Monday, April 13

बिना चर्चा नगर निगम का 1831 करोड़ का बजट पास

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मेरठ, 13 अप्रैल (प्र)। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के नेताजी सुभाष चंद्र बोस सभागार में आयोजित नगर निगम की बोर्ड बैठक में उस वक्त अजीबोगरीब स्थिति पैदा हो गई जब शहर के विकास के लिए 1831.75 करोड़ का मूल बजट बिना किसी चर्चा के मात्र चार मिनट के भीतर पास कर दिया गया। चर्चा न होने से गुस्साए विपक्ष के दो पार्षद फजल करीम और रिजवान अंसारी ने सदन का बहिष्कार कर सदन से बाहर चले गए। वहीं सत्ता पक्ष के एक पार्षद ने भी चर्चा न होने पर नाराजगी जताई। महापौर हरिकांत अहलूवालिया ने यह कहते हुए स्थिति संभाली कि बहुमत से बजट पास करने का निर्णय लिया गया है।
नगर निगम बोर्ड की बैठक अपने निर्धारित समय से करीब 31 मिनट देरी से शुरू हुई। कोरम पूरा होने के बाद औपचारिक रूप से बोर्ड बैठक की शुरुआत सुबह 11.31 बजे हुई और 11.35 बजे बजट पास कर दिया गया। मुख्य वित्त एवं लेखाधिकारी जितेंद्र यादव ने जैसे ही बजट पढ़ने के लिए आए वैसे ही भाजपा पार्षदों ने बजट को पास पास कहना शुरू कर दिया। यह देख ए आई एम आई एम के पार्षद फजल करीम और आल इंडिया मुस्लिम लीग के पार्षद रिजवान अंसारी ने विरोध करते हुए सदन से वॉकआउट कर गए। भाजपा पार्षदों ने बजट को ध्वनिमत से पास कर दिया.

गौर करने वाली बात यह रही कि बजट पर चर्चा न होने से भाजपा पार्षद अनुज वशिष्ठ ने कड़ा विरोध किया। उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से बजट पर चर्चा होनी चाहिए थी, इस तरह आनन-फानन में बैठक निपटाना गलत है।
विपक्ष और अपनों के विरोध के बीच महापौर हरिकांत अहलूवालिया अडिग नजर आए। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि बजट पूरी तरह नियमानुसार और भारी बहुमत के साथ पास किया गया है। उन्होंने तर्क दिया कि शहर के विकास कार्यों को गति देने के लिए सभी सदस्यों की सहमति से यह निर्णय लिया गया है।

भाजपा पार्षद अनुज वशिष्ठ ने मंच पर मौजूद महापौर हरिकांत अहलूवालिया से कहा कि यदि इसी तरह बैठक करनी है तो पार्षदों को बुलाने का कोई औचित्य नहीं है। इस पर महापौर हरिकांत अहलूवालिया ने जवाब देते हुए कहा कि बजट पहले ही कार्यकारिणी में सभी की सहमति से पारित हो चुका है, इसलिए इस पर चर्चा का कोई विषय नहीं बनता। बैठक में लगभग 50 पार्षद और नगर निगम के अधिकारी मौजूद थे। मुख्य वित्त एवं लेखा अधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह यादव बजट पढ़ने के लिए मंच पर पहुंचे थे, लेकिन उन्हें बोलने का मौका दिए बिना ही बजट को पास घोषित कर दिया गया।

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