Monday, April 15

खरमास आरंभ, 13 अप्रैल तक शुभ कार्यों पर विराम

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मेरठ 16 मार्च (प्र)। सनातन कैलेंडर के अनुसार गुरूवार से खरमास यानि मलमास लग जाएगा जो 13 अप्रेल तक रहेगा। ऐसे में इस एक माह तक शादी, मुंडन, गृह प्रवेश, नींव मुहूर्त सहित कोई भी शुभ कार्य नहीं होंगे। इसके बाद फिर 14 अप्रेल से शुभ कार्यो के लिए मुहूर्त शुरू होंगे। धनु और मीन राशि के स्वामी देवगुरू बृहस्पति है। वहीं, इस दौरान सूर्य के संपर्क में आने से देवगुरू बृहस्थति का शुभ प्रभाव कम या क्षीण हो जाता है। अत:सूर्य देव के धनु और मीन राशि में गोचर करने के दौरान खरमास लगता है।

मलमास के दौरान किए जाने वाले शुभ संस्कार को उचित नहीं माना जाता। इसलिए 14 मार्च से लेकर 13 अप्रैल तक विवाह संस्कार नहीं किए जा सकेंगे। 14 अप्रैल के पश्चात जब सूर्य मीन राशि से बाहर आएगा, तब पुन: शुभ संस्कार शुरू होंगे। 14 मार्च से शुरू होने वाले मीन मलमास के मात्र दो दिन पश्चात 17 मार्च से होलाष्टक भी लग जाएगा। होलाष्टक के आठ दिनों के काल को भी अशुभ माना जाता है। इस तरह, मीन मलमास के दौरान ही होलाष्टक पड़ रहा है। मीन मलमास और होलाष्टक दोनों अशुभ होने से किसी भी तरह का शुभ संस्कार नहीं किया जाएगा।

आचार्य मनीष स्वामी ने बताया कि खरमास में सूर्य पूजा का विशेष महत्व है। खरमास में विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन आदि मांगलिक कर्मो के लिए शुभ मुहूर्त नहीं रहते हैं। इन दिनों में मंंत्र जप, दान, नदी स्नान और तीर्थ दर्शन करने की परंपरा है। इस परंपरा की वजह से खरमास के दिनों में सभी पवित्र नदियों में स्नान के लिए काफी अधिक लोग पहुंचते है। साथ ही पौराणिक महत्व वाले मंदिरों में भक्तों की संख्या बढ़ जाती है। खरमास पूजा-पाठ के नजरिए से पुण्यदायी है। इस महीने में शास्त्रों का पाठ करने की परंपरा है।

ज्योतिषाचार्य आचार्य मनीष स्वामी ने बताया कि ज्योतिष शास्त्र के अनुसार विवाह के लिए गुरु और शुक्र तारा का आकाश में उदित होना जरूरी है। यदि ये दोनों तारा, ग्रह अस्त हों तो विवाह नहीं किया जाता। मलमास समाप्त होने के 10 दिन पश्चात 23 अप्रैल को शुक्र तारा अस्त हो जाएगा, जो कि पुन: 29 जून को उदय होगा। इसी बीच छह मई को गुरु तारा भी अस्त हो जाएगा, जो दो जून को उदित होगा। इन दोनों ग्रह के अस्त होने से 23 अप्रैल से लेकर 30 जून तक विवाह के लिए एक भी श्रेष्ठ मुहूर्त नहीं है।
आचार्य मनीष स्वामी ने बताया कि जुलाई में भी मात्र पांच मुहूर्त में फेरे लिए जा सकेंगे। इसके पश्चात 17 जुलाई को देवशयनी एकादशी से 16 नवंबर तक चातुर्मास लगने से शुभ कार्य नहीं किए जाएंगे। देवउठनी एकादशी के बाद नवंबर में पांच और दिसंबर में खरमास शुरू होने से पहले छह मुहूर्त हैं।

इस साल होंगे विवाह के 20 शुभ मुहूर्त
मार्च-14 मार्च से 13 अप्रैल तक कोई मुहूर्त नहीं।
अप्रैल-18, 19, 20, 21, 22 शुभ मुहूर्त
मई-मुहूर्त नहीं
जून-मुहूर्त नहीं
जुलाई-9, 11, 12, 13,15 शुभ मुहूर्त
अगस्त से अक्टूबर तक कोई शुभ मुहूर्त नहीं
नवंबर-17, 22, 23, 24, 25 शुभ मुहूर्त
दिसंबर-2, 3, 4, 10, 13, 15 शुभ मुहूर्त

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