शिमला, 28 अगस्त। हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश-भूस्खलन से हुई तबाही से दुश्वारियां बढ़ गई हैं। राज्य में सैकड़ों सड़कें, बिजली ट्रांसफार्मर व जल आपूर्ति योजनाएं ठप हैं। कई इलाकों में मोबाइल व इंटरनेट सेवाएं भी बाधित हैं। पंडोह डैम के साथ लगते कैंची मोड़ के पास चंडीगढ़-मनाली नेशनल हाईवे का बड़ा हिस्सा गायब हो गया है। अब इसकी जल्द बहाली के आसार कम ही नजर आ रहे हैं। यहां पैदल चलने के लिए भी रास्ता नहीं बचा है। बीती रात को क्षेत्र में हुई भारी बारिश के कारण यहां हाईवे का एक बड़ा भाग पूरी तरह से जमींदोज हो गया। राज्य में आज सुबह 10ः00 बजे तक 535 सड़कें बंद रहीं। 1,184 बिजली ट्रांसफार्मर व 503 जल आपूर्ति योजनाएं भी ठप हैं।
मंडी से कुल्लू वाया कटौला मार्ग से भेजे जा रहे वाहन
बड़े मालवाहक वाहनों को नौ मील के पास रोक कर रखा गया था। बनाला में हाईवे को आज बहाल करना था लेकिन उससे पहले कैंची मोड़ के पास यह हाईवे बूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया है। बनाला में गिरे पत्थरों को तो आज हटा दिया जाएगा लेकिन कैंची मोड़ के पास क्षतिग्रस्त भाग की मरम्मत करने या फिर वैकल्पिक मार्ग तैयार करने में अभी लंबा समय लग सकता है। बता दें कि पिछले कल ही यह हाईवे दवाड़ा के पास तीन दिनों बाद बहाल हुआ था। हालांकि, मंडी से कुल्लू वाया कटौला मार्ग यातायात के लिए बहाल है। एक एक घंटे के अंतराल में छोटे वाहन भेजे जा रहे हैं। कुल्लू-मनाली के लिए अब यही मार्ग शेष है।
वहीं जम्मू-कश्मीर में मौसम का कहर जारी रहा है। श्री माता वैष्णो देवी के यात्रा मार्ग पर अर्द्धकुंवारी में स्थित इंद्रप्रस्थ भोजनालय के पास हुए भूस्खलन से मरने वाले श्रद्धालुओं की संख्या गत दिवस 34 पहुंच गई। इनमें 11 उत्तर प्रदेश के हैं। गत मंगलवार देर रात तक नौ श्रद्धालुओं की मौत और 21 के घायल होने की पुष्टि हुई थी। बाद में बचाव दल को मलबे के नीचे से कई और शव मिले। तलाशी अभियान अभी भी जारी है। आशंका है कि मलबे में अभी भी कई लोग फंसे हो सकते हैं। हादसा मंगलवार दोपहर करीब तीन बजे पहाड़ का हिस्सा ढहने से हुआ। इससे चट्टानें और मलबा नीचे गिरा और लोग दब गए। जम्मू में चौबीस घंटे में 380 मिमी बारिश दर्ज हुई जोकि पिछले 115 वर्षों में सबसे ज्यादा बारिश है। जम्मू संभाग में नदियों का जलस्तर घटा तो कश्मीर संभाग में बढ़ गया। भारी बारिश के कारण बिजली-पानी, आवागमन और इंटरनेट सब पर आफत रही।
वहीं उत्तराखंड के उत्तरकाशी क्षेत्र में लगातार बारिश के कारण स्यानाचट्टी में यमुना नदी का जलस्तर बढ़ने से देर शाम को लोग दशहत में आ गए। वह अपने होटल व घरों को खाली कर सामान को सुरक्षित स्थान पर ले गए। वहीं झील के मुहाने पर तीसरे दिन भी मशीनें नहीं पहुंच पाई। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी स्याना चट्टी आपदा प्रभावित क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण करने पहुंचे।
करीब 400 मीटर हिस्से में जलस्तर बढ़ने से सरकारी, गैर सरकारी परिसंपत्ति प्रभावित हो रही है। वहीं स्यानचट्टी में दोबारा बन रही झील के मुहाने को खोलने के लिए तीसरने दिन भी सिंचाई विभाग की मशीनें नहीं पहुंच पाई। हालांकि सिंचाई विभाग कुपड़ा खड्ड के मुहाने पर तीन पोकलेन मशीनों को दो दिन से उतारने की मशक्कत कर रहा है।
वहीं दूसरी और यमुनोत्री हाईवे जंगलचट्टी और नारदचट्टी के पास पांचवें दिन भी बंद रहा। इससे यमुनोत्री धाम सहित पांच गांव के ग्रामीणों को भारी दिक्कतों का समाना करना पड़ रहा है। वहीं एनएसच के ईई मनोज रावत का कहना है कि लगातार कटाव और पहाड़ी से मलबा गिरने से हाईवे खोलने में दिक्कत हो रही है।
देश-दुनिया से अलग-थलग पड़ी पर्यटन नगरी मनाली और जनजातीय क्षेत्र लाहौल के लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कुल्लू-मनाली के बीच हाईवे तीन के साथ वामतट मार्ग भी बंद है। ऐसे में मनाली और लाहौल में सैकड़ों सैलानी भी फंसे हुए हैं। प्रशासन ने कुल्लू-मनाली मार्ग को बहाल करने का काम युद्ध स्तर पर शुरू कर दिया है। इसके लिए प्रशासन में अतिरिक्त मशीनरी भी तैनात की है। हालांकि, कुल्लू से अलेऊ तक वामतट तक छोटे वाहनों के लिए पहले ही खोल दिया है। अब एसडीएम मनाली केडी शर्मा की निगरानी में अलेऊ के पास हुए भूस्खलन पर सड़क की बहाली का काम चला है।