Wednesday, May 22

30 साल पहले हुए दोहरे हत्याकांड में 2 को उम्रकैद, 4 दोषियों को 6 महीने की सश्रम कारावास

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बरेली 11 अक्टूबर। जानवर चराने के विवाद में सिरौली में 30 साल पहले हुए दोहरे हत्याकांड में अपर सत्र न्यायाधीश-14 ज्ञानेंद्र त्रिपाठी ने सिरौली ग्राम सुकटिया निवासी हत्यारोपी भूरे और ननका को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। प्रत्येक अभियुक्त पर 13 हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया है। वहीं मारपीट, बलवा में साहूकार पप्पू, रमेश और तुलाराम समेत 4 आरोपियों को छह महीने सश्रम कारावास और दो हजार रुपये जुर्माना भी लगाया। परीक्षण के दौरान सात आरोपियों की मृत्यु हो जाने के कारण उनके विरुद्ध मुकदमे की कार्रवाई समाप्त कर दी।

एडीजीसी क्राइम सुनील पाण्डेय ने बताया कि वादी दुर्गा प्रसाद ने थाना सिरौली में तहरीर देकर बताया था कि 28 मई 1993 को गांव के सियाराम और विशम्भर के बच्चों में जंगल में जानवर चराते समय कहासुनी हो गयी थी। इसी बात को लेकर सियाराम और विशम्भर के परिवार में शाम 7 बजे कहासुनी हो रही थी। वह और छोटा भाई हीरालाल व खन्दारी, भतीजा राजपाल, राजाराम, सोहनलाल, गुलाब, आदि शोरगुल सुनकर बीच-बचाव करने पहुंचे। इतने में विशम्भर, सिपाही, साहूकार, हरी सिंह के साथ कई हथियारबंद लोग आ गये। रामवीर, भूरे, ननका, हरी सिंह ने अपनी बंदूक से गोलियां चला दीं, जोकि बड़े भाई प्रधान खंदारी सिंह व भतीजे राजपाल और हरद्वारी, रंजीत, रामदयाल, वेदराम को लगीं। बाकी लोगों ने लाठी डंडों व तवल से मारपीट की। भाई खन्दारी सिंह व भतीजा राजपाल की मौत हो गयी। 4-5 लोग गंभीर घायल हो गये। पुलिस ने बलवा, मारपीट, हत्या, हत्या का प्रयास आदि संगीन धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की थी। विवेचना के बाद 14 आरोपियों के विरुद्ध आरोप पत्र कोर्ट भेजा गया था।

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