Friday, April 19

कोर्ट में युवकों ने खोली मेरठ पुलिस की पोल कांड, पुलिस ने सीसीटीवी जुटाने कोर्ट से मांगी 7 दिन की मोहलत, पूर्व आईपीएस भी पहुंचे थाने

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मेरठ, 06 फरवरी (प्र)। पुलिस द्वारा गांजा तस्करी के आरोप में पकड़े गए दो युवकों ने भरी अदालत में पुलिस की हकीकत बयांन कर दी। पकड़े गए युवकों का आरोप है कि पुलिस ने उन्हें झूठा फंसाया है। साथ ही दो अन्य युवकों को पुलिस ने पैसे लेकर छोड़ दिया। इस मामले में कोर्ट ने पुलिस से गिरफतारी से लेकर थाने तक के सीसीटीवी फुटेज मांगे हैं।
गत दिवस परतापुर थाना पुलिस को कोर्ट में सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल लोकेशन डिटेल पेश करनी थी। लेकिन गत सोमवार को पुलिस ये सभी जानकारियां पेश नहीं कर सकी। पुलिस ने कोर्ट से फुटेज आदि जुटाने के लिए 1 सप्ताह का समय मांगा है। कोर्ट ने पुलिस को 7 दिन बाद डिटेल्स प्रस्तुत करने का आदेश दिया है।

लिसाड़ी गांव के रहने वाले आहिल पुत्र सुलेमान और सुहेल पुत्र पप्पू पर गांजा बरामदगी का आरोप था। इन्हें रिमांड पर लेने के लिए केस के विवेचक परतापुर थाने के एसआई मोहित सक्सेना ने 3 फरवरी को मेरठ के अपर सत्र न्यायाधीश कोर्ट संख्या 14 (एनडीपीएस एक्ट) में पेश किया। इसमें पुलिस ने दोनों युवकों को 3 फरवरी 2024 को 11 बजकर 10 मिनट पर 1100-1100 ग्राम गांजे के साथ गिरफ्तार होना बताया। जब कोर्ट ने पकड़े गए दोनों युवक आहिल, सुहैल से पूछताछ की तो दोनों ने बताया कि पुलिस ने उन्हें शुक्रवार 2 फरवरी की शाम 7 बजे पैंठ बाजार से अनार के ठेले से उठाया था। रात भर दोनों को अवैधानिक तरीके से थाने पर रखा। उनके पास पुलिस ने खुद गांजा रखवाकर उन्हें मुकदमे में आरोपी बनाकर एफआईआर लिख ली। युवकों ने कोर्ट को कहा कि उनके साथ दो लोग भी मौजूद थे। लेकिन संबंधित पुलिसवालों ने उन दोनों को पैसे लेकर छोड़ दिया। जबकि हम दोनों को रात भर थाने में बैठाए रखा। फर्जी बरामदगी दिखाई। एसआई मनोहर लाल, हेड कॉन्स्टेबल अंकित कुमार, हेड कॉन्स्टेबल अनुज कुमार, हेड कॉन्स्टेबल चंद्रवीर हमें अरेस्ट करके लाए थे।

दोनों आरोपियों के बयानों के आधार पर कोर्ट ने 3 फरवरी से 5 फरवरी तक की उनकी रिमांड को मंजूर कर दिया। वहीं परतापुर थानाध्यक्ष और विवेचक को बेहद सख्त आदेश दिए हैं। कोर्ट ने आदेश में लिखा कि दोनों आरोपियों की अरेस्टिंग करने वाले पुलिसकर्मियों की 2 फरवरी से 3 फरवरी तक की मोबाइल लोकेशन पेश की जाए। साथ ही थाने की 2 फरवरी से 3 फरवरी दोपहर 2 बजे तक की सीसीटीवी फुटेज कोर्ट को दिखाई जाए। इतना ही नहीं सीओ ब्रहमपुरी के सीयूजी नंबर पर कॉल करने की डिटेल का मोबाइल स्क्रीनशॉट भी पेश करें।

वहीं न्यायालय ने आदेश में यह भी साफ तौर पर लिखा कि थाने से अगर यह रिपोर्ट मिली कि सीसीटीवी खराब थे, या फुटेज वेस्ट हो गई, कोई भाग डिलीट हो गया तो संबंधित थानाध्यक्ष के खिलाफ एक्शन होगा। धारा 58 एनडीपीएस एक्ट की कार्यवाही भी अमल में लाई जाएगी। इसलिए विवेचक उस अवधि की सीसीटीवी फुटेज कोर्ट में प्रस्तुत करें।

पूरी थाना पुलिस मामले को लेकर परेशान है। हड़कंप मचा हुआ है कि कैसे ये डिटेल जुटाकर पेश करें। वहीं आजाद अधिकार सेना के अध्यक्ष और पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर ने गत शाम परतापुर थाना पहुंचे। अमिताभ ठाकुर ने कहा कि गोपनीय पूछताछ में ऐसे तथ्य सामने आए जो पुलिस की कार्यवाही को संदिग्ध बनाते हैं।. उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी इंस्पेक्टर परतापुर द्वारा कोर्ट में प्रस्तुत अभिलेखों को प्राप्त करेगी और उनके आधार पर इस मामले में आगे कार्यवाही करेगी।

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