Wednesday, March 25

चार वर्षीय एकीकृत शिक्षक पाठ्यक्रम होगा शुरू

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मेरठ 25 मार्च (प्र)। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप शैक्षणिक सत्र 2026-27 से चार वर्षीय एकीकृत शिक्षक शिक्षा पाठ्यक्रम बीए बीएड एवं बीएससी- बीएड प्रारम्भ करने की घोषणा की है। इन पाठ्यक्रमों के संचालन के लिए विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद से मान्यता प्राप्त हो चुकी है। कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला के नेतृत्व में शुरू हो रहा यह कार्यक्रम माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्तर के लिए योग्य व दक्ष शिक्षकों के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, प्रवेश राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी द्वारा आयोजित राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षा के माध्यम से होगा।

वर्ष 2026 में कक्षा 12वीं की परीक्षा में शामिल होने वाले अथवा उत्तीर्ण अभ्यर्थी निर्धारित पात्रता के अनुसार आवेदन कर सकेंगे। इस पाठ्यक्रम में विषय ज्ञान के साथ शिक्षण कौशल, विद्यालयीय प्रशिक्षण, शैक्षिक प्रौद्योगिकी और शोध आधारित अध्ययन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। चार वर्ष की अवधि पूर्ण होने पर विद्यार्थियों को स्नातक उपाधि के साथ बीएड की डिग्री प्रदान की जाएगी।

प्रवेश प्रक्रिया विश्वविद्यालय अनुदान आयोग और राज्य सरकार के दिशा-निदेशों के अनुसार संचालित होगी तथा सीटों का आवंटन आरक्षण नीति और मेरिट के आधार पर किया जाएगा। विश्वविद्यालय का मानना है कि यह पहल शिक्षक शिक्षा में गुणवत्ता, पारदर्शिता और शैक्षणिक उत्कृष्टता को और मजबूत करेगी। इसके साथ ही विश्वविद्यालय के दूरस्थ शिक्षा केंद्र के माध्यम से पहले से संचालित पाठ्यक्रमों के अतिरिक्त नए पाठ्यक्रमों को भी अनुमति मिली है। विभिन्न दूरस्थ और ऑनलाइन माध्यम के पाठ्यक्रमों में प्रवेश की अंतिम तिथि 29 मार्च 2026 निर्धारित की गई है, जिससे इच्छुक अभ्यर्थी समय रहते आवेदन कर सकें। विश्वविद्यालय में भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक शिक्षा को नई दिशा देने की पहल की गई है।

विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर संगीता शुक्ला के नेतृत्व में पद्मश्री सम्मानित प्रख्यात लोक गायिका मालिनी अवस्थी को हिंदी विभाग में प्रैक्टिस की प्रोफेसर के रूप में नियुक्त किया गया है। यह कदम भारतीय ज्ञान परंपरा, लोकभाषाओं और सांस्कृतिक विरासत को शैक्षणिक ढांचे में सशक्त स्थान देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मालिनी अवस्थी अवधी, भोजपुरी, ब्रज और बुंदेली लोकसंगीत की अग्रणी कलाकार हैं और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारतीय लोक संस्कृति को नई पहचान दिला चुकी हैं। वे बनारस घराने की प्रसिद्ध गायिका गिरिजा देवी की शिष्या रही हैं, जिससे उनकी शास्त्रीय पृष्ठभूमि मजबूत है। उनके जुड़ने से विद्यार्थियों को लोक संगीत, भाषा और परंपराओं का व्यावहारिक तथा अनुभव आधारित प्रशिक्षण मिलेगा और शोध व सांस्कृतिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। इसी क्रम में विश्वविद्यालय ने नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए शैलेन्द्र एन. जायसवाल को प्रबंधन विषय में प्रैक्टिस की प्रोफेसर नियुक्त किया है। वे 35 वर्षों के अनुभव के साथ डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑगेर्नाइजेशन और इंडियन रेलवे में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा चुके हैं। उनके मार्गदर्शन में विद्यार्थियों को स्वरोजगार, नवाचार और उद्योग से जुड़े कौशल सीखने का अवसर मिलेगा।

वेबोमेट्रिक्स 2026 में सीसीएसयू का परचम, प्रदेश में दूसरा स्थान
चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय ने वेबोमेट्रिक्स रैंकिंग 2026 में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए वैश्विक स्तर पर अपनी सशक्त पहचान दर्ज कराई है। इस रैंकिंग के अनुसार विश्वविद्यालय को विश्व में 2972वां महाद्वीप में 1187वां तथा भारत में 136वां स्थान प्राप्त हुआ है। विशेष रूप से विश्वविद्यालय ने उत्तर प्रदेश के राज्य विश्वविद्यालयों में दूसरा स्थान हासिल कर अपनी शैक्षणिक स्थिति को और मजबूत किया है। इस उपलब्धि पर विश्वविद्यालय की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल के मार्गदर्शन और कुलपति प्रोफेसर संगीता शुक्ला के नेतृत्व को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विश्वविद्यालय ने शिक्षा, शोध और डिजिटल उपस्थिति के क्षेत्र में निरंतर प्रगति करते हुए यह उपलब्धि हासिल की है। कुलपति के अनुसार यह सफलता शिक्षकों, शोधार्थियों, विद्यार्थियों और कर्मचारियों के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है, जो विश्वविद्यालय की बढ़ती वैश्विक पहचान और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के प्रति प्रतिबद्धता को दशार्ती है। वहीं शोध निदेशक प्रोफेसर बीरपाल सिंह ने बताया कि किया जाता है। यह एक अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग प्रणाली है, जिसे साइबरमैट्रिक्स प्रयोगशाला द्वारा प्रकाशित किया जाएगा।

सीसीएसयू में जल्द शुरू होगा ऑनलाइन वेरिफिकेशन पोर्टल
चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के छात्रों के लिए राहत भरी खबर है। विश्वविद्यालय प्रशासन जल्द ही ऑनलाइन वेरिफिकेशन पोर्टल शुरू करने जा रहा है, जिसकी तैयारियां तेज कर दी गई हैं। पोर्टल के शुरू होते ही छात्र और विभिन्न सरकारी व निजी संस्थान घर बैठे ही परीक्षा परिणामों का सत्यापन कर सकेंगे वर्तमान में विश्वविद्यालय में सत्यापन की प्रक्रिया पूरी तरह मैन्युअल है, जिसके कारण छात्रों को लंबी कागजी कार्रवाई और समय की बाद का सामना करना पड़ता है। इस समस्या को लेकर छात्र संघ के पूर्व महामंत्री अंकित अधाना ने हाल ही में सहारनपुर स्थित मां शाकुंभरी विश्वविद्यालय के ऑनलाइन सिस्टम का उदाहरण देते हुए मांग उठाई थी। अब छात्रों की मांग और जरूरत को देखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं। प्रस्तावित पोर्टल को सुरक्षित और पारदर्शी बनाया जाएगा। साथ ही पुराने वर्षों के परिणाम भी वेबसाइट पर अपलोड करने की योजना है, जिससे पूर्व छात्रों को भी बार-बार विश्वविद्यालय नहीं आना पड़ेगा। इस व्यवस्था के लागू होने से फर्जी मार्कशीट और डिग्री के मामलों पर रोक लगेगी और सत्यापन प्रक्रिया में तेजी आएगी। अंकित अधाना ने बताया कि इस सुविधा से दूर-दराज के छात्रों को विशेष राहत मिलेगी।

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