मिलावटी खाद्य सामग्री बिकने की खबरें पढ़ने सुनने को मिलती ही रहती है। मगर खाद्य विभाग के अधिकारी छापे मारकर खबरें छपवाकर वाह वाही लूटते रहते हैं वरना पिछले दस साल से चल रही नकली पनीर बनाने की फैक्ट्री का खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारियों को जानकारी क्यों नहीं हुई। एक खबर के अनुसार जानी थाना क्षेत्र के नंगलाकुभा गांव में हामिद और जाविद नकली पनीर बनाने की फैक्ट्री चला रहे थे। इस बारे में जब मुख्यमंत्री के यहां शिकायत हुई तो लखनऊ से आई टीम ने गत दोपहर फैक्ट्रियों पर छापेमारी की जिसमें २८०० किलो नकली पनीर और डेयरी प्रोडक्ट बरामद हुए। इस संबंध में जानी थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया है। बताते हैं कि जाबिद गांव में ही पनीर बनाने की फैक्ट्री चला रहा था जिसमें केमिकल पाम ऑयल और टाटरी का पानी मिलाकर नकली पनीर और अन्य डेयरी प्रोडक्ट तैयार कर रहा था। मुख्यमंत्री को मिली गोपनीय शिकायत पर खाद्य सुरक्षा आयुक्त डॉ रोशन जैकब ने लखनऊ से टीम मेरठ भेजी जिसमें मेरठ के खाद्य विभाग के अधिकारियों को अलग रखा गया जो इस बात का भी प्रमाण है कि शासन को भी स्थानीय अधिकारियों पर विश्वास नहीं था। लखनऊ से आए वीके राठी मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी का कहना था कि गोपनीय शिकायत पर छापेमारी कर यह सामान पकड़ा गया और बाकी बरामद कर नष्ट कराया गया। इस टीम की कार्रवाई ढाई घंटे चली। इसके बाद ग्रामीणों में हड़कंप मच गया। बताते हैं कि आरोपियों के खिलाफ पहले भी कई मुकदमे विचाराधीन है। इस कार्रवाई में १७ सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं। जो भी हो इससे यह स्पष्ट हो रहा है कि खाद्य विभाग की स्थानीय टीम सिर्फ शो पीस बनकर रह गई है मिलावटी खाद्य सामग्री बिकने से रोकने में। जनहित में स्थानीय अधिकारियों को किसी काबिल अधिकारी को यहां भेजे। यहां नियुक्त अधिकारियों को किसी भी जिले में तैनाती ना दी जाए।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
दस साल से चल रही थी नकली पनीर बनाने की फैक्ट्री, लखनऊ से आई टीम ने किया खुलासा, स्थानीय अधिकारियों को निलंबित कर जिलों में ना दी जाए नियुक्ति
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