मेरठ 17 मार्च (प्र)। शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट में संभावित ध्वस्तीकरण की कार्रवाई से व्यापारी डरे हुए हैं। इंटरनेट मीडिया में प्रसारित पत्र उनकी दहशत और बढ़ा रहा है। इस पत्र में 23 मार्च को ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के लिए डीएम और एसएसपी से मजिस्ट्रेट और पुलिस बल की मांग की गई है। व्यापारी इसकी जानकारी करने आवास विकास परिषद कार्यालय पहुंचे। जांच में यह पत्र फर्जी निकला।
27 फ़रवरी को आवास एवं विकास परिषद के अधिशासी अभियंता अभिषेक राज ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुपालन में 10 मार्च को ध्वस्तीकरण कार्रवाई करने के लिए डीएम और एसएसपी को पत्र लिखा था। इसी बीच 80 व्यापारियों को भू उपयोग परिवर्तन की अनुमति मिलने के बाद व्यापारियों ने अपने निर्माण स्वयं हटाने शुरू कर दिए। 80 से अधिक व्यापारियों ने तो अपनी दुकानें बंद कर दी हैं। 10 मार्च को पुलिस बल नहीं मिल सका था। इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित पत्र 13 मार्च को जारी हुआ है। इसमें ईद के बाद 23 मार्च फिर से ध्वस्तीकरण की कार्रवाई किए जाने का जिक्र है।
सोमवार को कई व्यापारी आवास विकास के अधीक्षण अभियंता राहुल यादव और उप आवास आयुक्त अनिल कुमार सिंह से मिले और इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित पत्र की जानकारी दी। खास बात यह है कि इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित पत्र और 27 फरवरी को जारी पत्र का पत्रांक समान है। सिर्फ तिथि बदली गई है, शेष सारा ब्यौरा वही है, जिसमें 31 निर्माणों को ध्वस्त करने के लिए पुलिस बल मांगा गया था। महिला पुलिस तैनाती की भी मांग की है। अधिशासी अभियंता ने बताया कि यह पत्र फर्जी है। उप आवास आयुक्त अनिल कुमार सिंह ने बताया यह संवेदनशील मामला है, लिहाजा विधिक कार्रवाई की जा रही है।
पांच व्यापारियों ने जमा किया भू उपयोग परिवर्तन शुल्क
आवास विकास परिषद के वास्तुविद नियोजक ने शास्त्रीनगर योजना -7 के 80 व्यापारियों को भू उपयोग परिवर्तन की सशर्त अनुमति देते हुए एक माह में शुल्क जमा करने को कहा है। इस क्रम में पांच व्यापारियों ने शुल्क जमा कराया है। भूखंड संख्या 657/6 के पुनीत कुमार ने 4.35 लाख शुल्क जमा कराया है। साहिल और गणपति प्लाजा के व्यापारियों ने अपने-अपने हिस्से का शुल्क जमा किया है। 660/6 के महिपाल सिंह ने 3.19 लाख रुपये जमा कराए हैं। योजना-7 में 860 भूखंड हैं, जो पूर्व में अवैध निर्माण के रूप में चिह्नित हुए थे। इनमें 210 से 225 ऐसे भूखंड हैं जिन्होंने शटर हटाकर दीवार बना ली है या दरवाजे लगा लिए हैं। इनमें व्यापारिक गतिविधियां बंद हैं। 80 व्यापारियों को भू उपयोग परिवर्तन की अनुमति मिलने के बाद लगभग 150 और व्यापारियों ने भू उपयोग परिवर्तन के लिए आवेदन किया है। 170 निर्माण ऐसे हैं जिनमें मानचित्र के विपरीत छोटा-मोटा निर्माण हैं। 225 निर्माणों को लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है।
