मेरठ 10 जनवरी (प्र)। तीन माह से बरसात नहीं हुई है, बावजूद इसके ठंड के तेवर बढ़े हुए हैं। पर्यावरणविदों के लिए मौसम की हालिया स्थितियां अचरज में डाल रही हैं। शुक्रवार को न्यूनतम तापमान 4.3 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया। वहीं अधिकतम तापमान पिछले कई दिनों से सामान्य से कम है। मेरठ में शनिवार को सुबह पारा 6 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया. वहीं, मौसम वैज्ञानिकों ने एक बार फिर सर्दी को लेकर अलर्ट जारी किया है.
मौसम वैज्ञानिक की मानें तो मेरठ में आज दोपहर तक अधिकतम तापमान 14°C, गोरखपुर में 15°C, इटावा में 20°C, कानपुर में 22°C, आगरा में 23°C, लखनऊ में 24°C, गाजियाबाद में 22°C और नोएडा में 21°C के आसपास रहने की संभावना है.
जनपद वासियों को कोल्ड-डे जैसी स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। शुक्रवार को मेरठ प्रदेश के सबसे ठंडे शहरों में तीसरे स्थान पर रहा। अभी तक श्रीनगर, शिमला, मनाली, जैसे इलाकों में अच्छी बर्फबारी देखने को नहीं मिली है। जबकि तापमान गिरने के पीछे मुख्य कारण पहाड़ों पर बर्फबारी और बरसात को माना जाता है। पश्चिम विक्षोभ सक्रिय जरूर हुए हैं, लेकिन उनका प्रभाव सीमित रहा है। वर्ष 2025 के अंतिम दिनों में सिस्टम के सक्रिय होने से साल के पहले दिन कहीं कहीं नाम मात्र बूंदें पड़ी थीं। लेकिन बरसात रिकार्ड नहीं की जा सकी आठ अक्टूबर को 21.4 मिलीमीटर बरसात हुई थी। इसके बाद मौसम पूरी तरह शुष्क रहा है। जबकि तीन माह में कम से कम 25 मिलीमीटर बरसात होती है।
मेरठ कालेज के भूगोल विभाग के पूर्व अध्यक्ष डा. कंचन सिंह ने बताया कि मानसून सीजन के बाद हुई बरसात का खेती के साथ पर्यावरणीय महत्व है। यह वायु प्रदूषण को कम करता और भूगर्भ जल के स्तर को ठीक करने में मदद करता है। जनवरी में औसतन 21 मिलीमीटर बरसात होती है। सरदार वल्लभ भाई पटेल कृषि विश्वविद्यालय के मौसम केंद्र के प्रभारी डा. यूपी शाही ने बताया कि दिसंबर में 13 दिन कोहरा पड़ा था । वहीं जनवरी में सुबह के समय कोहरा देखने को मिल रहा है। यह कोहरा वर्टिकल न होकर क्षैतिज है जो बादलों और नमी के रूप में वायुमंडल की निचली सतह पर छाया हुआ है। इससे सूरज की किरणें धरती पर न पड़ने या कम तीव्रता से पड़ने के कारण ही ठंड का अहसास अधिक हो रहा है। शुक्रवार को सुबह सवा 11 बजे के बाद कोहरा छंटा। इसके बाद धूप निकली, जिससे ठंड से राहत मिली।
पाले से फसलों को हो सकता है नुकसान, सिंचाई करें किसान
सरदार वल्लभ भाई पटेल कृषि विश्वविद्यालय के विज्ञानी प्रोफेसर आरएस सेंगर ने बताया कि तापमान गिरने से आलू, मटर, सरसों, अरहर, फूल गोभी, पत्ता गोभी की फसलें प्रभावित हो सकती हैं। पाले से भी फसलें खराब हो सकती हैं। ऐसे में खेतों में हल्की सिंचाई करनी चाहिए। अगर ठंड के सीजन में बरसात होती है तो उससे गेहूं की फसल की वृद्धि अच्छी होती है। बरसात न होने से किसानों को सिंचाई पर निर्भर रहना पड़ रहा है। जिससे लागत बढ़ रही है। सरदार वल्लभ भाई पटेल कृषि विश्वविद्यालय के मौसम केंद्र के प्रभारी डा. यूपी शाही ने बताया कि 15 जनवरी तक बरसात की कोई संभावना नहीं है। आगामी दिनों में दिन में धूप निकलेगी। रात का पारा और गिरने की आशंका है।
दृष्टि से दुर्लभ घटना
मौसम विभाग ने मेरठ में शुक्रवार को गरज-चमक के साथ हल्की बरसात की संभावना जताई थी। जनपद में बरसात नहीं हुई, लेकिन दिल्ली में सुबह के समय बरसात हुई। डा. कंचन सिंह ने बताया कि ऐसी बरसात बेहद दुर्लभ घटना है, चूंकि 10 डिग्री सेल्सियस से कम तापमान पर बरसात केवल पहाड़ों पर देखी जाती है। शुक्रवार को प्रदेश में सबसे ठंडा शहर अलीगढ़ रहा। गाजियाबाद दूसरे नंबर पर रहा, यहां न्यूनतम तापमान 4.2 डिग्री सेल्सियस और मेरठ तीसरे नंबर पर रहा।
