Monday, April 15

लोकसभा चुनाव में सवर्ण प्रत्याशियों की हिस्सेदारी बढ़ा सकती है सपा

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नई दिल्ली 07 दिसंबर। समाजवादी पार्टी लंबे समय तक ‘एम-वाई’ यानी मुस्लिम-यादव गठजोड़ के भरोसे चुनाव लड़ती रही है। खास तौर पर उत्तरप्रदेश में भाजपा की मजबूती के साथ ही यह गठजोड़ चुनावी मैदान में मात खाता आ रहा है। इसे देखते हुए ही सपा मुखिया अखिलेश यादव अब पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक वर्ग को साधना चाहते हैं, जिसके लिए वह लगातार पीडीए का नारा बुलंद कर रहे हैं।

अब इसी एजेंडे को आगे बढ़ाते हुए रणनीति में सवर्णों को शामिल करने की भी तैयारी है। दलितों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों के हक की आवाज बुलंद करते हुए सपा 2024 के लोकसभा चुनाव में सवर्ण प्रत्याशियों की हिस्सेदारी बढ़ा सकती है। हाल ही में पांच राज्यों के चुनाव परिणाम सामने आए हैं।

इनमें भाजपा की जीत वाले मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के परिणामों को लेकर कांग्रेस ही नहीं, आईएनडीआईए में शामिल सहयोगी दलों के नेता भी सकते में हैं। वह सिर्फ हैरान ही नहीं, बल्कि चिंतित भी हैं कि आखिर क्या रणनीति अपनाकर 2024 में भाजपा के विजय रथ को रोका जाए। इसे लेकर विपक्षी दलों ने अपनी-अपनी चुनावी रणनीति पर विचार-मंथन शुरू भी कर दिया है।
सपा के उच्च पदस्थ सूत्र के अनुसार, समाजवादी पार्टी जातीय राजनीति के एजेंडे को छोड़ने वाली तो नहीं है। उसके एजेंडे में जाति आधारित जनगणना शामिल रहेगी। पार्टी चुनावी मंचों से दलितों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों की बात भी जोरशोर से उठाएगी, लेकिन इसके साथ ही यह भी मानना है कि चुनाव सिर्फ पीडीए के बलबूते पर नहीं जीता जा सकता।

वजह यह कि फिलहाल पिछड़े वर्ग की अधिकांश जातियां भाजपा के साथ मजबूती से जुड़ी हुई हैं, जबकि दलित वोट की बड़ी हिस्सेदार बसपा के साथ भाजपा भी है। ऐसे में सपा को हर वर्ग के वोट प्राप्त करने के लिए पसीना बहाना होगा। आवश्यक है कि भाजपा की मजबूत पकड़ वाले सवर्ण वोटबैंक में भी सेंध लगाई जाए।

पार्टी के वरिष्ठ नेता ने बताया कि सपा इस बार लोकसभा चुनाव में सवर्ण वर्ग के प्रत्याशियों की टिकट में हिस्सेदारी बढ़ाने पर विचार कर रही है। 2019 में इस वर्ग के टिकट घटाकर पार्टी उसका नुकसान भी देख चुकी है। ऐसी ही रणनीति के लिए दूसरे दल भी तैयारी कर रहे हैं। राष्ट्रीय लोकदल नौ दिसंबर को लखनऊ में प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में लोकसभा चुनाव को लेकर मंथन करेगा, जबकि बसपा प्रमुख मायावती ने लखनऊ में ही 10 दिसंबर को देशभर के पदाधिकारियों की बैठक बुलाई है।

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