मेरठ, 16 जनवरी (दैनिक केसर खुशबू टाईम्स)। नगर निगम कार्यकारिणी के आगामी 17 जनवरी को होने वाले चुनाव पर नगर निगम के पूर्व पार्षद व कार्यकारिणी सदस्य गफ्फार सैफी ने सवालिया निशान उठाये हैं। पूर्व पार्षद ने इस मामले में कमिश्नर को ज्ञापन सौंपकर नगर निगम के भ्रष्टाचार पर सवाल उठाते हुए प्रशासन की देखरेख में चुनाव कराने की मांग की है। नगर निगम कार्यकारिणी के चुनाव में भाजपा के बागी संजय सैनी के साथ मिलकर विपक्षी पार्षदों की जुगलबंदी नगर निगम प्रशासन पर सवालिया निशान उठा रहा है। नगर निगम में भाजपा का वर्चस्व है। खुद महापौर हरिकांत अहलूवालिया भाजपा के खेमे से हैं। इसलिए भाजपा नगर निगम में अपना वर्चस्व बनाये रखना चाहती है। इसी लिए जब गत 17 नवंबर को भाजपा से बागी हुए संजय सैनी को जीता हुआ साबित किया गया तो आनन-फानन में पहले राउंड के मतगणना परिणाम की घोषणा होने के साथ ही चुनाव निरस्त कर दिया गया। इसके बाद पांच बार नगर निगम कार्यकारिणी चुनाव कार्यक्रम घोषित किया गया। लेकिन पांचो बार चुनाव होने के ठीक एक दिन पहले चुनाव रद्द कर दिये गये। अब सातवीं बार 17 जनवरी को चुनाव कराने का कार्यक्रम घोषित किया गया है। इस चुनाव पर नगर निगम के चुनाव पर नगर निगम के पूर्व पार्षद व कार्यकारिणी सदस्य अब्दुल गफ्फार सैफी ने सवालिया निशान उठाये हैं। पूर्व पार्षद ने कहा कि नगर निगम भ्रष्टाचार का गढ़ बन चुका है। यहां अधिकारी और कर्मचारियों की जुगलबंदी से हर अनुभाग में भ्रष्टाचार हो रहा है। हमारा स्पष्ट कहना है कि जब पहले ही दिन 17 नवंबर को सही तरीके से चुनाव होने के बाद चुनाव परिणाम भी घोषित हो गया था तो फिर इस पर एकाएक क्यों रोक लगाई गई है? साफ जाहिर है कि नगर निगम के अधिकारियों को अपने भ्रष्टाचार को छुपाना होगा तथा बागी और विपक्षी पार्षदों के एकजुट हो जाने से निगम अधिकारियों के इस खेल पर अंकुश लग जाता। इसलिए इस चुनाव परिणाम को जानबूझकर रद्द किया गया। उन्होंने कमिश्नर से मांग की है कि चुनाव प्रशासन की देखरेख में होने चाहिए।
प्रशासन की देखरेख में हो निगम कार्यकारिणी चुनाव
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