Tuesday, May 28

राम मंदिर में मुस्लिम हाथों की दस्तकारी

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मेरठ 19 जनवरी (प्र)। एक तरफ अयोध्या में राम मन्दिर की प्राण प्रतिष्ठा की तैयारियां जोर शोर से चल रही हैं तो दूसरी ओर मन्दिर और इसमें लगने वाले पत्थरों पर नक्काशी को तराशने के लिए कई मुस्लिम कारीगर दिन रात एक किए हुए हैं।

अब इसे रोजी रोटी से जोड़ें चाहे साम्प्रदायिक सद्भाव से, लेकिन एक बात तो तय है कि इन हाथों की दस्तकारी के सभी मुरीद हो गए हैं। रामनगरी में मन्दिर के लिए कार्यशाला में तैयार होने वाले राम मन्दिर के स्तम्भों पर जो कलाकृतियां बनाई जा रही हैं और जो नक्काशी का काम किया जा रहा है वो अपने आप में अद्भुत है। इसमें जो खास बात है वो यह कि मन्दिर के पत्थरों को तराश रहे अधिकतर हाथ मुस्लिम हैं और यह मुस्लिम बेझिझक इस काम को अंजाम दे रहे हैं।

राम मन्दिर के लिए जो पत्थरों के बड़े सप्लायर हैं उनमें जिया उल उस्मान मुख्य हैं जबकि मूर्ति बनाने का काम मुख्य रूप से मो. जमालुद्दीन कर रहे हैं। इसके अलावा पत्थरों को तराशने का काम हामिद खान की देखरेख में किया जा रहा है जबकि सिंहासन बनाने का काम रमजान मियां कर रहे हैं। हिन्दू मुस्लिम उन्माद की राजनीति में यकीन रखने वालों के मुंह पर बेशक यह करारा तमाचा है लेकिन देश की साझा संस्कृति के लिए यह जरुर किसी ‘संजीवनी’ से कम नहीं।

एक खास बात और कि राजस्थान के मकराना से जो संगमरमर का पत्थर राम मन्दिर के लिए आया है वो भी कई मुस्लिम सप्लायरों से मंगाया गया है और इसमें भी एक महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि यह सप्लायर पत्थर के साथ साथ राम मन्दिर के डिजाइन में भी अपनी ओर से मदद कर रहे हैं। बताया जाता है कि गर्भ गृह में जो 13 हजार 300 घन फुट संगमरमर का इस्तेमाल हुआ है वो पत्थर भी कई मुस्लिम सप्लायरों से लिया गया है।

उधर, मकराना के मुस्लिम व्यापारी भी खुश हैं। उनकी खुशी इसी से झलकती है कि राम मन्दिर के लिए जब से मकराना से संगमरमर अयोध्या पहुंचना शुरु हुआ है तब से देश के अन्य हिस्सों से मकराना में संगमरमर की डिमांड बढ़ गई है। इससे यहां मुस्लिम कारोबारियों के कारोबार में इजाफा हुआ है। यहां यह भी काबिल ए गौर है कि अयोध्या में लगी मिट्टी के दीपकों की फक्ट्री का कॉन्ट्रेक्ट भी एक मुस्लिम के पास है जहां दिन रात काम हो रहा है और अब तक कई लाख दीपक यहां तैयार हो चुके हैं।

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