Sunday, June 23

पुरानी फीस हो माफ नये सदस्य बनाये जाए, मनोनीत पदाधिकारियों की लापरवाही के चलते मेरठ क्लब बना खस्ताहाल

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प्रदेश में जब से योगी आदित्यनाथ की सरकार सत्ता में आई है तब से प्रदेश के जिलों सहित मुख्यालय पर स्थित सरकारी ईमारतों का कायाकल्प इस प्रकार हुआ कि कुछ तो देखते ही बनती है। लेकिन कई अर्ध सरकारी कह ले जिनमें प्रशासनिक अधिकारी तथा जनता मिलकर जनहित की योजनाऐं चलाती है उनमें से कुछ बुरी तरह से जर्जर स्थिति में पहुंच रही है। इसके पीछे जब विचार और जानकारी की तो जो स्थिति सामने आई वो यह रही कि जब तक इनमें चुनाव हुए तब तक तो ये ईमारते हर तरह से गुंजायेमान रही लेकिन जब से प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा इनमें मनोनयन किया जाने लगा तब से इनकी स्थिति बद से बद्तर हो गई। क्योंकि जब तक मनोनयन करने वाला अधिकारी जनपद में मौजूद रहा तब तक तो सब नियुक्त हुए पदाधिकारी सक्रियता दिखाते रहे और अफसर के जाते ही सबका ध्यान अधर से हट गया। परिणाम स्वरूप न सही प्रकार से संस्था का संचालन हो पाया और न ही बिल्डिंग का रख रखाव।
इसके जीते जागते उदाहरण के रूप में जिम्मेदार और जानकार फिलहाल मवाना रोड के रक्षापुरम में स्थित मेरठ क्लब के कार्यालय को देख सकते है। इसके अध्यक्ष मंडलायुक्त है और अन्य अधिकारी भी पदाधिकारी मगर क्योंकि उनके पास जन समस्याओं के समाधान सरकारी योजनाओं को लागू करने का दबाव तथा कानून व शांति व्यवस्था बनाये रखने की ऐसी जिम्मेदारी है जिसे निगाह हटाना संभव नहीं है। और नियुक्त किये गये या कागजों में चुनकर बैठ गये पदाधिकारी इस नाम पर प्रशासनिक अधिकारियों के इर्दगिर्द तो लगे रहना चाहते है मगर शायद काम नहीं करना चाहते।
स्मरण रहे कि जब यहां श्री एसएन सेठ कलक्टर और एचएल बिरदी साहब कमिश्नर हुआ करते थे तब मेरठ क्लब स्टेडियम के एक कमरे में चलता था और इसका संचालन उस समय भारत भारती प्रकाशन के श्री राजेन्द्र अग्रवाल करते बताये गये। कारण कुछ भी रहा हो लेकिन एसएन सेठ साहब ने खिलाड़ियों के हित में स्टेडियम के दोनों कमरे खाली कराये। तब इसके सदस्यों में से नियुक्त पदाधिकारियों ने बिरदी साहब के यहां हाजिरी लगाई तब कचहरी स्थित सैनिक भवन में मेरठ क्लब चलाने के लिए जगह दी गई मगर वहां पूर्व सैनिकों के द्वारा किये गये एतराज पर वो भी खाली करनी पड़ी तब बताते है कि सीधे सच्चे और सरल स्वभाव के मंडलायुक्त श्री एचएल बिरदी साहब ने रक्षापुरम में बीसी आवास के सामने मौजूद बच्चों के खेलने आदि के लिए वेन पार्क का कुछ हिस्सा सांस्कृतिक और खेल गतिविधियों का संचालन करने के नाम पर अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर मेरठ क्लब को दिला दिया गया। उस समय के अधिकारियों ने इसके लिए सदस्य भी बनाये। जिससे इक्कट्ठा हुए पैसे आदि से ईमारत आदि का निर्माण हुआ और मेरठ क्लब चर्चाओं में भी आया। तब इसका सदस्य बनने के लिए शहर के नागरिक भी आकृषित हुए।
उसके बाद जब तक चुनाव हुए शिक्षा के क्षेत्र में जाना माना नाम एपेक्स ग्रुप के चेयरमैन डा0 ब्रजभूषण गोयल एवं द अध्ययन के संजय कुमार आदि ने क्लब चलाया तब तक तो यह सब सही रहा। लेकिन जब से अवैध निर्माण करने और कराने तथा ऐसे काम करने वालों को बचाने के लिए मौखिक रूप से चर्चित नागरिकों के अनुसार श्री एमएस जैन सक्रिय हुए और उन्होंने सदस्यों के कथन के हिसाब से चाटुकारिता कर चुनाव की जगह कागजी खानापूर्ति कर अपने आपको इसका सदस्यों से बनने वाला पदाधिकारी तैनात कराने के बाद स्वयंभू संचालक बन बैठे तब से जो स्थिति क्लब की खस्ताहाल होना शुरू हुई तब से उसमें सुधार पूर्ण रूप से नहीं हो पाया। बीच में डा0 योगेश मोहन का मनोनयन हुआ तो उन्होंने शुरू शुरू में इसे चलाने और इसका सौन्दर्यकरण करने के लिए बड़ी मेहनत मीटिंगे की और कार्यक्रम के लिए भरपूर प्रयास भी किये लेकिन फिर पता नहीं अचानक क्लब में जो ताला पड़ा वो खुल नहीं पाया अब सफलता से प्रशासनिक कार्य निपटाने के साथ साथ हर दिल अजीज जिलाधिकारी श्री दीपक मीणा जी ने प्रयास कर क्लब में कुछ पदाधिकारी मनोनीत कराये। जिनमें से अमित अग्रवाल जो सामाजिक कार्यों में काफी सक्रिय नजर आते है जब वो कार्यालय खोलने गये तो मेरठ क्लब की खस्ताहाल स्थिति देखकर दंग रह गये और उनके द्वारा इसका एक वीडियो जारी किया गया जिसे देखकर क्लब के सदस्य भी हैरान है कि ऐसी स्थिति कैसे हो गई।
उम्मीद है कि जिलाधिकारी जी के मार्गदर्शन में अमित अग्रवाल और उनके सहयोगी प्रयास कर इसे पुरानी स्थिति में लायेंगे। लेकिन इसके कुछ सदस्यों का मौखिक रूप से कहना है कि पहले इसकी साफ सफाई कराकर इसमें पुरानी सूची सदस्यों की देखकर उन्हें आमंत्रित किया जाए और सूचना सभी सदस्यों को दी जाए कुछ को नहीं। और फिर इतने दिन क्लब बंद रहा इसके सदस्यता शुल्क के बारे में तय हो क्योंकि कई सदस्यों का मानना है कि जब क्लब ही नहीं खुला और उसमें काम ही नहीं हुआ तो शुल्क किस बात का। इस बात को दृष्टिगत रख क्लब के बंद समय का शुल्क माफ किया जाए। और भविष्य में सदस्यता शुल्क कैसे लिया जाएगा इसकी नीति तय की जाए।
कुछ सदस्यों का यह भी कहना है कि अमित अग्रवाल सामाजिक संस्थाऐं अच्छी प्रकार से चला लेते है लेकिन शायद उन्हें क्लब चलाने का कोई तर्जुबा नहीं है इसलिए जिलाधिकारी जी के मार्गदर्शन में पिछले कई वर्षों से सचिव के रूप में सफलता से एलेक्जेंडर क्लब का संचालन करने वाले गौरव अग्रवाल और वर्तमान सचिव अमित संगल की राय और सहयोग मेरठ क्लब की बेहतरी के लिए डीएम साहब जिस रूप में भी चाहे ले और क्लब को पुरानी स्थिति में लाये। कई सदस्यों का ये भी मानना है कि कमिश्नर और डीएम तो क्लब के पदाधिकारी रहे बाकी पद मेरठ क्लब के सदस्यों के लिए तय किये जाए और उन पर पदाधिकारियों का चुनाव कराया जाए मनोनयन के स्थान पर। कुछ सदस्यों का मानना है कि पुरानी फीस पर कुछ नये सदस्य बनाये जाए जिससे क्लब की आर्थिक स्थित मजबूत हो सके।

प्रस्तुतिः अंकित बिशनोई पत्रकार व संपादक

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