Tuesday, April 14

सेंट्रल मार्केट प्रकरणः कल लखनऊ से आएगी टीम, जांचेगी सेटबैक की हकीकत; सर्वे के बाद तय होगा नियमों का दायरा

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मेरठ 14 अप्रैल (प्र)। वर्षों से बसे सेंट्रल मार्केट का भविष्य अब कागजों से निकलकर जमीन पर तय होने जा रहा है। 15 अप्रैल को लखनऊ से आने वाली टीम न सिर्फ नक्शों की सच्चाई परखेगी, बल्कि यह भी तय करेगी कि हकीकत और नियमों के बीच संतुलन कैसे बने। शास्त्री नगर सेंट्रल मार्केट सीलिंग प्रकरण में 15 अप्रैल का दिन बेहद महत्वपूर्ण है। क्योंकि उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद की नियोजन टीम मौके पर पहुंचकर पूरे क्षेत्र का विस्तृत सर्वे करेगी। इस दौरान स्कीम नंबर 7 के जोनल प्लान, मौजूदा निर्माण और सेटबैक के अनुपालन की जमीनी स्थिति का आकलन किया जाएगा। टीम विशेष रूप से उन छोटे भूखंडों पर ध्यान केंद्रित करेगी, जहां 25 से 38 वर्ग मीटर में बने भवनों में नीचे दुकान और ऊपर आवास संचालित हो रहे हैं। ऐसे मामलों में सेटबैक के नियम लागू करना सबसे बड़ी चुनौती बनकर सामने आया है।

पुराने ढांचों पर सेटबैक चुनौती
शास्त्री नगर सेक्टर-2 और जटिल है, क्योंकि अधिकांश निर्माण 35 से 40 वर्ष पुराने हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि इन इमारतों में सेटबैक के लिए तोड़फोड़ की गई तो संरचनात्मक खतरे भी पैदा हो सकते हैं। इसी को देखते हुए टीम सर्वे के दौरान न सिर्फ मापदंडों का मिलान करेगी, बल्कि यह भी परखेगी कि पुराने निर्माणों में नियमों को लागू करना कितना व्यावहारिक है। सर्वे रिपोर्ट के आधार पर ही आगे की रणनीति तय होगी । परिषद प्रशासन इसके बाद नोटिस जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर सकता है। फिलहाल, व्यापारियों और स्थानीय नागरिकों की नजरें बुधवार पर टीकी है, जहां यह स्पष्ट होगा कि नियमों में राहत मिलेगी या कार्रवाई का दायरा सख्त होगा।

रोजी-रोटी पर संकट, सुनील भराला ने सीएम से मांगी राहत
शास्त्री नगर में चल रही ध्वस्तीकरण कार्रवाई के बीच अब व्यापारियों के समर्थन में आवाजें तेज होने लगी हैं। इस मुद्दे को लेकर पं. सुनील भराला ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर तत्काल राहत देने की मांग की है निवर्तमान अध्यक्ष एवं श्रम कल्याण परिषद उत्तर प्रदेश राज्य मंत्री पं. सुनील भराला ने अपने पत्र में कहा कि आवास विकास परिषद की ओर से शास्त्री नगर में आवंटित आवासीय परिसरों को तत्कालीन अधिकारियों की सहमति से व्यावसायिक उपयोग में बदल दिया गया था। अब करीब 30 वर्ष बाद स्थानीय प्रशासन की ओर से इन परिसरों पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जा रही है, जिससे व्यापारियों के सामने आजीविका का संकट खड़ा गया है। उन्होंने इस कार्रवाई को अलोकप्रिय बताते हुए कहा कि इससे व्यापारियों में आक्रोश है और उन्हें उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है।
भराला ने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया कि इस मामले पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए पुराने निर्माण को वैध करने की प्रक्रिया पूरी कराई जाए। पत्र में यह भी कहा गया कि प्रभावित व्यापारी सरकार से न्याय की उम्मीद लगाए बैठे हैं और उनकी रोजी-रोटी बचाने के लिए त्वरित हस्तक्षेप जरूरी है। भराला ने संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश जारी कर राहत देने की मांग की है, ताकि व्यापारियों को इस संकट से उबारा जा सके।

पहले बसने दिया, अब तोड़ रहे, व्यापारियों की रोजी पर वार
जिन हाथों ने दशकों तक मेहनत कर घर और दुकान खड़ी की, आज वही हाथ बेबसी में टूटती दीवारों को निहार रहे हैं। करीब 40 साल से चल रहे कारोबार अब उजड़ने की कगार पर हैं और इसके पीछे आरोप है कि पहले आंखें मूंदने वाले अधिकारी अब अचानक सख्ती दिखा रहे हैं। आवास एवं विकास परिषद की योजनाओं में वर्षों से खड़े अवैध निर्माण अब विवाद का केंद्र बन गए हैं। ज्ञानेंद्र कुमार, सुरेश पाल, ज्ञानवीर, सुरेंद्र सिंह, हरिशंकर आदि लोगों का आरोप है कि जब ये निर्माण हो रहे थे, तब अधिकारियों ने न तो कोई आपत्ति जताई और न ही कार्रवाई की, बल्कि कई लोगों का दावा है कि पैसे लेकर इन निर्माण को अनदेखा किया गया। अब हालात यह हैं कि कहीं एक गेट भी लगाया जाता है तो अधिकारी और कर्मचारी छोटे प्लॉट में सेटबैक कैसे? तुरंत मौके पर पहुंच जाते हैं। वर्षों से खड़े सबसे बड़ा सवाल सेटबैंक को लेकर उठ मकानों और दुकानों को अवैध बताकर तोड़ने की कार्रवाई की जा रही है। व्यापारियों का कहना है कि इन इमारतों में कई जगह कमर्शियल गतिविधियां चल रही थीं, जिससे हजारों परिवारों की रोजी-रोटी जुड़ी हुई थी। अचानक हो रही कार्रवाई से न केवल कारोबार ठप हो गया है, बल्कि बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हुई है। कई परिवारों सामने स्कूल फीस तक भरने का संकट खड़ा हो गया है।

पैदल न्याय यात्रा आज
सेंट्रल मार्केट प्रकरण अब स्थानीय मुद्दे से निकलकर राजधानी तक पहुंचने की तैयारी में है। न्याय की मांग को बुलंद करने के लिए मेरठ से दिल्ली तक पैदल यात्रा का ऐलान किया गया है, जिसमें आम लोगों से भी जुड़ने अपील की गई है। शास्त्री नगर स्थित सेंट्रल मार्केट प्रकरण को लेकर 15 अप्रैल को दिल्ली और चलो पैदल न्याय यात्रा निकाली जा रही है। यह यात्रा सुबह 10 बजे सेंट्रल मार्केट से शुरू होकर दिल्ली स्थित गृह मंत्री अमित शाह के आवास तक जाएगी। यात्रा का उद्देश्य केंद्र सरकार से प्रकरण पर संसद में कानून बनाने की मांग को उठाना है, ताकि प्रभावित व्यापारियों और परिवारों को स्थायी राहत मिल सके। आयोजकों ने जनमानस से अपील की है कि अधिक से अधिक शामिल होकर पीड़ितों को समर्थन दें। अखिल भारतीय हिन्दू सुरक्षा संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सचिन सिरोही और क्षेत्रीय अध्यक्ष धर्मेंद्र मलिक ने कहा कि यह यात्रा व्यापारियों के हक और न्याय के लिए निकाली जा रही है। जब तक पीड़ितों को न्याय नहीं मिलता, संघर्ष जारी रहेगा। कहा- यह सिर्फ एक यात्रा नहीं, बल्कि उन परिवारों की आवाज है, जिनकी रोजी- रोटी पर संकट खड़ा हो गया है।

सेंट्रल मार्केट को राहत की उम्मीद, मुख्यमंत्री से मिलेंगे
सेंट्रल मार्केट के मुद्दे को लेकर अब व्यापारी नेतृत्व ने सीधे मुख्यमंत्री तक अपनी बात पहुंचाने की पहल की है। भाजपा व्यापार प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष विनीत अग्रवाल शारदा ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर सेंट्रल मार्केट से जुड़े सभी पहलुओं को विस्तार से रखा है और मुलाकात के लिए समय मांगा है। विनीत शारदा ने कहा कि सेंट्रल मार्केट से जुड़े व्यापारी लंबे समय से विभिन्न समस्याओं का सामना कर रहे हैं, जिनका समाधान आवश्यक है। उन्होंने पत्र में व्यापारियों की परेशानियों, प्रशासनिक कार्यवाही और बाजार की वर्तमान स्थिति का उल्लेख करते हुए सरकार से सकारात्मक हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने विश्वास जताया कि प्रदेश सरकार इस मामले को गंभीरता से लेगी और व्यापारियों को राहत देने के लिए उचित निर्णय करेगी शारदा ने कहा कि मुख्यमंत्री के साथ प्रस्तावित मुलाकात में व्यापारी वर्ग की समस्याओं को विस्तार से रखा जाएगा, ताकि स्थायी समाधान निकल सके। व्यापारियों को अब इस पहल से उम्मीद है वि सेंट्रल मार्केट के मुद्दे का जल्द समाधान होगा और कारोबार फिर से सामान्य स्थिति में लौटेगा।

छोटे प्लॉटों में सेटबैक कैसें?
सबसे बड़ा सवाल सेटबैक को लेकर उठ रहा है। लोगों का कहना है कि 30, 40 या 50 गज के छोटे प्लॉट में यदि पूरा सेटबैक दे दिया जाए, तो रहने के लिए जगह ही नहीं बचेगी। ऐसे में यह नियम व्यावहारिक नहीं लगता। स्थानीय लोगों का आरोप है कि परिषद की लापरवाही और भ्रष्टाचार का खामियाजा अब आम जनता भुगत रही है। जिन अधिकारियों की अनदेखी से अवैध निर्माण खड़े हुए, उन्ही के आदेश पर अब बुलडोजर चल रहा है। इस कार्रवाई ने सैकड़ों परिवारों के भविष्य को अंधकार में धकेल दिया है, जहां एक तरफ छत छिनने का डर है, वहीं दूसरी तरफ रोजगार खत्म होने की चिंता ।

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