Tuesday, February 17

जमीनों की खरीद फरोख्त में उतरे कागज फैक्ट्रियों के मालिक व कुछ डाक्टरों आदि में से किस सफेदपोश ने गढ़ में खरीदी 250 बीघा भूमि, सही जांच हुई तो सरकारी भूमि घेरने का भी भड़ाफोड हो सकता है, नाली बटियों की जमीन भी

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मेरठ 08 जनवरी (दैनिक केसर खुशबू टाइम्स)। पिछले कुछ वर्षों में जमीनों की कीमत में आये उछाल से रातों रात रहीस बने लोगों को देखकर कई डाक्टर उद्योगपति व्यापारी और कुछ कागज उत्पादन और प्रकाशन के क्षेत्र में लगे लोगों की इसमें बड़ी रूचि और दो नम्बर की बेतहाश कमाई का समावेश हो जाने के चलते बताते है कि कुछ लोगों द्वारा आसपास के जिलों व तहसीलों में जमीन खरीदने व बेचने का सिलसिला काफी तेजी से बढ़ा है।
अवैध निर्माण और कच्ची कालोनियों तथा इनकी जमीनों में शामिल बटियों व नालियों और आसपास की सरकारी जमीनों पर मुफ्त कब्जा हो जाने के चलते इससे होने वाली करोड़ों की कमाई के लालच में यह जमीनों का व्यापार इस समय पिछले लगभग एक दशक से काफी लाभ का सौदा हो गया है। अपने जिले के कई सफेदपोश कुछ बिल्डरों से मिलकर पिछले कुछ सालों से इस क्रम में पड़ोसी जिलों में खूब जमीन खरीद व बेच रहे है। क्योंकि मौखिक चर्चा अनुसार कागज उत्पादन में जीएसटी की चोरी और कुछ डाक्टरों की रोज लाखों की कमाई और सफेदपोशों की आनबान से बने गठजोड़ कई जगह तो जागरूक नागरिकों के अनुसार बिल्डरों को भी पीछे छोड़ रहे है। इस संदर्भ में छपी एक खबर के हिसाब से बताते है कि गढ़मुक्तेश्वर इलाके में एक सफेदपोश ने जमीन का सौदा किया है। करीब 250 बीघा जमीन खरीदी गई है और इसी को लेकर सरगर्मी बढ़ी हुई है। मामले में दिल्ली-लखनऊ तक सूचना पहुंचने के बाद गोपनीय रूप से जांच कराई जा रही बताई जाती है। पता किया जा रहा है कि किसने और किस माध्यम से किस उपयोग हेतु यह जमीन खरीदी है, साथ ही इसी तरह की बड़ी डील को लेकर शासन सक्रिय हो गया है और पता किया जा रहा है कि किन-किन जिलों में एकसाथ बड़ी जमीन की खरीदारी हुई है।
खुफिया विभाग के अनुसार गढ़मुक्तेश्वर में कुछ समय पूर्व ही एक साथ 250 बीघा जमीन की खरीद फरोख्त की गई। इस लेनदेन में एक सफेदपोश का नाम सामने आया। इसमें खुलासा हुआ कि अपने एक साथी के साथ मिलकर किसी सफेदपोश ने जमीन खरीदी है। इस जमीन को लेकर अब चर्चाओं का बाजार गरमा गया। बात सामने आई कि काली कमाई को जमीन में निवेश किया गया है। किसी परिचित के नाम पर जमीन का बैनामा कराया गया है, या कराया जाएगा साथ ही कुछ मददगारों की भूमिका भी सामने आने लगी। ऐसे में जमीन की करोड़ों की डील को लेकर छानबीन शुरू हुई। मामला तूल पकड़ने लगा और दिल्ली-लखनऊ तक बात पहुंच गई। इतनी बड़ी जमीन को लेकर गोपनीय जांच शुरू कराई गई है। इस जमीन को बेचने और खरीदने वाले कौन लोग हैं, इसकी जानकारी की जा रही है, साथ ही भुगतान कैसे किया गया, यह भी पता किया जा रहा है। कई लोगों को इसी मामले में रडार पर लिया गया बताते है। खुफिया जांच के दौरान कई अन्य भी रडार पर आ सकते हैं। इस संदर्भ में खबर पढ़कर लगा कि पिछले कुछ वर्षों में जमीन की लेबेच में अरबों के मालिक बने अन्य क्षेत्रों में सक्रिय सफेदपोश अगर इस मामले की सही जांच हुई तो कार्रवाई के घेरे में तो आयेंगे ही अरबों खरबों की सरकारी जमीन दबा लेते है उसका भी पर्दाफाश हो सकता है। (प्रस्तुतिः- घुमंतू संवाददाता)

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