मेरठ 07 फरवरी (दैनिक केसर खुशबू टाइम्स)। हिंदू समाज को संगठित करने, सनातन संस्कृति के संरक्षण तथा राष्ट्र निर्माण के संकल्प को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से हिंदू सम्मेलन आयोजन समिति, विजयनगर (मेरठ) के तत्वावधान में आयोजित विराट हिंदू सम्मेलन आज चौधरी चरण सिंह पार्क, निकट कचहरी, मेरठ में अत्यंत भव्यता, अनुशासन एवं गरिमा के साथ संपन्न हुआ।
मुख्य वक्ता कृपाशंकर (संयुक्त क्षेत्र प्रचार प्रमुख, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) ने अपने अत्यंत ओजस्वी, विचारोत्तेजक एवं प्रेरणादायी उद्बोधन में संघ द्वारा दिए गए श्पंच परिवर्तन्य पर विशेष रूप से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में समाज के सर्वांगीण उत्थान के लिए पंच परिवर्तन को आत्मसात करना अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने विस्तार से बताया कि सामाजिक समरसता के माध्यम से जाति, वर्ग एवं भेदभाव से ऊपर उठकर समाज को एक सूत्र में बाँधना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
कुटुंब प्रबोधन के विषय में उन्होंने कहा कि परिवार ही संस्कारों की प्रथम पाठशाला है, जहाँ से राष्ट्र निर्माण की नींव पड़ती है।
स्वदेशी को अपनाने का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा कि स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग से न केवल देश की अर्थव्यवस्था सुदृढ़ होती है, बल्कि आत्मनिर्भर भारत का सपना भी साकार होता है।
पर्यावरण संरक्षण पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर ही मानव जीवन सुरक्षित रह सकता है, इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को वृक्षारोपण, जल संरक्षण एवं स्वच्छता के प्रति जागरूक होना चाहिए।
नागरिक कर्तव्य पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों का पालन ही एक सशक्त लोकतंत्र की पहचान है।
श्री कृपाशंकर जी ने उपस्थित जनसमूह से आह्वान किया कि वे पंच परिवर्तन को केवल सुनें नहीं, बल्कि अपने दैनिक जीवन में अपनाकर समाज और राष्ट्र के लिए उदाहरण प्रस्तुत करें। उन्होंने कहा कि जब समाज जागरूक होता है, संगठित होता है और अपने कर्तव्यों का पालन करता है, तभी राष्ट्र उन्नति के पथ पर अग्रसर होता है।
उन्होंने युवाओं, मातृशक्ति एवं प्रबुद्ध वर्ग से विशेष रूप से आग्रह किया कि वे संघ के सेवा एवं राष्ट्र निर्माण के कार्यों से जुड़ें और अपने सामर्थ्य के अनुसार समाज के उत्थान में योगदान दें।
ये पाँच परिवर्तन
अलग-अलग योजनाएँ नहीं,
एक ही राष्ट्र-साधना के पाँच स्वर हैंकृ
समरस समाज,
सुरक्षित प्रकृति,
संस्कारित परिवार,
स्वाभिमानी जीवन,
और जिम्मेदार नागरिक।
इन्हीं से सौ वर्ष सार्थक हुए,
और इन्हीं से भविष्य सुरक्षित होगा।’
इसके पश्चात श्रीमान सुरेंद्र जी ( प्रांत प्रचार प्रमुख, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, मेरठ) ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की 100 वर्षों की गौरवशाली यात्रा पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि किस प्रकार संघ ने अपने स्थापना काल से लेकर आज तक समाज सेवा, राष्ट्रसेवा, सामाजिक समरसता, आपदा प्रबंधन, शिक्षा, संस्कार एवं चरित्र निर्माण के क्षेत्र में निरंतर कार्य किया है। उन्होंने कहा कि संघ का कार्य केवल संगठन तक सीमित नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक क्षेत्र में सकारात्मक परिवर्तन लाना है।
अंत में मुख्य अतिथि स्वामी कनक प्रभानन्द सरस्वती जी महाराज (पीठाधीश्वर, श्री गुरु तीर्थ पीठ, मेरठ) ने अपने प्रेरणादायी आशीर्वचन में हिंदुत्व की वर्तमान स्थिति एवं भविष्य पर गहन विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने कहा कि आज हिंदुत्व केवल एक विचार नहीं, बल्कि जीवन पद्धति है, जिसे समझने और अपनाने की आवश्यकता है। उन्होंने समाज से आह्वान किया कि अपने संस्कार, संस्कृति और परंपराओं को आत्मसात करते हुए आने वाली पीढ़ी को सनातन मूल्यों से जोड़ा जाए, जिससे राष्ट्र सशक्त और आत्मनिर्भर बन सके।
इसके पश्चात प्रचार प्रमुख रचित जैन ने बताया कि विराट हिंदू सम्मेलन समिति के इन्द्र गर्ग (अध्यक्ष), मनोज सिंघल (सचिव), प्रवीन त्यागी (कोषाध्यक्ष) संजीव रस्तोगी (संयोजक) एवं केशव बंधु जी ने संयुक्त रूप से कहा कि विराट हिंदू सम्मेलन समाज में जागरूकता, संगठन और एकता का सशक्त संदेश देकर गया है तथा भविष्य में भी ऐसे आयोजन निरंतर किए जाएंगे। एवं सभी को धन्यवाद दिया।
कार्यक्रम के उपरांत सभी उपस्थितजनों ने भोजन प्रसाद ग्रहण किया। संपूर्ण आयोजन शांतिपूर्ण, सुव्यवस्थित एवं अत्यंत सफल रहा।
