Thursday, April 9

माननीय मुख्यमत्री जी कमिश्नर साहब की अध्यक्षता में कमेटी गठित कराकर कोठी नं. 5 सिविल लाइन में हुए अवैध निर्माण की कराये जांच, रिहायशी भूमि पर मानचित्र पास बताकर हुआ अवैध निर्माण, गरीब व्यापारियों पर सितम तो अवैध निर्माणकर्ता राजेश मित्तल पर रहम क्यों

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मेरठ, 09 अप्रैल (दैनिक केसर खुशबू टाईम्स)। सेंट्रल मार्किट शास्त्री नगर में रिहायशी भूमि पर बने कॉमर्शियल कॉम्पलैक्स और अवैध निर्माणों और आवासीय में खुली दुकानों के साथ शायद पहली बार बैंक स्कूल और अस्पतालों पर हुई कार्रवाई और कई हुए सील। जिसे लेकर आज पूरा शहर बंद है इससे अंदाज लगाया जा सकता है कि व्यापारियों को हो रहे इस नुकसान को लेकर आम आदमी में कितना रोष है मगर पता नहीं वह क्या कारण है कि हमेशा बड़े-बड़े भूमाफिया अवैध निर्माणकर्ता बच जाते हैं और छोटे-छोटे दुकानदार और घर खर्च चलाने के लिए थोड़ी सी व्यवस्था करने वालों के विरूद्ध कार्रवाई हो जाती है।
सेंट्रल मार्किट शास्त्री नगर में तो इतनी बड़ी कार्रवाई हो गयी लेकिन मंडलायुक्त कार्यालय के निकट कोठी नंबर पांच सिविल लाइन में 1000 गज में अवैध निर्माणकर्ता राजेश मित्तल द्वारा तीन मंजिला अवैध कॉमर्शियल कॉम्पलैक्स रिहायशी भूमि पर खड़ा कर दिया गया। दर्जनों हरे पेड़ भी काटे गये जानकारों का कहना है कि अनुमती के विपरीत बहुत बड़ा बेसमेंट खोद खनन भी किया गया जो सरकारी जमीन इतने बड़े कॉम्पलैक्स के निर्माण के समय वाहन आदि खड़े करने के लिए छोड़ी जानी चाहिए थी वह भी नहीं छोड़ी गयी। नियम विरूद्ध सड़क पर बड़ा जनरेटर भी रख दिया गया। मानचित्र पास के नाम पर पूरा अवैध निर्माण किया गया और बिजली कनेक्शन कैसे मिल गया। माननीय मुख्यमंत्री जी के यहां हुई इस संदर्भ में शिकायत पर एमडीए मेडा के संबंधित अधिकारियों के द्वारा मानचित्र पास है कहकर शिकायत का फर्जी निस्तारण और अवैध निर्माणकर्ता को बचाया जा रहा है आखिर क्यों।

प्रदेश सरकार की नई निर्माण नीति और मेट्रो नीति के तहत रिहायशी भूमि का कुछ हिस्सा कॉमर्शियल उपयोग की आड़ में राजेश मित्तल ने 900-1000 गज के बीच रिहायशी प्लाट में पूरी भूमि पर निर्माण किया गया और उत्तर प्रदेश निर्माणनीति के तहत जो जगह छोड़ी जानी चाहिए थी वह भी नहीं छोड़ी गयी। जहां तक जानकारों का कहना है मेट्रो से दूरी के क्रम में भी नियमानुसार यह नहीं आती और अवैध निर्माण तो कर ही नहीं सकते। रिहायशी भूमि का जो उपयोग की अनुमति है उसका भी नक्शा पास कराकर उसका निर्माण किया जा सकता है लेकिन राजेश मित्तल ने सारे नियमों की धज्जियां और सरकार की नीति के तहत निर्माण नीति के तहत सारी हदें ही तोड़ दी। कई जागरूक नागरिकों का मौखिक रूप से कहना है कि राजेश मित्तल शहर के कई इलाको में भी रिहायशी भूमि पर कॉमर्शियल गतिविधियां शुरू कराकर लाखों रूपये महीना किराये का रुपया खा रहा है जानकारों के मौखिक कहे अनुसार बेगमपुल पल्लवपुरम, थापर नगर आदि में भी राजेश मित्तल ने पांच सिविल लाइन क्षेत्र के अलावा अवैध निर्माण किये बताते हैं कि जो फर्जी एनओसी लगाकर बैंक और अन्य को जगह दी गयी है उससे लाखों रूपये महिना सरकारी भूमि दबाकर और निर्माण नीति का उल्लंघन कर राजेश मित्तल द्वारा कमाये जा रहे हैं। कुछ लोगों का यह भी कहना है कि इस अवैध निर्माण की कमाई में से ही एमडीए मेडा के संबंधित कुछ अधिकारियों और कर्मचारी हड्डी के चक्कर में कटरा कटवाने की कहावत को चिरतार्थ करते हुए इसे बचाने के लिए माननीय मुख्यमंत्री जी के जनशिकायत पोर्टल पर भी हुई शिकायतों का फर्जी निस्तारण कर रहे हैं और इस कड़ी में खुद मेडा के अधिकारियों द्वारा जो रिपोर्ट भेजी जा रही है उसमें हर बार नये तथ्य देकर और गलत फोटो लगाकर उच्चाधिकारियों आदि को गुमराह किया जा रहा है।
माननीय मुख्यमंत्री जी मेरठ मंडलायुक्त या जिलाधिकारी जी की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित करा कर कोठी नंबर 5 सिविल लाइन में

  1. राजेश मित्तल के अवैध निर्माण।
  2. हरे पेड़ कितने काटेे।
  3. खनन की कितनी अनुमती ली गई थी।
  4. बेसमेंट कितना बड़ा बनाने और खनन की मितनी अनुमति ली गयी तथा मौके पर कितनी खुदाई हुई और बेसमेंट मानचित्र के विपरीत कितना कराया गया।
  5. मानचित्र किस किस चीज का पास था क्या क्या बनाया गया है।
  6. सरकार की निर्माण नीति के तहत वाहन खड़े करने के लिए जगह क्यों नहीं छोड़ी गयी।
  7. बैक और साइड फ्रंट में जगह क्यों नहीं छोड़ी।
  8. सरकारी जमीन पर जो बड़ा जनरेटर रखा गया उसकी अनुमती ली गयी या नहीं।
  9. मेडा से पूर्णतरू प्रमाण पत्र जारी ना होने के बावजूद बिजली विभाग ने मानचित्र के विपरीत निर्माण में कनेक्शन कैसे दिया।
  10. अगर नक्शा पास था तो कितनी मंजिल बनाने की अनुमति ली। और कितनी बनाई गयी है।
  11. जो निर्माण हुआ है अंदर वह मानचित्र के हिसाब से है या अलग इन सब बिंदुओं की विस्तार से जांच कराकर राजेश मित्तल द्वारा पूर्व में किये गये अवैध निर्माणों की जानकारी कर की जाये कार्रवाई। क्योंकि आम आदमी यह खुलकर कह रहा है कि गरीबों पर सितम और अमीरों पर करम क्यों और राजेश मित्तल के विरूद्ध कार्रवाई कर उसे जो भी सजा दी जा सकती है वह क्यों नहीं दी जा रही।
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