाई होगी.
आरोपी के अधिवक्ता बलराम सोम ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट की रूलिंग का हवाला देते हुए कोर्ट में साक्ष्य पेश किये गए. साथ ही रूलिंग भी प्रस्तुत की. जिस पर अदालत ने ने ये निर्णय सुनाया कि वारदात के समय आरोपी आरोपी नाबालिग था ये साक्ष्यों से प्रतीत होता है. इसके बाद अब जेजे बोर्ड में इस मामले की सुनवाई होगी.
अब तक इस मामले में विशेष न्यायाधीश (एससी-एसटी एक्ट) सुनवाई कर रहे थे. लेकिन पर्याप्त साक्ष्य होने के आधार पर मामले को जेजे बोर्ड भेजने का निर्णय लिया गया है. अब इस मामले को लेकर हर तरह के कागजात व चार्जशीट जेजे बोर्ड में ही भेजे जाएंगे.
