Monday, February 23

इकलौते पुत्र ने निभाई दोहरी परीक्षा पहले बोर्ड परीक्षा फिर पिता को दी मुखाग्नि

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मेरठ, 23 फरवरी (दैनिक केसर खुशबू टाईम्स)। एक तरफ बोर्ड परीक्षा तो दूसरी तरफ पिता को अंतिम विदाई। पंजाबीपुरा निवासी कक्षा 10 के छात्र कुशल जैन की गत दिवस दोहरी परीक्षा थी। एक तरफ उसे अपने भविष्य की परीक्षा देनी थी तो दूसरी तरफ कर्तव्य की परीक्षा भी पास करनी थी। कुशल ने असाधारण धैर्य का उदाहरण देते हुए यह दोनों जिम्मेदारियां निभाईं।
पहले बोर्ड की परीक्षा दी और फिर पिता का अंतिम संस्कार किया। पंजाबीपुरा गली नंबर एक में गत दिवस सुबह सन्नाटा था। घर के आंगन में 45 वर्षीय आशु जैन का पार्थिव शरीर रखा था। उनका बीमारी के चलते निधन हो गया था। वह एक निजी कंपनी में काम करते थे। उनके इकलौते पुत्र कुशल जैन की शनिवार को अंग्रेजी की परीक्षा थी। वह द अध्ययन स्कूल में कक्षा 10 में पढ़ते हैं। उनका परीक्षा केंद्र रेलवे रोड स्थित वर्धमान एकेडमी में है।
पिता का असमय चले जाना कुशल के लिए जीवन भर का दर्द दे गया। अंतिम संस्कार के लिए पहले शनिवार सुबह नौ बजे का समय निर्धारित किया गया, लेकिन कुशल की सुबह 10 से दोपहर एक बजे तक परीक्षा थी। इसी को देखते हुए परिवार व समाज के लोगों में विचार-विमर्श हुआ।
निर्णय लिया गया कि दोपहर बाद अंतिम संस्कार होगा और इकलौता पुत्र कुशल ही अंतिम संस्कार करेगा। कुशल अपनी आंखों में अश्रु व असाधारण धैर्य के साथ परीक्षा केंद्र पहुंचा और परीक्षा दी। दोपहर दो बजे वह अश्रुधारा लेकर घर पहुंचा, जिसके बाद पार्थिव शरीर को सूरजकुंड स्थित श्मशान घाट ले जाया गया। कुशल ने अपने पिता को मुखाग्नि दी। समाज के लोगों ने कहा कि कुशल ने एक तरफ पढ़ाई की परीक्षा दी तो दूसरी तरफ पुत्र धर्म होने का दायित्व निभाया।
पिता का असमय चले जाना कुशल के लिए जीवन भर का दर्द दे गया। अंतिम संस्कार के लिए पहले शनिवार सुबह नौ बजे का समय निर्धारित किया गया, लेकिन कुशल की सुबह 10 से दोपहर एक बजे तक परीक्षा थी। इसी को देखते हुए परिवार व समाज के लोगों में विचार-विमर्श हुआ।
निर्णय लिया गया कि दोपहर बाद अंतिम संस्कार होगा और इकलौता पुत्र कुशल ही अंतिम संस्कार करेगा। कुशल अपनी आंखों में अश्रु व असाधारण धैर्य के साथ परीक्षा केंद्र पहुंचा और परीक्षा दी। दोपहर दो बजे वह अश्रुधारा लेकर घर पहुंचा, जिसके बाद पार्थिव शरीर को सूरजकुंड स्थित श्मशान घाट ले जाया गया। कुशल ने अपने पिता को मुखाग्नि दी। समाज के लोगों ने कहा कि कुशल ने एक तरफ पढ़ाई की परीक्षा दी तो दूसरी तरफ पुत्र धर्म होने का दायित्व निभाया।

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