मेरठ, 18 अप्रैल (प्र)। मेरठ कॉलेज के विधि विभाग की ओर से आयोजित नेशनल मूट कोर्ट प्रतियोगिता के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति विवेक चौधरी ने भविष्य के वकीलों को सफलता के मंत्र दिए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि न्यायालय श्तारीख पर तारीख्य या श्आर्डर-आर्डर्य चिल्लाने वाली कोई फिल्मी जगह नहीं, बल्कि अधिकारों की रक्षा करने वाली एक पवित्र संस्था है। इस दो दिवसीय प्रतियोगिता में देश भर से 30 टीमों में तीन-तीन प्रतिभागी हिस्सा ले रहे हैं।
न्यायमूर्ति चौधरी ने अपने पिता के एक संस्मरण को साझा करते हुए कहा कि अक्सर युवाओं से कहा जाता है कि केवल 10 साल मेहनत कर लो तो जीवन संवर जाएगा, लेकिन वास्तविकता यह है कि कड़ी मेहनत जीवन भर की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि जीवन 10-वर्षीय चरणों में चलता है। इसमें स्कूल, कॉलेज, पेशेवर जीवन और किसी भी स्तर पर रुकने पर गिरावट शुरू हो जाती है। उन्होंने कहा कि कॉलेज में प्रोफेसर केवल व्याख्यान देते हैं, अपना भविष्य आपको स्वयं गढ़ना होगा।
वकालत की भाषा और कानून की समझ है जरूरी
हिंदी माध्यम या कमजोर अंग्रेजी वाले छात्रों का उत्साह बढ़ाते हुए उन्होंने कहा कि कानूनी पेशे के लिए केवल 500 से 1,000 विशिष्ट कानूनी शब्दों के शब्दकोश की आवश्यकता होती है, जिसे अभ्यास से आसानी से सीखा जा सकता है। उन्होंने छात्रों को सलाह दी कि वे केवल कानून की किताबों तक सीमित न रहें, बल्कि कम से कम 1,000 अदालती फैसलों (रूलिंग्स) को पढ़ें। उन्होंने कहा, कानून वही है जो न्यायाधीश व्याख्या करता है। यदि न्यायाधीश श्एंड्य को श्ओर्य पढ़ता है, तो वही कानून बन जाता है।
अदालती शिष्टाचार में श्री की जगह यस माई लार्ड् का हुनर सिखाया
युवा वकीलों को शिष्टाचार का पाठ पढ़ाते हुए न्यायमूर्ति विवेक चौधरी ने कहा कि अदालत में ओके्य या जेन-फेब्य जैसे अनौपचारिक शब्दों के लिए कोई जगह नहीं है। उन्होंने वरिष्ठ अधिवक्ता केशरी नाथ त्रिपाठी का उदाहरण देते हुए बताया कि एक कुशल वकील कभी न्यायाधीश को गलत नहीं कहता।
उन्होंने कहा, न्यायाधीश से बहस (डिबेट) करने के बजाय विनम्रतापूर्वक सबमिशन्य करना सीखें। अगर न्यायाधीश असहमत भी हों, तो श्री कहने के बजाय यस माई लार्ड् कहते हुए अपनी बात को बार-बार तथ्यों के साथ दोहराएं।
मूट कोर्ट का विषय है भूजल और संवैधानिक अधिकार
इस वर्ष मूट कोर्ट का विषय अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार) के तहत भूजल का विनियमन और केंद्र-राज्य के बीच विधायी शक्तियों का बंटवारा रखा गया है। न्यायमूर्ति ने प्रतिभागियों से कहा कि वे विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाना सीखें, क्योंकि कानून केवल वर्तमान के लिए नहीं बल्कि अगली पीढ़ी की विरासत के लिए भी होता है।
सफलता की परिभाषा खुद तय करें
अंत में उन्होंने छात्रों को प्रेरित करते हुए कहा कि गलत तरीके से पैसा कमाना आसान है, लेकिन सम्मान कमाने में पूरा जीवन लग जाता है। उन्होंने कहा, आज की सफलता केवल एक कदम है। यदि आप आज जीते हैं, तो यह न समझें कि आपने बहुत बड़ा काम कर लिया है। कल एक नया दिन होगा और नई चुनौतियां होंगी।
यह सिखाए प्रमुख गुर
इंटरनशिप के लिए जरूरी रू ड्राफ्टिंग, केस ब्रीफिंग और सटीक कानूनी शोध।
अनुशासन : न्यायाधीश के बाहर निकलने से पहले कोर्ट रूम न छोड़ें और कभी पीठ दिखाकर न मुड़ें।
लक्ष्य : पहले 50 फैसले पढ़ना कठिन होगा, लेकिन उसके बाद आपकी गति बच्चे के चलने के अभ्यास की तरह तेज हो जाएगी।
