मेरठ 03 फरवरी (प्र)। भूमिया पुल से हापुड़ अड्डे तक मुख्य रोड की 15 साल से बंद पुरानी जर्जर सीवर लाइन की जगह नई लाइन डालने की तैयारी है। खास बात ये है कि इस काम के लिए ट्रैफिक रोकने या डायवर्ट करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। ट्रेंचलेस तकनीक से सुरंग बनाकर नई सीवर लाइन डाली जाएगी।
भूमिया पुल से हापुड़ अड्डे तक मुख्य रोड के नीचे करीब 1800 मिमी. व्यास की सीवर लाइन है। यह लगभग 60 साल पुरानी और 25 फीट गहराई में है। चौक और जर्जर होने के कारण 15 साल से यह उपयोग में नहीं है। यह लाइन हापुड़ रोड से गुजर रही कमेला पंपिंग स्टेशन को जाने वाली मैन राइजिंग लाइन से जुड़ती है। 2021-22 में अमृत मिशन के तहत 17 वार्डों में नई सीवर लाइन डाली गई थीं। इनमें से छह वार्डों की सीवर निकासी इसी से की जानी थी। जल निगम ने उस वक्त पुरानी सीवर लाइन को खोलने की बात कही थी, लेकिन जल निगम के अधिकारी यह गारंटी नहीं दे सके थे कि यह आगे कितने साल और चल सकेगी।
मामला कमिश्नर और डीएम के सामने पहुंचने पर निर्णय हुआ है कि ट्रेंचलेस तकनीक से नई सीवर लाइन डालने का प्रस्ताव बनवाया जाए।
जलकल अनुभाग ने एक फर्म को लगाकर सर्वे शुरू कराया है। कुल लंबाई करीब 1900 मीटर है। सर्वे रिपोर्ट सप्ताह भर बाद आएगी। सर्वे में आकलन किया जाएगा कि सीवर लाइन डालने में कितना खर्च आएगा। इसके आधार पर प्रस्ताव बनाकर 15वें वित्त आयोग समिति की बैठक में रखा जाएगा।
इन मुहल्लों को होगा फायदा
प्रहलाद नगर, बुढ़ाना गेट, हरि नगर पूर्वा इलाही बख्श, जटान, बनी सराय, नीचा सद्दीकनगर, पिलोखड़ी, ईश्वपुरी, सर्राफा, बजाजा, ठठेरवाड़ा, लाला का बाजार, सरायलाल दास, डालम पाड़ा, कागजी बाजार, गुदड़ी बाजार, कबाड़ी बाजार, स्वामी पाड़ा, भाटवाड़ा, सरायजीना, खंदक, सुभाष बाजार, कुम्हारन में नई सीवर लाइन डल चुकी है। सात हजार कनेक्शन भी हो चुके हैं। मुहल्लों की सीवर निकासी तभी शुरू होगी जब भूमिया पुल से हापुड़ अड्डे तक मुख्य रोड पर नई सीवर लाइन डल जाएगी। घरों के सीवर कनेक्शन भी नाले-नालियों मैं खुले हैं।
मशीन से सुरंग बनाकर होता है काम
सहायक अभियंता जल लक्ष्मण सिंह ने बताया कि ट्रेंच स तकनीक में भूमिगत पाइप लाइन, केबिल या डक्ट्स को बिना जमीन की खोदाई किए स्थापित किया या बदला जा सकता है। सड़क पर 200 मीटर दूरी पर एक पिट बनाया जाता है। पिट में मशीन उतारकर सड़क के नीचे सुरंग बनाई जाती है। इससे यातायात भी चलता रहेगा और नीचे काम भी होता रहेगा। घनी आबादी क्षेत्र और भारी ट्रैफिक वाले क्षेत्रों में इसी तकनीक को अपनाया जा रहा है।
अपर नगर आयुक्त पंकज कुमार सिंह का कहना है कि भूमिया पुल से हापुड़ अड्डे तक मुख्य रोड व्हाइट टापिंग की बनी है, इसे खोदा नहीं जा सकता। ट्रेंचलेस तकनीक से बंद पड़ी सीवर लाइन को हटाकर नई सीवर लाइन खली जा सकती है। आगरा में ऐसा काम हुआ है। एक फर्म से सर्वे कराया जा रहा है।
