Tuesday, March 10

आठ दिन तक नहीं होंगे मांगलिक कार्य, 24 फरवरी से होलाष्टक शुरू

Pinterest LinkedIn Tumblr +

मेरठ, 17 फरवरी (दैनिक केसर खुशबू टाईम्स)। 24 फरवरी से होलाष्टक शुरू हो रहा है। यह वो समय होता है जब शुभ और मांगलिक कार्य नहीं किए जाते। यह तीन मार्च को होलिका दहन के साथ समाप्त होगा। इन आठ दिनों में नकारात्मक शक्तियां प्रबल हो जाती हैं। इसलिए इन दिनों में विशेष ध्यान रखना होता है।

फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी से होलाष्टक प्रारंभ होता है। वर्ष 2026 में यह 24 फरवरी से शुरू होकर 3 मार्च को होलिका दहन के दिन समाप्त होगा। हर साल होली से ठीक आठ दिन पहले होलाष्टक आरंभ हो जाता है। इन पूरे आठ दिनों को शुभ कार्यों के लिए वर्जित माना जाता है।
एक मान्यता के अनुसार, होलाष्टक का समय नकारात्मक शक्तियों से जुड़ा होता है। इसे अशांति और बाधाओं का काल माना गया है, इसलिए इस दौरान विवाह, गृहप्रवेश जैसे शुभ कार्य नहीं किए जाते।

औघड़नाथ मंदिर के पुजारी पंडित सारंग त्रिपाठी कहते हैं कि होलाष्टक से जुड़ी कथा भगवान विष्णु के परम भक्त प्रहलाद व होलिका से संबंधित है। प्रहलाद को हिरण्यकश्यप ने आठ दिनों तक यातनाएं दी और अंतिम दिन जब हिरण्यकश्यप की बहन होलिका, प्रहलाद को लेकर अग्नि में बैठी तो होलिका तो जल गई लेकिन प्रहलाद पूर्ण रूप से सुरक्षित रहे। इसी कारण इन आठ दिनों को शास्त्रों में अच्छा नहीं माना जाता है।
अंततः उनकी रक्षा के लिए भगवान विष्णु ने नृसिंह अवतार लेकर हिरण्यकशिपु का वध किया। इसी घटना की स्मृति में होलिका दहन मनाया जाता है।

केवल पौराणिक कथा ही नहीं, होलाष्टक के पीछे गहरा ज्योतिषीय तर्क भी है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, अष्टमी से लेकर पूर्णिमा तक नवग्रह बारी-बारी से उग्र रूप में रहते हैं। अष्टमी को चंद्रमा, नवमी को सूर्य, दशमी को शनि और इसी क्रम में पूर्णिमा तक राहु अपना उग्र प्रभाव दिखाते हैं। ग्रहों की इस अशांत स्थिति के कारण व्यक्ति का निर्णय और स्वभाव प्रभावित हो सकता है, इसलिए विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश या नया व्यवसाय शुरू करने जैसे कार्यों को टालने की सलाह दी जाती है।

Share.

About Author

Leave A Reply