मेरठ 14 अप्रैल (प्र)। दिल्ली- देहरादून ग्रीनफील्ड हाईवे के शुभारंभ होने से वाहनों के दबाव से जूझने वाले मेरठ-रुड़की हरिद्वार हर्दवे पुराने एनएच-58 पर वाहनों की संख्या कम हो जाएगी। बड़ी संख्या में इसके वाहन ग्रीनफील्ड हाईवे पर स्थानांतरित हो जाएंगे। यही नहीं, दिल्ली-बागपत- सहारनपुर यमुनोत्री हाईवे पर भी वाहनों का दबाव घटेगा। इसी तरह से शामली, मुजफ्फरनगर व सहारनपुर में भी आसपास के मार्गों पर दबाव घटेगा। अनुमान है कि नए ग्रीनफील्ड हाईवे पर प्रतिदिन लगभग 30 हजार वाहन दौड़ेंगे दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर भी आठ से 10 हजार वाहनों के कम होने का अनुमान है। दिल्ली के जो लोग वर्तमान में मेरठ-मुजफ्फरनगर-रुड़की हाईवे (पुराना एनएच-58 ) का उपयोग करके लगभग पांच घंटे में हरिद्वार पहुंचते हैं। वह अब दो-ढाई घंटे में ही हरिद्वार के अंदर पहुंच जाएंगे। मेरठ के वाहन भी इस नए हाईवे से जा सकेंगे। उधर, दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे और मेरठ- रुड़की हरिद्वार हाईवे ( नई संख्या एनएच 334 पुराना एनएच-58) पर निर्भरता कम हो जाएगी।
जब दिल्ली के लोग देहरादून, हरिद्वार व ऋषिकेश, बदरीनाथ जाने के लिए दिल्ली-देहरादून ग्रीनफील्ड हाईवे और बहादराबाद बाईपास का उपयोग करने लगेंगे तब दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे और मेरठ- मुजफ्फरनगर-रुड़की हाईवे पर वाहनों का दबाव कम हो जाएगा। एक अनुमान है कि नए ग्रीनफील्ड हाईवे के खुलने से दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे और मेरठ- रुड़की हाईवे पुराना एनएच-58 से लंबी दूरी वाले लगभग 20 हजार वाहन घट जाएंगे। इन दोनों मार्गों को मिलाकर प्रतिदिन करीब 10 हजार वाहन देहरादून, रुड़की व हरिद्वार के लिए जाते हैं। वहीं शनिवार व रविवार को इन क्षेत्रों के लिए जाने वालों की संख्या लगभग 10 हजार अतिरिक्त बढ़ जाती है। एक अनुमान के अनुसार इनमें से लगभग पांच हजार वाहन ऐसे रहेंगे जो पुराने मार्ग का ही इस्तेमाल करेंगे जबकि पांच हजार से अधिक नए वाहन मेरठ की तरफ से जाने लगेंगे। इसी तरह से बागपत – सहारनपुर यमुनोत्री हाईवे से भी 10 हजार वाहन नए ग्रीनफील्ड हाईवे पर स्थानांतरित होंगे।
मेरठ-रुड़की हाईवे पर औसतन 35 हजार रह जाएंगे वाहन
दिल्ली – देहरादून ग्रीनफील्ड हाईवे बन जाने से मेरठ-रुड़की-हरिद्वार हाईवे पर वाहनों की संख्या घट जाएगी। वर्तमान में जो संख्या लगभग 55 हजार है, वह घटकर औसतन 35 हजार तक होने का अनुमान है। संख्या घटने से वाहनों को गति पकड़ने में आसानी होगी।
मेरठ से देहरादून जाने का यह हो सकता है नया विकल्प
वाया करनाल हाईवे
इस विकल्प का लाभ लेने के लिए शामली- करनाल हाईवे पर जाएंगे। बेगमपुल से 53 किमी दूर खेड़ा मस्तान व फुगाना गांव के पास दिल्ली- देहरादून ग्रीनफील्ड हाईवे के लिए इंटरचेंज मिलेगा। इस इंटरचेंज से देहरादून 143 किमी है। इस तरह से दूरी पड़ेगी 196 किमी। हाईवे पर गति मिलेगी 100 किमी प्रतिघंटा की और जाम भी नहीं मिलेगा। इस तरह से लगभग दो से ढाई घंटे में मेरठ से देहरादून पहुंच जाएंगे।
वाया बागपत – टटीरी
बागपत हाईवे से टटीरी पहुंचेंगे। टटीरी में रेलवे फाटक पार करके सर्वोदय अस्पताल पहुंचेंगे। यहीं पर दिल्ली- देहरादून ग्रीनफील्ड हाईवे पर जाने के लिए अंडरपास मिलेगा। बेगमपुल से यह इंटरचेंज लगभग 46 किमी दूर है। वहां से देहरादून लगभग 170 किमी दूर है। इस तरह से दूरी हो जाएगी लगभग 215 किमी। यदि इधर से जाते हैं तब भी लगभग ढाई से पौने तीन घंटे में देहरादून पहुंच जाएंगे।
वाया देवबंद : फ्लाईओवर पार कर गागलहेड़ी पहुंचकर नए हाईवे पर चढ़ेंगे
देवबंद फ्लाई ओवर पार कर नांगल होते हुए गागलहेड़ी पहुंचकर नए हाईवे पर चढ़ना होगा। दरअसल, एनएच-307 कोही बिहारीगढ़ से गणेशपुर, राजाजी नेशनल पार्क होते हुए देहरादून के आशारोड़ी तक विस्तार देकर दिल्ली-गागलहेड़ी पहुंचकर नए हाईवे पर देहरादून ग्रीनफील्ड हाईवे में मिला दिया गया है। पहले यह चार लेन का हाईवे जिसे छह लेन कर दिया गया है। राजाजी नेशनल पार्क के बीच से गुजरने व पर्वतों के घुमावदार रास्ते से बचाने के लिए पिलर पर एलिवेटेड रोड बना दीगई है। इससे गणेशपुर से सीधे देहरादून तक पहुंच सकेंगे। पहले डाट काली मंदिर के पास एक सुरंग थी अब तीन सुरंग हो गई हैं। इससे पहुंचने में तीन घंटे से भी कम समय लगेगा। दूरी घटकर रह जाएगी लगभग 160 किमी।
तीन घंटे में पहुंच जाएंगे अंबाला
दिल्ली-देहरादून ग्रीनफील्ड हाईवे से अंबाला – शामली एक्सप्रेसवे को शामली जिले में गौगवान जलालपुर में इंटरचेंज के माध्यम से जोड़ा जा रहा है। इससे मेरठ व आसपास के लोग अंबाला जाने के लिए इस नए हाईवे का उपयोग करने लगेंगे। मेरठ के परतापुर से अंबाला की दूरी लगभग 200 किमी है और पहुंचने में लगभग चार घंटे लगते हैं। शामली के जलालपुर से करनाल होते हुए अंबाला जाने में अभी ढाई घंटे लगते हैं और दूरी है लगभग 130 किमी। अब नया एक्सप्रेसवे बन जाने से दूरी घटकर 120 किमी हो जाएगी। इसका लाभ मेरठ के यात्रियों को भी मिलेगा। मेरठ से जलालपुर पहुंचने में डेढ़ घंटे लगते हैं, दूरी है लगभग 80 किमी जब टटीरी या बड़ौत के पास दिल्ली-देहरादून ग्रीनफील्ड हाईवे का उपयोग करेंगे तो दूरी बढ़कर लगभग 230 किमी हो जाएगी लेकिन बिना बाधा के लगातार एक्सप्रेसवे पर वाहन दौड़ेंगे, इसलिए चार घंटे की दूरी लगभग तीन घंटे में ही सिमट जाएगी।
नए रास्ते सहारनपुर जाने को बढ़ेगी दूरी, मगर घटेंगे 20 मिनट
नए ग्रीनफील्ड हाईवे का लाभ सहारनपुर जाने के लिए भी मिलेगा। हालांकि नए हाईवे का प्रयोग करने पर लगभग 15 किमी दूरी बढ़ जाएगी। टोल भी महंगा हो सकता है लेकिन समय और जाम की बचत देखें तो नए हाईवे का उपयोग सही रहेगा। लगभग 20 मिनट कम समय में पहुंच जाएंगे। इसके लिए मेरठ करनाल हाईवे पर आपको मेरठ से 43 किमी दूर खेड़ा मस्तान कट से चढ़ना होगा। उसके बाद 100 किमी प्रति घंटे की गति मिल जाएगी, इससे सहारनपुर पहुंचना आसान हो जाएगा।
ग्रीनफील्ड हाईवे पर यहां से चढ़-उतर सकेंगे मेरठ के वाहन
- दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर अक्षरधाम मंदिर के सामने गीता कालोनी से ।
- ईस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेसवे पर खेकड़ा-मवीकलां कट के पास।
- बागपत-सोनीपत हाईवे पर टटीरी में रेलवे फाटक पार करने के बाद सर्वोदय अस्पताल के पास।
- बड़ौत रोड पर लहौड़ा गांव पार करके बिजरौल के पास ।
- मेरठ-शामली- करनाल हाईवे पर गाना के आगे खेड़ा मस्मान क्षेत्र में गोल्डन फ्यूचर स्कूल के पास।
- शामली में बुढ़ाना मार्ग पर भाजू और शामली-मुजफ्फरनगर मार्ग पर लालूखेड़ी के पास।
- पुराना एनएच-58 से जाकर गागलहेड़ी देवबंद के पास ।
