Wednesday, March 25

एटीएम से छेड़छाड़ कर रूपये चोरी करने का आरोपी गिरफ्तार

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मेरठ 25 मार्च (प्र)। एटीएम के कैश आउटलेट के अंदर टेप और पत्ती लगाकर ग्राहकों के रुपये हड़पने वाले आरोपी को गिरफ्तार किया है। टेप और पत्ती लगने के बाद ग्राहक के अकाउंट से रुपये कट जाते थे, लेकिन मशीन में फंसने के कारण ग्राहक को नहीं मिल पाते थे।
रिठानी स्थित यूनियन बैंक ऑफ इंडिया शाखा, लीग्रेड के शाखा प्रबंधक अरुण कुमार ने 14-15 मार्च को परतापुर थाने परदो शिकायती पत्र दिए।

शाखा प्रबंधक ने बताया कि उनके एटीएम से रुपये निकलने और खाते से पैसे कटने के बाद भी मशीन से नहीं निकले। इस पर बैंक अधिकारियोंने एटीएम के अंदर लगा सीसीटीवी फुटेज खंगाला। फुटेज में 15 मार्च को दो संदिग्ध युवक बैंक परिसर स्थित एटीएम में छेड़छाड़ कर ग्राहकों के रुपये चोरी करते सीसीटीवी कैमरे में कैद हुए हैं। पुलिस ने तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर लिया।
सीसीटीवी फुटेज और सर्विलांस के जरिए आरोपियों की पहचान जनपद फैजाबाद के थाना देवकाली क्षेत्र के जपती वजीरगंग गायत्रीपुरम निवासी सत्यार्थ मिश्र पुत्र देवेंद्र मिश्रा तथा उसके साथी सत्यम के रूप में हुई। सत्यार्थ मिश्रा वर्तमान में गाजियाबाद के विजयनगर थाना क्षेत्र के प्रतीक ग्रेड सिटी पी में रह रहा है। पुलिस ने मंगलवार को आरोपी सत्यार्थ मिश्र को चेकिंग के दौरान गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने उसके पास से 4330 रुपये तथा एक स्कॉर्पियो गाड़ी बरामद की है। इसके बाद आरोपी को न्यायालय में पेश किया, जहां से उसको न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया।

कानपुर से बीबीए है सत्यार्थ
एटीएम के कैश आउटलेट में टेप की मदद से लोहे की पत्ती लगाकर ग्राहकों के रुपये हड़पने वाले सत्यार्थ मिश्र ने कानपुर से बीबीए कर रखी है। नौकरी की तलाश में कुछ समय पहले वह गाजियाबाद आया था। इस दौरान खर्च चलाने के लिए उसने अपने साथी के साथ मिलकर एटीएम से रुपये उड़ाने शुरू कर दिये रिठानी स्थित यूनियन बैंक ऑफ इंडिया परिसर में 14- 15 मार्च को वे काली स्कॉर्पियो कार से पहुंचते थे। कार से उतरते और एटीएम में जाकर कैश आउटलेट में पत्ती लगाने तथा फिर फंसे रुपये निकालकर कार से जाते हुए सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गए थे। पुलिस स्कॉर्पियो के रजिस्ट्रेशन नंबर से ही आरोपियों तक पहुंची।

वारदात को ऐसे देते थे अंजाम
परतापुर थाना प्रभारी अजय शुक्ला ने बताया कि सत्यार्थ मिश्रा चाबी से एटीएम खोलता था। फिर कैश आउटलेट के अंदर टेप से लोहे की पत्ती चिपका देता था। लोहे की पत्ती सटने के कारण रुपये अंदर ही फंसे रह जाते थे ग्राहक समझता था कि एटीएम ने रुपये नहीं दिये। हालांकि एटीएम रुपये निकलते थे और ग्राहक के अकाउंट से कट भी जाते थे कैश आउटलेट में लोहे की पत्ती लगाने के बाद सत्यार्थ मिश्रा और उसका साथी नजदीक खड़े हो जाते थे। जब तीन-चार ग्राहक रुपये एटीएम में फंस चुके होते तो वे फिर एटीएम में जाते और चाबी से एटीएम खोलकर रुपये निकाल लते थे।

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