मेरठ 07 अप्रैल (प्र)। पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई की पीआईओ (पाकिस्तान इंटेलीजेंस ऑपरेटिव्स) विंग सोशल मीडिया के जरिये युवा और किशोरों को जासूसी के जाल में फंसा रही है। इन्हीं में से कुछ युवाओं को आतंकी गतिविधियों की भी ट्रेनिंग देने की कोशिश की जा रही है। तीन सप्ताह में मेरठ के सात युवक और दो किशोरों के पकड़े जाने के बाद एटीएस और पुलिस ने इनसे जुड़े 100 से अधिक युवाओं के सोशल मीडिया की निगरानी व जांच शुरू कर दी है।
एटीएस और पुलिस की जांच में सामने आया है कि पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी और सरदार उर्फ सरफराज ने सोशल मीडिया के जरिये जासूसी का बड़ा नेटवर्क खड़ा किया है। यह दोनों ही आईएसआई की पीआईओ विंग से जुड़कर काम कर रहे हैं। सबसे पहले 13 मार्च को लिसाड़ी गेट निवासी अनस अंबाला में विस्फोटक के साथ पकड़ा गया था। अनस चंडीगढ़ में दो साल से सब्जी बेचने का काम करता था। अनस को अंबाला एसटीएफ ने गिरफ्तार किया था।
अनस व उसके साथियों की गिरफ्तारी के बाद गिरफ्तार किया था। सुहैल मलिक के भी मेरठ में 15 मार्च को गाजियाबाद की कौशांबी पुलिस ने किराये पर रहने की बात सामने आईं थी। महक बिजनौर जिले के नरगढ़ी नवादा के सुहैल मलिक पाकिस्तान में बैठे आकाओं के सीधे संपर्क में थी। उर्फ रोमियो, संभल के ज्ञानपुर सिसौना गांव की आरोपियों ने जासूसी के लिए दिल्ली कैंट रेलवे साने इरम उर्फ महक समेत छह आरोपियों को स्टेशन पर सीसीटीवी लगा दिया था।
पासपोर्ट बनवाकर दुबई जाने की तैयारी में था अरबाब
तीन अप्रैल को लखनऊ एटीएस ने परिक्षितगढ़ थाना क्षेत्र के अगवानपुर निवासी अरबाब ने पासपोर्ट बनवाया था। बताया गया है कि वह दुबई जाने की तैयारी में था साकिब ने भी पासपोर्ट के लिए आवेदन किया था लेकिन उस पर दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज होने के कारण पासपोर्ट नहीं बना था। अरबाब का पासपोर्ट निरस्त कराने के लिए पुलिस ने रिपोर्ट भेजी है। एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह और एसपी देहात अभिजीत कुमार का कहना है कि इनसे जुड़े लोगों से पूछताछ की गई है। इनके सोशल मीडिया अकाउंट की भी जांच की जा रही है। इनमें कुछ इनके परिचित हैं और कुछ केवल सोशल मीडिया के जरिये ही एक दूसरे से जुड़े हैं।
इंस्टाग्राम, यूट्यूब से ढूंढकर मोबाइल एप से कराते हैं जासूसी
जांच में जुटे अधिकारी से जानकारी मिली है कि पाकिस्तानी हैंडलर सोशल मीडिया के जरिये ऐसे युवाओं पर नजर रखते हैं जो सरकार और देश विरोधी या फिर पाकिस्तान से जुड़ी पोस्ट अधिक सर्च करते हैं या फिर कमेंट करते हैं। फिर इन्हें झांसा देकर टेलीग्राम चैनल से जोड़ा जाता है। इसके बाद इन्हें लालच देकर जासूसी के लिए तैयार किया जाता है और फिर इनसे सिगनल एप के जरिये लोकेशन, फोटो, वीडियो आदि मंगाकर जासूसी कराई जाती है। इनमें से ही कुछ युवाओं को आतंकी गतिविधियों में शामिल करने के लिए तैयार कर लिया जाता है।
