मेरठ 19 मार्च (प्र)। मेरठ में गृहकर के बकायेदारों पर नगर निगम ने सख्ती शुरू कर दी है। बुधवार को निगम ने शोर-शराबे के बीच आठ बकायेदारों के भवन सील कर दिए। 78 भवन स्वामियों को चेतावनी दी गई। भवन सील की कार्रवाई का कई जगहों पर विरोध भी हुआ। पल्लवपुरम, शास्त्रीनगर और बागपत सड़क पर निगम की टीम को बिना कार्रवाई के लौटना पड़ा।
मुख्य कर निर्धारण अधिकारी एसके गौतम ने कंकरखेड़ा, शास्त्रीनगर और मुख्यालय जोन में कर अधीक्षकों के नेतृत्व में टीम बनाकर गृहकर के बकायेदारों पर कार्रवाई कराई। प्रवर्तन दल को साथ लेकर कर अधीक्षक अतुल कुमार और विनय शर्मा की टीम ने आठ बकायेदारों के भवनों को सील कर दिया।
गढ़ रोड क्षेत्र से इस अभियान की शुरुआत हुई। मेडिकल कॉलेज के पास स्थित नाथू सिंह की सीमेंट की दुकान को लगभग 2 .76लाख रुपये गृहकर बकाया होने पर सील किया गया। इसके बाद टीम ने 6.55 लाख रुपये के बकायेदार किशन कांत भारद्वाज के टाइल्स गोदाम को भी सील कर दिया।
राजवंश विहार में 2 .57 लाख रुपये बकाया होने पर महादेव सचदेवा और 3.2 लाख रुपये बकाया होने पर दीपक सचदेवा के प्रतिष्ठानों को सील किया गया। मेडिकल इलाके में मित्तल जनरल स्टोर को भी एक लाख रुपये से अधिक के बकाया होने के कारण सील कर दिया है।
तेजगढ़ी चौराहे पर टेलीफोन एक्सचेंज के सामने स्थित वीर सिंह के प्रतिष्ठानों, शर्मा बैंड, राजू एग प्वाइंट और आराध्या ट्रेडर्स पर 3.48 लाख रुपये के बकाये के कारण सील किया गया। साथ ही मुनादी कराते रहे कि जिन भवन स्वामियों के गृहकर जमा नहीं हुए हैं, वह तुरंत निगम जाकर भुगतान जमा कर दें। सील की कार्रवाई के डर से कंकरखेड़ा जोन में करीब 25 लाख, शास्त्रीनगर में 30 लाख और मुख्यालय जोन में 25 लाख रुपये जमा हुए।
गृहकर बकायेदार प्रतिष्ठान का नाम बकाया राशि कार्रवाई
नाथू सिंह सीमेंट की दुकान 2,76,000 रुपये सील
केके भारद्वाज टाइल्स गोदाम 6,55,000 रुपये सील
महादेव सचदेवा का प्रतिष्ठान 2,57,000 रुपये सील
दीपक सचदेवा का प्रतिष्ठान 3,02,000 रुपये सील
मित्तल जनरल स्टोर एक लाख रुपये सील
शर्मा बैंड 3,48,000 रुपये सील
राजू एग प्वाइंट 3,48,000 रुपये सील
आराध्या ट्रेडर्स 3,48,000 रुपये सील
नगर आयुक्त सौरभ गंगवार का कहना है कि भवन स्वामी गृहकर का बिल जमा कर 20 प्रतिशत की छूट का लाभ लें। शहर में एक लाख से अधिक भवन स्वामियों पर गृहकर बकाया है। बार-बार अपील की जा रही है कि गृहकर जमा कर दें। शासन का 150 करोड़ रुपये का लक्ष्य पूरा करना निगम के सामने चुनौती बना हुआ है। बड़े बकायेदारों पर निगम को मजबूरन कार्रवाई करनी पड़ रही है।
