Thursday, April 2

लखनऊ डीआईजी पद से सेवा निवृत्त हुई साधना गोस्वामी की 25 साल बाद आवाज सुनकर उनकी लोकप्रियता की यादें ताजा हो गई

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मेरठ, 02 अप्रैल (दैनिक केसर खुशबू टाईम्स)। शहर के पुराने नागरिक को यहां 2001 में सीओ सिटी के पद पर रहते हुए अत्यंत लोकप्रिय रही साधना गोस्वामी के बारे में अच्छी प्रकार से जानते है और युवाओं ने भी कभी न कभी कहीं न कहीं उनका नाम ना सुना हो ऐसा नहीं हो सकता। क्योंकि प्रदेश की राजधानी लखनऊ में डीआईजी के पद पर रहते हुए सेवानिवृत्त हुई साधना गोस्वामी 2001 में जब यहां तैनात थी तो सीटी मजिस्ट्रेट डीके सिंह एसपी सिटी जेपी एस राठौर एडीएमए सिटी जेपी सिंह डीएम एसएन सेठ और एसएसपी डा0 कश्मीर सिंह का तालमेल जनपद के नागरिकों की हर संभव समस्याएं सुलझाने और उन्हें राहत पहुंचाने के लिए भरपूर प्रयास किया करते थे। मैंने पत्रकार के रूप में देखा कि नियम और कानून का पालन करते हुए वो पुलिस हो या प्रशासन व अन्य किसी विभाग से संबंध नागरिकों की समस्याओं का हल आपस में बातचीत करते हुए निकाल लिया करते थे। आज जहां घंटाघर पर एसपी सिटी का ऑफिस तब वहां सीओ सिटी बैठा करते थे और दफ्तर आने से जाने तक काम और बेकाम मिलने आने वाले और नमस्ते करने का जो सिलसिला शुरू होता था वो चलता ही रहता था। मुझे याद नहीं है कि कभी भी कोई ऐसा मामला आया हो जो साधना गोस्वामी ने सिटी मजिस्ट्रेट डीके सिंह के साथ मिलकर सफलता प्राप्त ना की हो। ऐसा भी नहीं रहा कि वो सिर्फ लोकप्रियता ही प्राप्त करती रही हो कानून व्यवस्था बनाये रहने और जटिल से जटिल परेशानी का समाधान खोजने में उन्हें महारथ हासिल था। मुरादाबाद रामपुर लखनऊ पुलिस विभाग में अनेक पदों पर रहते हुए उन्होंने जहां सरकार की नीतियों का पालन कराते हुए कानून व्यवस्था और भयमुक्त वातावरण बनाये रखा वहीं सरकार की हर योजना को लागू कराने में भी अग्रणी भूमिका निभाई।
बीती रात को 25 साल बाद लगभग 11 बजे अचानक फोन की घंटी बजी उठाने पर कहा गया बिश्नोई भाई पहचानों मैं कौन हूं अब क्योंकि 25 साल बाद अचानक घंटी बजी तो आवाज पहचान नहीं पाया तब उन्होंने बताया कि भईया में साधना गोस्वामी बोल रही हूं उसके बाद तो 25 साल का नजारा चलचित्र की भांति घूम गया। तब उन्होंने बताया कि भईया जेपी एस राठौर सर से बात हो रही थी उन्होंने आपके बारे में बताया तो मैं अपने को रोक नहीं पाई। और इस समय टेलीफोन मिला लिया। लगभग 20 मिनट तक चली वार्ता में पुराने साथियों आदि के बारे में खूब चर्चा हुई और फिर उन्होंने लखनऊ आने का न्यौता और मैनें मेरठ आने की बात कहीं और इस वायदे के साथ ही जब भी आना मिलेगा आयेंगे एक दूसरे को वित्तीय वर्ष 2026-27 और हनुमान जयंती की बधाई के साथ वार्ता समाप्त हुई मगर कई घंटे तक साधना गोस्वामी जी का समय और उनकी कार्यप्रणाली तथा जनता से तालमेल की जो घटनाएं थी वो याद आती चली गई। और सबसे अच्छी बात यह थी कि सारी स्मृतियां बहुत अच्छी और यादगार थी।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक पत्रकार)

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