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शहर सर्राफा के अवैध निर्माणों और कावकनुमा दुकानों में चल रहे आम नागरिकों के लिए खतरनाक व्यवसाय की रिटायर जज की अध्यक्षता में गठित समिति से कराई जाए जांच

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ब्रिजेश अग्रवाल का प्रयास है महत्वपूर्ण, उस पर होनी ही चाहिए कार्रवाई

मेरठ, 17 अप्रैल (विशेष संवाददाता) शहर सर्राफा हो या अन्य बाजार औद्योगिक प्रतिष्ठान सब जगह व्यापारी वर्ग हो या आम आदमी सुरक्षा तो सबको मिलनी ही चाहिए और उसका अहसास भी होना चाहिए। लेकिन खतरनाक बिजली के ढीले तारों से शहर सर्राफा की छोटी छोटी गलियों में निरंतर सरकारी निर्माण नीति का उल्लंघन कर बनाए जा रही कावकनुमा दुकानों और कॉम्पलैक्स कभी भी यहां व्यापारियों और यहां के निवासियों के लिए खतरा उत्पन्न कर सकते हैं इस बात से कोई भी इनकार नहीं कर सकता। पूर्व में कई बार स्थानीय नागरिकों ने यहां होने वाले अवैध निर्माणों और बनने वाली दुकानों व उनमें स्वास्थ्य के लिए होने वाले हानिकारक कार्यों के खिलाफ आवाज भी उठाई लेकिन वो नक्कारखाने में तूती के समान गुम होकर रह गई। अब बीते दिनों ब्रिजेश अग्रवाल पुत्र राधा कृष्ण अग्रवाल निवासी चाहमेमरान कोतवाली द्वारा शहर के कुछ प्रमुख सर्राफा व्यवसायियों अवैध निर्माण तथा उन्हेंं संरक्षण देने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई जिसमें धारा 120बी के तहत आरोपितों का जेल जाना जरूरी होता बताया जाता है शायद इसीलिए नामजद व्यापारियों और उनके सर्मथकों द्वारा सर्राफा व्यसायियों के हित के नाम पर इस प्रकरण को दबाने और एफआईआर की तरफ से अफसरों का ध्यान हटाने के लिए पुलिस के शीर्ष अधिकारियों सहित जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों से भी मुलाकात की जा रही है और एफआईआर दर्ज कराने वाले पर कई प्रकार के आरोप लगाए जा रहे हैं। अब इसके पीछे असलियत क्या है यह तो जांच का विषय है और मुझे लगता है कि जनहित में मेरठ मंडलायुक्त द्वारा फायर ब्रिगेड विकास प्राधिकरण नगर निगम और पुलिस प्रशासनिक अधिकारियों की एक समिति बनाकर किसी रिटायर जज की अध्यक्षता में समिति गठित कर पूरे प्रकरण की जांच करानी चाहिए और जो भी दोषी हो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाए। इस दौरान यहां की गलियों में जो नरक सा माहौल बना रहता है उसको भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।

बीते दिनों शहर सर्राफा व्यावसायियों द्वारा हमारा सांसद कैसा हो इस पर चर्चा की गई और इस दौरान सुरक्षा व्यापारी उत्पीड़न रोकने सर्राफा व्यापारियों के लिए कॉमन फैसिलिटी सेंटर आदि की मांग की गई जो पूरी तौर पर उचित प्रतीत होती है लेकिन सवाल यह उठता है कि सरकार अगर समाज के सबसे धनी लोगों के लिए भी जो खुद भी सबकुछ कर सकते हैं सरकार से ही सबकुछ चाहेंगे तो गरीब और असंगठित क्षेत्र के लोगों का क्या होगा। बताते चलें कि सर्राफा के चारों तरफ रहने वाले नागरिकों में हमेशा इस बात को लेकर फिक्र रहती बताई जाती है कि अगर कभी यहां कुछ हो गया तो यहां क्या होगा तो फायर बिग्रेड की गाड़ियां भी नहीं पहुंच पाएगी। ऐसे में क्या होगा। इसलिए सबसे जरूरी है कि ब्रिजेश अग्रवाल पुत्र राधा कृष्ण अग्रवाल जो अवैध सर्राफा मार्केट बनाने की ओर सरकार का ध्यान दिलाते हुए एफआईआर कराई गई है उस पर भले ही गिरफतारी ना हो लेकिन जांच जरूर होनी चाहिए और अब सख्ती के साथ शहर सर्राफा में होने वाले अवैध निर्माणों पर लगाई जाए रोक। इसे रोकने में असफल मेडा मेरठ विकास प्राधिकरण के अधिकारियों के खिलाफ भी हो सख्त कार्रवाई क्योंकि समाज में शांति और सदभाव से किसी को भी खिलवाड़ करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।

  • वर्तमान में अवैध निर्माण और खतरनाक कारखाना लगाने को लेकर जारी प्रकरण में ब्रिजेश अग्रवाल पुत्र राधा कृष्ण अग्रवाल निवासी चाहमेमरान कोतवाली की तहरीर में. कहा गया है कि जहां उनका मकान है। वहां अपराधिक प्रवृत्ति के कुछ लोग अवैध सराफा मार्केट व कारखाना लगाना चाहते हैं। आरोपी डरा धमका कर उनका मकान खरीदना चाहते हैं। उनकी रैकी करायी जा रही है। तहरीर में कहा गया है कि चार अप्रैल को एक संदिग्ध शख्स को भेजकर उनके घर पर लगे सीसीटीवी कैमरे को तोड़ दिया गया। ब्रिजेश का कहना कि चार अप्रैल को जब वह अपने पुत्र के साथ सुभाष बाजार से लौट रहे थे तो डराने धमकाने का प्रयास किया। अभद्रता की। उन्होंने कई गंभीर आरोप तहरीर में लगाए हैं। तहरीर के आधार पर पुलिस ने राजीव जैन, आनंद जैन निवासी साकेत, दिपांशु निवासी ब्रह्मपुरी, मनोज वर्मा निवासी शास्त्रीनगर, पुरु वर्मा निवासी शास्त्रीनगर, अभिषेक कुमार निवासी हनुमानपुरी, पिंटू निवासी घंटाघर, अंकित गुप्ता निवासी राज राजेश्वरी पैलेस, अशोक गुप्ता,  निवासी पत्थर वालान, सागर रस्तोगी निवासी पत्थर वालान व एक अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। गैर जमानती धाराएं कोतवाली पुलिस ने जिन धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है उनमें से 120बी सरीखी धारा में जेल जाना जरूरी है। इसके अलावा जो अन्य धाराएं लगायी हैं। उनमें 147, 352, 504, 506, 427, 34 शामिल हैं।

शहर के कुछ संभ्रात नागरिकों की इस बात से मैं भी सहमत हूं कि शिकायतकर्ता ब्रिजेश अग्रवाल आदि को पूर्ण सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए जिससे वो अपनी बात निर्भीक कह सके।

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