मेरठ 27 फरवरी (प्र)। सेंट्रल मार्केट की सुबह इन दिनों सामान्य नहीं है। दुकानों के शटर भले उठ रहे हों, लेकिन व्यापारियों के माथे पर चिंता की लकीरें साफ दिख रही हैं। छह सप्ताह की मोहलत बीत चुकी है और अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश की छाया में बुलडोजर की गड़गड़ाहट का इंतजार है। कार्रवाई से पहले ही कई व्यापारियों ने खुद आगे बढ़कर अपनी दुकानों के आगे बने हिस्से तोड़ने और सेटबैक देने की शुरुआत कर दी है। मामला शास्त्रीनगर, जागृति विहार और माधवपुरम योजना का है, जहां रिहायशी भूखंडों पर व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं।
सुप्रीम कोर्ट के 27 जनवरी के आदेश के अनुपालन में परिषद ने 729 परिसरों को चिन्हित किया है। जिन स्थानों पर ध्वस्तीकरण प्रस्तावित है, वहां लाल रंग से क्रॉस के निशान लगाए जा चुके हैं। परिषद की ओर से जारी नोटिस की समय सीमा समाप्त हो चुकी है। मंगलवार से अभियान शुरू होना था। हालांकि, पर्याप्त पुलिस बल उपलब्ध न होने के कारण बुलडोजर की कार्रवाई फिलहाल टल गई। इसके बावजूद बाजार में असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
संकट में कारोबार, सख्ती पर अडिग परिषद
व्यापारियों का कहना है कि वे समाधान चाहते हैं, लेकिन अचानक सख्ती से कारोबार पर संकट गहरा गया है। वहीं, परिषद स्पष्ट कर चुकी है कि आदेश का अनुपालन हर हाल में कराया जाएगा। ऐसे में बाजार की हवा में इस समय सिर्फ एक सवाल तैर रहा है कि बुलडोजर कब चलेगा?
सेंट्रल मार्केट ध्वस्तीकरण पर रोक की गुहार
शास्त्री नगर स्थित सेंटल मार्केट में प्रस्तावित ध्वस्तीकरण को लेकर व्यापारियों का दर्द अब देश की सर्वाेच्च अदालत तक पहुंच गया है प्रभावित व्यापारियों और कर्मचारियों ने डीएम के माध्यम से मुख्य न्यायाधीश को पत्र भेजकर मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की अपील की गई है। पत्र में कहा गया कि मेरठ के इस बाजार से हजारों दुकानदारों, कर्मचारियों, श्रमिकों और उनके परिवारों की रोजी-रोटी जुड़ी है अचानक ध्वस्तीकरण की कार्रवाई से छोटे व्यापारियों, दिहाड़ी मजदूरों, रिक्शा चालकों और ठेला संचालकों के सामने आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा। व्यापारियों ने स्पष्ट किया कि वे न्यायालय के आदेशों सम्मान करते हैं. लेकिन पुनर्वास और वैकल्पिक व्यवस्था के बिना कार्रवाई से सामाजिक और आर्थिक अस्थिरता बढ़ेगी। पत्र में ध्वस्तीकरण पर तत्काल रोक, प्रभावितों के पुनर्वास की व्यवस्था और सभी पक्षों को सुनवाई का अवसर देने की मांग की गई है। पत्र में मेरठ के व्यापारी उमाशंकर खसीक, राहुल मलिक, मेरठ व्यापार मंडल के जिला अध्यक्ष जीतू नागपाल और अर्पित मोगा सहित कई लोगों के हस्ताक्षर शामिल हैं।
