
मेरठ, 15 अप्रैल (दैनिक केसर खुशबू टाईम्स)। यूपी के मेरठ के शास्त्री नगर में स्थित आवासीय भवनों में बने कॉमर्शिलय कॉम्पलैक्सों के विरूद्ध माननीय न्यायालय के आदेश पर सेन्ट्रल मार्केट में व्यापारिक प्रतिष्ठानों, स्कूलों के साथ ही बैंकों की शाखाओं पर लगायी गयी सील ने सभी बैंकों के मुख्यालयों में बैठे अफसरों की एक सूचना के अनुसार नींद उड़ा दी है और भविष्य में उनके बैंक के साथ ऐसी कार्यवाही न हो इसके लिए सभी ने अपनी बैंक शाखाओं को निर्देश दिये हैं कि वह नियमानुसार बने सुरक्षित निर्माणों में अपनी शाखा खोलें और जहां अवैध निर्माणों में चल रही है उन्हें बंद किया जाये क्योंकि इससे बैंकों की प्रतिष्ठा धूमिल हो रही है।
बताते चले कि वर्तमान समय में जगह-जगह खुलने वाले राष्ट्रीय और बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के शोरूम रिहायशी या सरकारी जमीन घेरकर बनाये गये कॉम्पलैक्सों में मोटे किराये पर दुकान शोरूम और बैंक खोले जा रहे हैं इससे अवैध निर्माणकर्ता तो मालामाल हो रहा है लेकिन सरकार की सुनियोजित विकास और निर्माण नीति का पालने कराने की योजना लगभग समाप्त हो रही है। जब से माननीय न्यायालय ने इस ओर मिल रही शिकायतों पर ध्यान दिया है जब से दिल्ली जबलपुर और मेरठ आदि जगहों पर हो रही सख्त कार्यवाही ने इन किरायेदारों की नींद उड़ा दी है। मगर अभी तक कंपनियों और बैंकों के उच्च कार्यालयों में बैठे अफसरों तक शायद यह खबर नहीं पहुंच रही थी इसलिए फर्जी एनओसी दिखाकर अवैध निर्माण करा कर अपने यहां धड़ाधड़ बैंक शाखाएं खुलवा रहे थे लेकिन अब माननीय न्यायालय के सख्त रूख को देखते हुए सकते में है और शाख और सम्मान बचाने हेतु नियमानुसार बने भवनों में बैंक शाखाएं ले जाने के प्रयास शुरू हो गये हैं।
इस संदर्भ में प्राप्त खबर के अनुसार आवास विकास की योजना संख्या-7 शास्त्रीनगर में भूखंडों को सील करने की कार्रवाई के बाद अब आवासीय क्षेत्र में संचालित हो रहे बैंकों में खलबली है। बैंक मुख्यालयों नें बैंक शाखाओं में मेल कर भूखंड अवासीय है या व्यवसायिक है, भवन का स्वीकृत मानचित्र समेत अन्य मानकों की जांच कर सूचना मांग ली है। यह भी कहा है कि अनधिकृत भवनों में यदि कोई शाखाएं संचालित है तो उसे शिफ्ट किया जाए।
सेन्ट्रल मार्केट मामले में आवासीय भवनों में बैंकों की शाखाओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट के सख्त आदेश के बाद खलबली मची है। शीर्ष अदालत के सख्त आदेशों के अनुपालन में विभिन्न बैंकों के मुख्यालयों ने अपनी शाखाओं को तत्काल मेल भेजकर अनधिकृत या अवैध घोषित भवनों से परिसर खाली करने और सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट होने के निर्देश दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि अनाधिकृत रूप से चल रही व्यावसायिक गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। चूंकि कई प्रमुख बैंकों की शाखाएं इन्हीं विवादित भवनों में संचालित हो रही हैं, इसलिए अब उन पर सीलिंग या ध्वस्तीकरण की गाज गिरना तय माना जा रहा है। जैसे ही सुप्रीम कोर्ट का आदेश सार्वजनिक हुआ, बैंकों के जोनल और हेड ऑफिस सक्रिय हो गए। बैंक मुख्यालयों ने ईमेल में जिन शाखाओं के पास वैध ‘कम्प्लीशन सर्टिफिकेट’ या ‘नक्शा’ नहीं है।
भविष्य में इस तरह की परेशानी न हो। इसके लिए मुख्यालय ने सभी शाखाओं में भवन से संबंधित सभी जानकारी उपलब्ध करने के लिए कहा है। इसी के आधार पर सभी शाखाओं को मेल कर जानकारी मांगी गई है।
मौखिक चर्चानुसार जोनल और हेड ऑफिस में बैठे अधिकारियों की अवैध निर्माण में बने बैंकों की शाखाओं को दूसरी जगह हस्तानांतरित कराने के लिए बरती जा रही सक्रियता से लगता है कि जल्द ही अब सरकारी व गैर सरकारी बैंकों की शाखाएं दूसरी जगह पर हस्तानांतरित होंगी।
जानकारों का मौखिक रूप से कहना है कि पांच सिविल लाइन क्षेत्र मेरठ कॉलेज के अपोजिट मेट्रों के क्षेत्र में आने से घरेलू भूमि पर हुए कॉमर्शियल निर्माण को सही बताकर आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की खुली शाखा में अपने एकाउंट खुलवाने वालों में भी अफरा तफरी का माहौल बना हुआ बताया जाता है कितनों का कहना है कि अगर बैंक की शाखा यहां से स्थानांतरित होती है तो उन्हें परेशानी हो सकती है खबर के अनुसार किसी ने खाता बंद कराने के लिए आवेदन तो नहीं किया है मगर उनमें इसको लेकर चर्चा जरूर बताई जाती है। चर्चा है कि उक्त बैंक की बिल्डिंग लाखों रूपये किराये पर उठी है असलियत तो निर्माणकर्ता या संबंधित जाने मगर बताया यह जा रहा है कि जो लोन लेकर यह बिल्डिंग बनायी गयी है अगर वह खाली हो जाती है तो जैसे और बिल्डर बैंकों का रूपये लेकर बैठ चुके हैं क्या इसका संचालक भी उनका अनुसरण करेगा। किसी क्या करना है क्या नहीं यह तो उसकी सोच है मगर न्यायालय की सख्ती ऐसे ही चली तो यह बैंक भी लपेटे में आयेगा इससे इनकार नहीं किया जा सकता क्योंकि ना तो यह मेट्रो क्षेत्र में आ रहा है और ना ही कॉमर्शियल है सरकार की नीति के तहत जमीन का कुछ हिस्सा कॉमर्शियल उपयोग में लिया जा सकता है लेकिन वह भी सरकार की निर्माणनीति का पालन करते हुए हो मगर जो सूत्र बता रहे है राजेश मित्तल द्वारा बनाई गयी इस बिल्डिंग में उसका भी पालन नहीं किया गया। ऐसा जानकारों का कहना है।
