मेरठ 02 अप्रैल (प्र)। शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट में अवैध निर्माण पर कार्रवाई न होने को लेकर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट के सख्त रवैये को देखकर व्यापारी सहमे हुए हैं। उनकी निगाह गुरुवार को इस मामले में न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन की बैंच के समक्ष प्रमुख सचिव आवास पी गुरुप्रसाद के व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने व उसके बाद कोर्ट के आदेश पर टिकी है।
यापारियों के अधिवक्ता ने भी रखा पक्ष
कोर्ट में व्यापारियों की ओर से उनके अधिवक्ता कन्हैया ने पक्ष रखा। कहा कि दुकानों को बंद कर दिया गया है या अवैध निर्माण हटाया जा रहा है। जहां तक भू उपयोग परिवर्तन की बात है तो उसका पालन करने को व्यापारी तैयार हैं। इस पर कोर्ट ने कहा कि हम जानना चाहते हैं परिषद ने हमारे निर्देशों का किस प्रकार पालन किया है।
व्यापारी राहुल मलिक ने बताया कि लगभग सभी व्यापारियों में कुछ ने पूर्ण और कुछ ने आंशिक रूप से शुल्क जमा करा दिया है। जो लगभग 60 करोड़ है। शास्त्रीनगर योजना संख्या सात में 860 अवैध निर्माण चिन्हित किए गए थे जिसमें से 250 भूखंडों पर बनी दुकानें या तो बंद हो गई। जिसके तहत दुकानों का शटर हटा कर वहां पर दीवार बना दी गई है या दरवाजा लगा दिया गया है।
मेन सेंट्रल मार्केट में वर्तमान में नियमानुसार सेट बैंक छोड़ने के लिए कई निर्माणों को तोड़ा जा रहा है।
भू उपयोग परिवर्तन की अनुमति पर दर्ज कराई आपत्ति
लोकेश खुराना ने बताया कि 27 जनवरी को कोर्ट के आदेश के बाद 27 फरवरी को उम्र आवास एवं विकास परिषद ने 80 व्यापारियों को भू उपयोग परिवर्तन की अनुमति देते हुए उनसे शुल्क जमा करने का पत्र जारी किया था 180 निर्माणों में 250 से अधिक दुकानें हैं। लोकेश खुराना के वकील तुषार जैन ने कोर्ट के समक्ष इस बाबत आपत्ति दर्ज कराई। कहा कि यह कोर्ट के आदेश की अवमानना है।
व्यापारी बोले- परिषद को बंद दुकानों व अवैध निर्माण हटाने का रखना चाहिए था व्योरा
मेन सेंट्रल मार्केट व्यापार संघ के अध्यक्ष जीतेंद्र अग्रवाल ने बताया कि 60 से अधिक व्यापारियों ने अब तक लगभग 60 करोड़ रुपया भू उपयोग परिवर्तन शुल्क के रूप में जमा करा दिया है। 250 दुकानें बंद हो गई हैं। कई दुकानदारों ने तो दुकान बंद कर दी हैं। जगह-जगह सैट बैक छोड़ने के लिए व्यापारी स्वयं अपना निर्माण तोड़ रहे हैं। इन सब तथ्यों को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष रखा जाना चाहिए। व्यापार बचाओ संघर्ष समिति के संयोजक सतीश गर्ग का कहना है कि बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में व्यापारियों की ओर से अधिवक्ता कन्हैया ने बताया, सेंट्रल मार्केट में व्यापारी अपना-अपना अवैध निर्माण हटाने की पहल कर रहे हैं, इसका ब्यौरा दिया जाना चाहिए। तिरंगा चौक व्यापार संघ शास्त्रीनगर सेक्टर दो के अध्यक्ष मनोज गर्ग ने कहा, उनके संगठन से 150 दुकानदार जुड़े हैं। 25 दुकानें बंद हो गई हैं, कई ने भू उपयोग परिवर्तन शुल्क जमा कराया है।
आवास एवं विकास परिषद की कमी रही है कि उसने रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की। किसान मजदूर संगठन के महानगर अध्यक्ष विजय राघव ने कहा कि परिषद को मजबूती से अपना पक्ष रखना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। परिषद ने बंद दुकानों और तोड़ी जा रही इमारतों की वीडियोग्राफी भी कराई थी। यह सभी तथ्यों से कोर्ट को अवगत कराया जाना चाहिए था। परिषद के गुरुवार को रिपोर्ट प्रस्तुत करने के बाद उनकी ओर से भी पक्ष रखा जाएगा।
