मेरठ 10 मार्च (प्र)। नगर निगम के जीआईएस सर्वे में सामने आई बड़ी खामियों का अब तक निदान नहीं हो पा रहा है। एक मकान या दुकान का मामला सही किया जाता है तो गलती का दूसरा मामला सामने आ जाता है। बड़ी खामी यह है कि एक ही मकान पर तीन बार हाउस टैक्स लगा दिया गया। सर्वे टीम ने गड़बड़ियां करते हुए छोटे भवनों पर भारी टैक्स और कई संपत्तियों पर डुप्लीकेट बिल जारी कर दिए, जिससे जनता परेशान है। इस मुद्दे पर मेयर ने अधिकारियों को जांच और सुधार के आदेश दिए हैं, लेकिन यह आदेश सिर्फ हवाई ही बनकर रह गये हैं। जीआईएस सर्वे में गड़बड़ी के मामले सामने आ रहे हैं। सर्वे में करीब 70-75 हजार प्लॉट और लगभग 29 हजार डुप्लीकेट प्रॉपर्टी (एक ही जगह कई बार ) चिन्हित की गई हैं, जिस पर हाउस टैक्स का बिल तीन-तीन बार तक पहुंच गया। हाउस टैक्स की त्रुटियों, जैसे कहीं बहुत अधिक तो कहीं बहुत कम टैक्स लगाने को लेकर पार्षद हंगामा कर चुके हैं। हालांकि महापौर हरिक अहलूवालिया ने अधिकारियों को ऐसे मामलों में तुरंत सुधार करने और भौतिक सत्यापन के बाद ही कर निर्धारण करने का निर्देश दिया है।
नगर निगम में गृहकर में संशोधन कराने वालों की भीड़ उमड़ रही है। रोजाना नए-नए मामले सामने आ रहे हैं। वहीं महापौर ने बैठक कर निगम कर्मचारियों से कहा कि जनता को परेशानी न होने दें महानगर में जीआईएस सर्वे के आधार पर करीब 3.50 भवनों से गृहकर की वसूली करने का अभियान निगम का चल रहा है। 90 गृहकर मित्र की नियुक्ति कर भवन स्वामियों के घरों पर नया बिल वितरित करा दिया हैं। 10 गुना से ज्यादा गृहकर बढ़ाकर बिल भवन स्वामियों के पास पहुंचे तो खलबली मच गई। आपत्ति बढ़ रही और समाधान नहीं हो पाया।
चौपाल में समस्या का समाधन संभव
मुख्य कर निर्धारण अधिकारी शिवकुमार गौतम का कहना है कि परेशान नागरिक अब अपने वार्ड में डोर-टू-डोर स्वकर निर्धारण फॉर्म के माध्यम से या शुक्रवार को लगने वाली चौपालों में समस्या का समाधान करा सकते हैं। अगर आपके घर पर भी गलत या एक से ज्यादा टैक्स बिल आए हैं, तो आप नगर निगम के जोनल कार्यालय में शिकायत दर्ज करा सकते हैं या मेयर कैंप कार्यालय में संपर्क कर सकते हैं, जहां अधिकारी मामले का निस्तारण कर रहे हैं।
20 प्रतिशत की छूट खत्म
निगम ने 31 मार्च के बाद 20 प्रतिशत की छूट खत्म कर नए बिल पर वसूली करने की बात कही। गृहकर के बढ़े बिल को लेकर निगम परिसर में एक सप्ताह से रोजाना पार्षद हंगामा कर रहे हैं। सपा के साथ भाजपा पार्षदों ने निगम अफसरों को चेतावनी दी कि वह भवन स्वामियों के साथ लूट नहीं होने देंगे। इसको लेकर पार्षदों में आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा हैं। सोमवार को शास्त्री नगर निवासी सतेन्द्र भटनागर ने तीन बिल देकर मुख्य कर निर्धारण अधिकारी को बताया कि उनका एक ही भवन हैं जबकि निगम ने इस एक ही भवन पर तीन अलग-अलग तारीखों में बिल भेजे हैं। एक बिल 15238 रुपये का है और दूसरा 18 हजार रुपये का बताया गया। जबकि तीसरा बिल 20 हजार रुपये का भेजा गया है। उन्होंने मुख्य कर निर्धारण अधिकारी को बताया है कि इनमें कौन सा असली और कौन सा नकली।
गृहकर में हो रही असुविधा
माधवपुरम निवासी सुबोध गर्ग ने अपने हाउस टैक्स का बिल दिया और कहा कि 68 मीटर के घर पर 22 हजार का बिल आया है। ऐसी एक नहीं 100 से भी अधिक शिकायत मुख्य कर निर्धारण अधिकारी के पास आई गृहकर के मामले में लोगों को हो रही असुविधा या भ्रम की स्थिति को देखते हुए महापौर हरिकांत अहलूवालिया अपने कैंप कार्यालय पर प्रतिदिन सुबह के समय जनता दरबार लगाकर समस्याएं सुनते हैं। महापौर ने कहा कि महानगर की जनता को गृहकर से संबंधित जानकारी पूर्ण सत्यता, स्पष्टता और पारदर्शिता के साथ उपलब्ध कराई जाए जिससे किसी प्रकार की भ्रांति उत्पन्न न हो। उन्होंने कहा कि प्रत्येक करदाता को उसके भवन निर्माण की अवधि के अनुसार वार्षिक किराया मूल्यांकन पर निर्धारित छूट अनिवार्य रूप से प्रदान की जाए ताकि करदाताओं अधिकतम लाभ मिल सके।
