Friday, August 29

मुख्यमंत्री की शहरों से जुड़ी नगर पालिकाओं को स्मार्ट बनाने और सुविधाएं देने की योजना है सराहनीय, सीएम साहब ऐसा हो जाए इसके लिए पूर्व सांसदों की अध्यक्षता में गठित की जाए निगरानी समिति

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नगर विकास विभाग की लखनउ मुख्यालय में हुई समीक्षा बैठक में अफसरों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि बीस साल बाद अब नगर निगमों को वित्तीय स्वीकृति सीमा बढ़ाई जाएगी। तथा 100 करोड़ से मेरठ सहित गोरखपुर गाजियाबाद शाहजहांपुर मथुरा अयोध्या और फिरोजाबाद को राज्य स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में शामिल किया गया था जिसे 2020-21, 24 के लिए र्स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट दिया गया था जिसके तहत सात नगर निगम को 50-50 करोड़ की राशि उपलब्ध कराई गई थी। इस तरह पांच निगमों को 250-250 करेाड़ का फंड दिया गया। अब दो साल और 2027 तक के लिए इसे बढ़ा दिया गया है। वर्तमान वित्तीय वर्ष में सरकार के बजट में इन कार्यों के लिए 400 करोड़ की राशि रखी गई है। उन्होंने कहा कि अब शहरों से जुड़ी नगर पालिकांए भी स्मार्ट बनाई जाएंगी। इस समीक्षा बैठक में एक खबर के अनुसार मेरठ समेत प्रदेश के सात शहर अब 2450 करोड़ के प्रोजेक्ट से स्मार्ट होंगे। शासन ने इन सभी शहरों के लिए स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट की अवधि को दो साल के लिए बढ़ा दिया है। अब इन सभी शहरों को 100-100 करोड़ के और प्रोजेक्ट पर काम करने की अनुमति मिलेगी। अब राज्य स्मार्ट सिटी में 2026-27 तक विकास कार्य होंगे।
पूर्व में शासन के आदेश के तहत मेरठ, गोरखपुर, गाजियाबाद, शाहजहांपुर, अयोध्या, मथुरा और फिरोजाबाद को राज्य स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में शामिल किया गया था। इस प्रोजेक्ट के तहत 2020-21 से 2024-25 के लिए स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट का काम दिया गया था। इसके तहत मेरठ समेत सात नगर निगमों को हर वर्ष 50-50 करोड़ की राशि उपलब्ध कराई गई थी। इस तरह पांच साल में हर नगर निगम 250 करोड़ रुपये का फंड दिया गया। अब शासन ने राज्य स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट की अवधि को दो साल और 2025-2026, 2026-2027 तक के लिए बढ़ा दिया है। साथ ही मेरठ समेत सात शहरों को 100-100 करोड़ की राशि मिलेगी। वर्तमान वित्तीय वर्ष में प्रदेश सरकार के बजट में भी 400 करोड़ की राशि रखी है। अधिकारियों के अनुसार इस तरह अब स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट पंचवर्षीय न होकर सात वर्षीय हो गई है।
अब कुछ नए प्रोजेक्ट पर भी काम होगा
नगर निगम अधिकारियों के अनुसार शासन के आदेश के तहत अब अगले दो वर्ष के लिए कुछ नए प्रोजेक्ट पर भी काम हो सकेगा। इसके तहत स्मार्ट रोड, स्मार्ट पार्किंग, आईटीएमएस, स्मार्ट क्लास, जोनल कार्यालय, सोलर स्ट्रीट लाइट, सीनियर केयर सेंटर, हेल्थ एटीएम, ओपन जिम आदि प्रोजेक्ट पर काम होगा।
जानकारी अनुसार इस योजना के तहत नगर पालिकाओं में बनाएं जाएंगे गौरव पथ। शहरी सुविधाओं चार्जिंग स्टेशन मौजूद होंगे तथा 100 प्रतिशत कचरा निस्तारण के साथ ही डिजिटल सेवाओं की सुविधा मिलेगी। सीएम योगी ने अधिकारियों को काम करने के निर्देश दिए हैं। इस योजना का उददेय विकसित नगर पालिका योजना के तहत नागरिक केंद्रित बनाया जाएगा। आधारभूत संरचना सुदृढ़ होगी और नागरिकों को पारदर्शी सेवाएं मिलेंगी।
मुख्यमंत्री जी आपकी यह सोच दूरदर्शी और अच्छे परिणाम वाली है। लेकिन स्मार्ट सिटी के नाम पर पूर्व में नगर निगमों में जो पैसे और समय की भरपूर बर्बादी हुई मगर स्मार्ट सिटी का दर्जा सबको नहीं मिल पाया। जिन्हें स्मार्ट सिटी का दर्जा मिला उनमें भी नागरिक सुविधाएं उपलब्ध नहीं है। यह जरूर है कि कागजी खानापूर्ति और कार्यो के फर्जीकरण के नाम पर जो बजट मिला नागरिकों के अनुसार उसे मिल बांटकर काम कराने की बजाय कहां कहां खर्च किया गया यह जांच का विषय है क्योंकि सुविधाएं तो जो होनी चाहिए उससे आधी भी उपलब्ध नहीं है। सरकार अब 100 करोड़ रूपये से जिन शहरों का सौंदर्यीकरण कराने जा रही है मेरा मानना है कि उन शहरों में शहर विधायक की निगरानी में कमेटी बने जिनमें महापौर और विभागीय अधिकारी हो और खर्च के विवरण की अनुमति कमेटी अध्यक्ष से ली जाए और सरकार चाहे तो पूर्व सांसदों की अध्यक्षता में भी यह कमेटी बना सकती हैं। नागरिक यह चाहते हैं कि आपकी सरकार की योजनाओं के तहत शहर स्मार्ट बने क्योंकि आए दिन भ्रष्टाचार और गंदगी के बढ़ते साम्राज्य की खबरों को पढ़कर अब नागरिक स्मार्ट सिटी की खबरें पढ़कर उत्साहित नहीं होता। पांच साल में जो योजनाएं आई नगर निगम के अधिकारियों ने योजनाओं के उददेश्यों के अनुसर खर्च ना कर बंदरबांट की। मुख्यमंत्री जी अगर यही लापरवाही चलती रही तो स्मार्ट सिटी का सपना आसानी से पूरा नहीं हो पाएगा।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)

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