Sunday, April 14

अब बिना मीटर बिजली इस्तेमाल न कर सकेंगे विद्युतकर्मी

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लखनऊ, 23 दिसंबर। अब कोई भी विद्युतकर्मी बिना मीटर बिजली का इस्तेमाल न कर सकेगा। विद्युतकर्मियों के बिना मीटर बिजली कनेक्शन से नाराज हाईकोर्ट द्वारा जवाब तलब करने पर पावर कारपोरेशन प्रबंधन ने सभी के यहां जल्द मीटर लगाने का निर्णय किया है। कोर्ट ने कारपोरेशन से पूछा है कि विभागीयकर्मियों के यहां मीटर क्यों नहीं लगाए? विभागीयकर्मियों द्वारा ही बिजली की चोरी करने या फिर दुरुपयोग को जांचने की क्या प्रक्रिया है और कितनी बार जांच की गई?

दरअसल, विद्युत अधिनियम-2003 के तहत जहां बिना मीटर किसी को बिजली का कनेक्शन नहीं दिया जा सकता वहीं उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने भी टैरिफ आर्डर में अनमीटर्ड बिजली कनेक्शन पर रोक लगाने के आदेश दिए हैं।
इसके बावजूद ज्यादातर विद्युतकर्मियों ने बिना मीटर ही बिजली का कनेक्शन ले रखा है। विद्युतकर्मी मीटर लगाए जाने का सदैव विरोध करते रहे हैं। अब इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस संबंध में पावर कारपोरेशन से पूरा ब्योरा तलब किया है।

बलिया में बिजली चोरी के एक मामले में उपभोक्ता उमाशंकर वर्मा द्वारा दायर याचिका में विद्युतकर्मियों पर ही तमाम आरोप लगाए जाने का संज्ञान लेते हुए कोर्ट ने कारपोरेशन से पूछा है कि क्या सभी विभागीयकर्मियों के बिजली कनेक्शन में मीटर हैं? अगर नहीं हैं तो कितने कनेक्शन बिना मीटर के हैं और क्यों मीटर के बिना कनेक्शन हैं? विभागीयकर्मियों से कनेक्शन के एवज में किस दर से चार्ज किया जाता है?

कोर्ट ने यह भी बताने के लिए कहा है कि विभागीयकर्मियों द्वारा किसी तरह से बिजली की चोरी करने और बिजली के दुरुपयोग को जांचने के लिए क्या प्रक्रिया अपनायी जाती है? विभागीयकर्मियों के यहां कितनी बार जांच की गई और उसका क्या परिणाम रहा?
विभागीयकर्मियों के कनेक्शन को लेकर कोर्ट के कड़े रुख को देखते हुए पावर कारपोरेशन प्रबंधन अब ऐसे सभी कनेक्शन में मीटर लगाने का निर्णय किया है। कारपोरेशन के अध्यक्ष डॉ. आशीष कुमार गोयल का स्पष्ट तौर पर कहना है कि सभी विभागीयकर्मियों के यहां मीटर लगाए जाएंगे ताकि पता चल सके कि किसके द्वारा कितने यूनिट बिजली का इस्तेमाल किया जा रहा है?
गोयल का मानना है ईमानदार बिजलीकर्मियों को भला इसमें क्या दिक्कत होगी? दिक्कत उन्हें ही हो सकती जो किराएदार व अन्य तरीके से बिजली का दुरुपयोग कर रहे हैं।

अब बिजलीकर्मियों को घरेलू उपभोक्ता ही मानता है आयोग
टैरिफ आर्डर में नियामक आयोग लगभग एक लाख बिजलीकर्मियों यानी विभागीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की अलग श्रेणी (एलएमवी-10) को पहले ही खत्म कर चुका है। सभी विद्युतकर्मियों को आयोग अब घरेलू उपभोक्ता ही मानता है। आयोग ने सभी के यहां अनिवार्य रूप से मीटर लगाने के भी आदेश दिए लेकिन विद्युतकर्मियों के विरोध को देखते हुए कारपोरेशन प्रबंधन अब तक मीटर लगाने में हीला-हवाली करता रहा। आयोग का मानना है कि बिजलीकर्मियों द्वारा लगभग 488.90 करोड़ रुपये की बिजली का इस्तेमाल किया जा रहा है। गौर करने की बात है कि बिजलीकर्मियों द्वारा एक एसी को चलाने के एवज में मात्र 650 रुपये प्रतिमाह ही जमा किया जाता है जबकि आम उपभोक्ता द्वारा एसी का इस्तेमाल करने पर ढाई-तीन हजार रुपये से कम का बिल नहीं आता है।
ऐसे माना जा रहा है कि सभी विद्युतकर्मियों के यहां मीटर लगाए जाने पर ही पता चल सकेगा उनके द्वारा वास्तव में बिजली का कितना इस्तेमाल किया जा रहा है।

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