Saturday, April 20

गीता प्रेस के ट्रस्टी बैजनाथ अग्रवाल का निधन, सीएम योगी ने व्यक्त किया शोक

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गोरखपुर 28 अक्टूबर। गीता प्रेस के ट्रस्टी बैद्यनाथ अग्रवाल का निधन हो गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गीता प्रेस, गोरखपुर के ट्रस्टी बैजनाथ अग्रवाल के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने उनके पुत्र देवी दयाल अग्रवाल से बात कर सांत्वना दी।

गीताप्रेस के ट्रस्टी बैजनाथ अग्रवाल का निधन हो गया है। वह 90 वर्ष के थे। शुक्रवार की रात लगभग 2:30 बजे उन्होंने हरिओम नगर स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली। उनका अंतिम संस्कार बनारस में गंगा तट पर होगा।

शोक संदेश में मुख्यमंत्री ने कहा है कि ‘विगत 40 वर्षों से गीता प्रेस के ट्रस्टी के रूप में बैजनाथ का जीवन सामाजिक जागरूकता और मानव कल्याण के लिए समर्पित रहा। वह ईश्वर के अनन्य भक्त थे। बैजनाथ के निधन से समाज को अपूरणीय क्षति हुई है।’ सीएम ने परिजनों से बातकर उन्हें ढांढस बंधाया है। बता दें कि बैद्य नाथ अग्रवाल समाजसेवी भी रहे हैं। गीता प्रेस के माध्यम से उनका धार्मिक एवं सामाजिक जुड़ाव भी रहा है’।

गौरतलब है कि हाल ही में गीता प्रेस गोरखपुर ने अपना शताब्दी वर्ष मनाया था. भारत सरकार ने गीता प्रेस गोरखपुर का चयन साल 2021 के गांधी शांति पुरस्‍कार के लिए किया था. हालांकि, गीता प्रेस ट्रस्ट ने सम्मान तो स्वीकार कर लिया, लेकिन पुरस्‍कार के रूप में मिलने वाली एक करोड़ रुपये की राशि लेने से इंकार कर दिया था. उस वक्त गीता प्रेस के ट्रस्टी कृष्ण कुमार खेमका ने कहा था कि सौ वर्ष की परंपरा का पालन हो रहा है. हमारे महापुरुषों के बनाए मूल्यों की बात है. इसलिए ये कहना थोड़ा अतिशियोक्ति होगी कि अगर एक करोड़ में दो शून्य बढ़ा भी दिए जाएं तो भी गीता प्रेस ये राशि स्वीकार नहीं करेगी. महापुरुषों ने ये नियम बनाया था कि हमें किसी तरह का सम्मान और आर्थिक सहयोग नहीं लेना चाहिए.

खेमका ने बताया था कि गीता प्रेस महापुरुषों के सौ वर्ष के तप से यहां तक पहुंची है. सौ वर्ष में लगभग 93 करोड़ पुस्तकों का प्रकाशन किया गया है और पूरे विश्व में इसका बांटा गया है. वस्तुत: हमारा भरोसा भगवान पर है. महापुरुषों के बनाए मूल्यों का पालन हो, यही हमारा प्रयास है. गीता प्रेस परिवार प्रधानमंत्री और सीएम योगी आदित्यनाथ का आभार व्यक्त करता है जो उन्होंने इस पुरस्कार के लिए चुना है.

गीता प्रेस, गोरखपुर में लगभग 15 भाषाओं में श्रीमद् भागवत गीता का प्रकाशन किया जाता है. इनमें हिंदी, अंग्रेजी, तमिल, तेलुगू, संस्कृत और कई अन्य भाषाएं शामिल हैं.

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