Thursday, June 13

अविनाश अलख के प्रयासों से निरंतर प्रगृति की ओर अग्रसर ज्ञानोदय ने 22 साल के सफर को मंच से किया बयां

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मेरठ, 18 दिसंबर (प्र)। ब्लॉसम्स स्कूल की ओर से गत दिवस चौधरी चरण सिंह विवि के प्रेक्षागृह में ज्ञानोदय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति से समां बांध दिया।


कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पद्म भूषण, पद्मश्री डॉ. अनिल जोशी रहे। इन्होंने सभी को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक किया। मुख्य आर्कषण वंशिका, राहुल, मनोज, करूणा शर्मा की दिलों को छू जाने वाली प्रस्तुति रही। इस दौरान सभी को ज्ञानोदय के चार वर्टिकल्स वाटिका, वोकेशनल ट्रेनिंग, स्कॉलरशिप व करियर्स एंड लाइवलीहुड तथा ज्ञानोदय के 22 साल के कार्य और उसके प्रभाव से अवगत कराया। नारी सशक्तिकरण को बढ़ावा देते हुए और देशभक्ति से ओतप्रोत गीतों की प्रस्तुति दी। इस मौके पर सांसद राजेंद्र अग्रवाल, मेयर हरिकांत अहलूवालिया, अमित अग्रवाल, कमलदत्त शर्मा, अभिनव चुघ रहे।
स्कूल-कॉलेज में पर्यावरण के संरक्षण को बनाना होगा मुख्य विषय मुख्य अतिथि पद्म भूषण, पद्मश्री डॉ. अनिल जोशी ने कहा कि पर्यावरण को बचाने के लिए स्कूल-कॉलेज में मुख्य विषय बनाना होगा। साथ ही जागरुकता लानी होगी।

पीयूष गोयल को किया प्रोत्साहित: पद्मश्री पर्यावरणविद डॉ. अनिल जोशी ने विश्व दिव्यांग दिवस के मौके पर राज्य स्तरीय पुरस्कार से सम्मानित पीयूष गोयल को प्रोत्साहित किया।

हिन्दुस्तान से संगीत कभी खत्म नहीं होगा
बॉलीवुड फिल्म रॉकस्टार में कुन फाया कुन कव्वाली गाकर लोगों के दिलों तक पहुंचने वाले निजामी बंधु विवि में ब्लॉसम स्कूल के ज्ञानोदय उड़ान कार्यक्रम में पहुंचे। निजामी बंधु 750 साल पुराने सिकंदरा घराने के कव्वाल हैं। हाल-ही में आई सलमान खान की फिल्म बजरंगी भाईजान में भी इन्होंने कव्वाली गाई है।
निजामी बंधु अपनी कव्वाली में क्लासिकल गायन का भी इस्तेमाल करते हैं। कव्वाली के बदलते स्वरूप और युवाओं की पसंद पर उन्होंने कहा कि संगीत सुनने में कमी आ सकती है पर उसे खत्म कोई नहीं कर सकता है। भारत में हर तरह का संगीत अपने अहम स्थान पर है। कहा कि यह विधा हमारी परंपरा है पेशा नहीं है। परिवार में कोई ना कोई ऐसा जरूर होता है जो परंपराओं को आगे बढ़ाते हुए चलता है। वहीं मशहूर कव्वाली गायक निजामी बंधु ने कोई कहे अल्लाह, हर कर्म अपना करेंगे और ख्वाजा मेरे ख्वाजा की प्रस्तुति देकर समा बांध दिया। संस्थापक अविनाश सिंह ने बच्चों का उत्साहवर्धन किया। प्रधान अध्यापिका बिंदु मुद्गल ने विचार रखे।

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