Tuesday, February 10

भूमि अधिग्रहण न होने से लटकी बस अड्डा शिफ्टिंग योजना

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मेरठ 06 फरवरी (प्र)। उत्तर प्रदेश परिवहन निगम के भैसाली बस अड्डे को महानगर से बाहर करने योजना भूमि अधिग्रहण न होने के कारण वर्षों अधर में लटकी है। बस अड्डे और कार्यशाला को शिफ्ट करने के लिए जगह चिह्नित है, पर अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई। बस अड्डे व कार्यशाला का शिफ्ट न होने से महानगर में जाम की समस्या गंभीर बनी है।

भैंसाली बस अड्डा महानगर के बीचों बीच स्थित है। इस बस अड्डे से मेरठ डिपो की 199 बसें, भैंसाली डिपो की 166 अनुबंधित बसों का मुख्य रूप से संचालन किया जाता है, जबकि शोहराब गेट डिपो बड़ौत, शामली, खतौली, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, गाजियाबाद, कोशांबी, अलीगढ़, आगरा, हाथरस, खुर्जा डिपो के साथ-साथ उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, पंजाब के अनेक डिपो की बसें इस डिपो से यात्रियों को लेकर जाती हैं। रोजाना करीब पांच सौ बसों की इस डिपो में आवाजाही होती है। इन बसों की आवाजाही की वजह से महानगर में जाम की समस्या गंभीर बनी है। इस बस अड्डे के आगे बसों को खड़ा करके यात्रियों को इनमें बैठाने के कारण यहां दिनभर जाम लगा रहता है। जाम से निजात दिलाने के लिए कई दशक से इस बस अड्डे को शहर से बाहर शिफ्ट करने की मांग की जा रही है। रोडवेज के अधिकारियों ने यह योजना बनाई कि बस अड्डे को दो जगह भूड़वराल और मोदीपुरम के पास सिवाया में बना दिया जाए। जबकि क्षेत्रीय कार्यशाला गांव पल्हेड़ा और मेरठ डिपो की कार्यशाला को दुल्हेड़ा गांव में बना दिया जाए।

दिल्ली-मेरठ रेपिड रेल योजना के चलते एनआरसीटीसी को मेट्रो स्टेशन बनाने के लिए क्षेत्रीय कार्यशाला और मेरठ डिपो की कार्यशाला की अधिकांश जगह दे दी गई। इसके साथ ही उक्त परिसर में स्थित रोडवेज के आरएम, एआरएम के आवासों की भूमि भी एनआरसीटीसी को इस शर्त पर दे दी गई कि उक्त संस्था शहर से बाहर बस अड्डों व कार्यशाला का निर्माण करके रोडवेज को सौंपेगा। करीब दो वर्ष पूर्व मोदीपुरम व भूड़वराल में बस अड्डों व कार्यशालाओं के लिए भूडबराल, सिवाया, पल्हेड़ा और दुल्हेड़ा में करीब 40 हजार वर्ग मीटर भूमि चिह्नित कर दी गई। जिला प्रशासन द्वारा एनआरसीटीसी के खर्च पर भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया करीब दो वर्ष से चल रही है, लेकिन अभी तक पूरी नहीं की गई। करीब 80 भूमि मालिकों को अवार्ड घोषित करने की तैयारी की जा रही है। इसके बाद मुआवजे का भुगतान कर दिया जाएगा। भुगतान होते ही भूमि पर कब्जा लिया जाएगा। इसके बाद एनआरसीटीसी निर्माण कार्य शुरू करेगा।

भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया जारी
भैसाली डिपो के एआरएम गोपाल शर्मा का कहना है कि भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया जिला प्रशासन द्वारा की जा रही है। भूमि अधिग्रहण होने के बाद एनआरसीटीसी बस अड्डों का निर्माण करेगा। इसमें काफी समय लगेगा। बस अड्डे तैयार होने तक भैसाली बस अड्डे से ही बसों का संचालन किया जाएगा।

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