Thursday, March 19

स्नातक परीक्षाओं में बड़ा बदलाव, ऑब्जेक्टिव पैटर्न से होगी अब परीक्षा

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मेरठ 19 मार्च (प्र)। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में बुधवार को आयोजित विद्वत परिषद की महत्वपूर्ण बैठक में शिक्षा प्रणाली को आधुनिक और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से कई अहम निर्णय लिए गए। कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला की अध्यक्षता में सम्पन्न इस बैठक में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप विश्वविद्यालय की शैक्षणिक संरचना में व्यापक बदलाव करने पर सहमति बनी। इन निर्णयों को छात्रों के भविष्य और बदलती वैश्विक शिक्षा आवश्यकताओं के अनुरूप एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

इन नए एकीकृत पाठ्यक्रमों में प्रवेश राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी द्वारा आयोजित राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षा के माध्यम से किया जाएगा। वर्ष 2026 में कक्षा 12वीं की परीक्षा में सम्मिलित होने वाले या उत्तीर्ण छात्र-छात्राएं निर्धारित पात्रता के अनुसार आवेदन कर सकेगे। प्रवेश प्रक्रिया विश्वविद्यालय अनुदान आयोग और राज्य सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप पूरी की जाएगी, जिसमें मेरिट और आरक्षण नीति का विशेष ध्यान रखा जाएगा। इससे चयन प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाए रखने में मदद मिलेगी।

चार वर्षीय इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों को केवल विषय ज्ञान ही नहीं, बल्कि शिक्षण कौशल, विद्यालयीय इंटर्नशिप, शैक्षिक प्रौद्योगिकी और शोध आधारित प्रशिक्षण भी प्रदान किया जाएगा। इसका उद्देश्य छात्रों को एक संपूर्ण शिक्षक के रूप में तैयार करना है, जो न केवल विषय में दक्ष हो, बल्कि आधुनिक शिक्षण विधियों और तकनीकों से भी परिचित हो। कार्यक्रम की अवधि पूर्ण करने पर अभ्यर्थियों को स्नातक के साथ-साथ बीएड की डिग्री भी प्रदान की जाएगी, जिससे उन्हें रोजगार के बेहतर अवसर मिल सकेंगे शिक्षा में गुणवत्ता और पारदर्शिता की दिशा में कदम विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार ये सभी निर्णय शिक्षा में गुणवत्ता, पारदर्शिता और अकादमिक उत्कृष्टता को बढ़ाने के उद्देश्य से लिए गए हैं। इस महत्वपूर्ण बैठक में कुलसचिव डॉ. अनिल यादव, वित्त अधिकारी रमेश चंद्र, डिप्टी रजिस्ट्रार सत्य प्रकाश, प्रो. हरे कृष्णा, मीडिया सेल सदस्य मितेंद्र गुप्ता सहित विद्वत परिषद के कई सदस्य उपस्थित रहे।

परीक्षा प्रणाली में बड़ा बदलाव
बैठक का सबसे प्रमुख निर्णय स्नातक स्तर की परीक्षा प्रणाली को लेकर रहा। विश्वविद्यालय ने बीए, बीकॉम और बीएससी (ऐनईपी) के प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय सेमेस्टर की परीक्षाओं को पूरी तरह से वस्तुनिष्ठ बनाने का निर्णय लिया है। अब प्रत्येक प्रश्नपत्र में 100 प्रश्न होंगे और परीक्षा की अवधि 2 घंटे निर्धारित की गई है। यह बदलाव छात्रों के मूल्यांकन को अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष और समयबद्ध बनाने की दिशा में उठाया गया कदम है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कोर्स होगा अनिवार्य
तेजी से बदलती तकनीकी दुनिया को ध्यान में रखते हुए विश्वविद्यालय ने एक और महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए स्नातक पाठ्यक्रमों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को शामिल किया है। बीए, बीएससी और बीकॉम एनईपी पाठ्यक्रम में 3 क्रेडिट का ए आई कोर्स स्किल एन्हांसमेंट कोर्स के रूप में अनिवार्य रूप से संचालित किया जाएगा।

चार वर्षीय एकीकृत शिक्षक शिक्षा कार्यक्रम की शुरुआत
विश्वविद्यालय ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप शैक्षणिक सत्र 2026-27 से चार वर्षीय एकीकृत शिक्षक शिक्षा कार्यक्रम बीए- बीएड एवं बीएससी बीएड प्रारम्भ करने की घोषणा की है। इस कार्यक्रम को संचालित करने के लिए विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद से मान्यता प्राप्त हो चुकी है।

समर्थ पोर्टल ठप, छात्रों पर विलंब शुल्क का दबाव
चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में सम सेमेस्टर के ऑनलाइन परीक्षा फॉर्म 17 मार्च से भरे जाने शुरू हो चुके हैं, लेकिन तकनीकी खामियों के कारण बड़ी संख्या में छात्र फॉर्म भरने से वंचित रह गए हैं। समर्थ पोर्टल पर लगातार आ रही समस्याओं ने छात्रों की चिंता बढ़ा दी है। छात्रों का कहना है कि पोर्टल पर लॉगिन करते समय नो रिकॉर्ड फाउंड जैसी त्रुटियां सामने आ रही हैं, वहीं कई बार वेबसाइट की धीमी गति के कारण फॉर्म सबमिट नहीं हो पा रहे। परीक्षा फॉर्म भरने की अंतिम तिथि 30 मार्च निर्धारित की गई है, जिसके बाद 250 से 500 रुपये तक का विलंब शुल्क लगाए जाने का नोटिस जारी किया गया है। इस मुद्दे को लेकर छात्र नेता ने परीक्षा नियंत्रक से शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने कहा कि जब तकनीकी समस्याओं के चलते छात्र समय पर फॉर्म ही नहीं भर पा रहे हैं, तो उन पर विलंब शुल्क लगाना पूरी तरह अन्यायपूर्ण है। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से मांग की है कि पोर्टल की समस्याओं को तुरंत ठीक किया जाए और विलंब शुल्क संबंधी आदेश को वापस लिया जाए।

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