Tuesday, February 10

सेंट्रल मार्केट: आवास आयुक्त की दो टूक, खुद हटाएं अवैध निर्माण, नहीं तो चलेगा बुलडोजर

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मेरठ 06 फरवरी (प्र)। सेंट्रल मार्केट प्रकरण में अब कोई भ्रम की गुंजाइश नहीं छोड़ी गई है। उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद (यूपीएवीपी) के आवास आयुक्त डॉ. बलकार सिंह ने व्यापारियों को दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि नियमों के खिलाफ बने निर्माण या तो व्यापारी स्वयं हटा लें, अन्यथा प्रशासन बुलडोजर से कार्रवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का हवाला देते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि परिषद किसी भी तरह की राहत देने की स्थिति में नहीं है।

गुरुवार को लखनऊ में आवास आयुक्त से सेंट्रल मार्केट व्यापारियों के प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व सेंट्रल मार्केट व्यापार संघ के अध्यक्ष जितेंद्र अग्रवाल ने किया। लंबी चली वार्ता के दौरान व्यापारियों ने अपनी पीड़ा रखी और कहा कि यदि दुकानें टूटती हैं तो उनका रोजगार उजड़ जाएगा और परिवारों के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो जाएगा। इस पर आवास आयुक्त ने नियमों की स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि सभी व्यापारियों को अनिवार्य रूप से सेटबैक देना होगा। प्लॉट के आकार और नियमों के अनुसार किसी दुकान को डेढ़ मीटर, किसी को तीन मीटर और कुछ दुकानों को साढ़े चार मीटर तक फ्रंट से तोड़कर पीछे करना होगा। यह कार्रवाई नियमानुसार होगी और इसमें कोई छूट नहीं दी जाएगी।

आवास आयुक्त ने बताया कि चार-पांच दिनों के भीतर लखनऊ से वास्तु नियोजन की टीम मेरठ सेंट्रल मार्केट पहुंचेगी। टीम पूरे क्षेत्र का निरीक्षण करेगी और जहां-जहां अवैध निर्माण पाया जाएगा, वहां क्रॉस के निशान लगाए जाएंगे। जिन कमर्शियल दुकानों पर क्रॉस लगेगा, उन्हें तोड़ा जाना तय माना जाएगा। आवास आयुक्त ने यह भी कहा कि जिन व्यापारियों ने अब तक अपनी कमर्शियल दुकानों को नियमित (रेगुलराइज ) कराने के लिए आवेदन नहीं किया है, वे तुरंत फॉर्म भरकर आवास एवं विकास परिषद में जमा करें, ताकि नियमानुसार कार्रवाई की प्रक्रिया में उन्हें अवसर मिल सके।

लखनऊ से खाली हाथ लौटा सेंट्रल मार्केट का प्रतिनिधिमंडल
सेंट्रल मार्केट प्रकरण को लेकर लखनऊ गए व्यापारियों के प्रतिनिधिमंडल को निराशा हाथ लगी है। चर्चाओं के मुताबिक, प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की उम्मीद में गया था, लेकिन उन्हें किसी भी तरह की राहत या आश्वासन नहीं मिल सका। बताया जा रहा है कि सेंट्रल मार्केट में अवैध निर्माण और ध्वस्तीकरण के मुद्दे पर सरकार अपने रुख पर कायम है। लखनऊ से लौटे व्यापारी अब असमंजस में हैं। आगे की रणनीति पर विचार कर रहे हैं। बाजार में इस खबर के बाद चिंता और अनिश्चितता का माहौल और गहरा गया है।

राहत का कोई रास्ता नहीं, ध्वस्तीकरण ही अंतिम विकल्प
लखनऊ में उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद के आवास आयुक्त डॉ. बलकार सिंह से हुई वार्ता के बाद सेंट्रल मार्केट के व्यापारियों की आखिरी उम्मीद भी टूट गई है। साफ संकेत मिल चुके हैं कि अब बाजार में बुलडोजर की कार्रवाई टलने वाली नहीं है। प्रशासनिक सख्ती के बीच सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि अवैध निर्माणों पर नपाई कर क्रॉस के निशान लगाने की प्रक्रिया आखिर किस नियम के जरिए की जाएगी। सूत्रों का कहना है कि आवास परिषद के नियमों में अवैध निर्माणों पर क्रॉस मार्किंग का कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है। यदि वार्ता के दौरान इस तरह की बात कही गई है, तो उसका आधार क्या है, यह स्पष्ट नहीं किया गया। दरअसल, यह मामला अवैध निर्माण की कंपाउंडिंग का नहीं, बल्कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के जरिए ध्वस्तीकरण का है। सुप्रीम कोर्ट के नियमों के अनुसार जिस भूखंड पर कमर्शियल गतिविधियां चल रही हैं, वहां बने पूरे कमर्शियल स्ट्रक्चर को ध्वस्त किया जाना है, न कि आंशिक तौर पर चिन्हित हिस्सों को इसी क्रम में भूखंड संख्या 661/6 का मामला भी चर्चा में है, जहां 22 दुकानों का एक पूरा कमर्शियल कॉम्प्लेक्स बना हुआ था। सवाल यह है कि उस पूरे स्ट्रक्कर में कौन-सा परिवार निवास कर रहा था, जिसे अब आवासीय बताकर राहत देने की कोशिश की जा रही है। फिलहाल, नियमों की व्याख्या और कार्रवाई की प्रक्रिया को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है, जबकि व्यापारियों के सामने भविष्य की अनिश्चितता और बढ़ती जा रही है।

कार्रवाई की आहट से व्यापारी सहमे
आवास आयुक्त ने दोहराया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश सर्वोपरि हैं और परिषद उनसे आगे नही जा सकती। या तो व्यापारी स्वयं नियमों के जरिए निर्माण हटाए, या फिर प्रशासनिक कार्रवाई के लिए तैयार रहें। इधर, मेरठ आवास एवं विकास परिषद प्रशासन ने भी संभावित कार्रवाई को लेकर मंथन शुरू कर दिया है। सेंट्रल मार्केट के व्यापारी इस सख्ती से चिंतित हैं और आने वाले दिनों को लेकर अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है।

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