मेरठ 23 अप्रैल (प्र)। लापरवाही को अब तक तो शहर वासी ही झेल रहे थे, लेकिन अब अंदरूनी शहर के साथ-साथ मेरठ के हाइवे रात के सफर के लिए बिल्कुल सुरक्षित नहीं हैं। इसलिए अब आगे मेरठ से कहीं अपने वाहन के जरिये जा रहे हैं तो दिन में ही हाईवे से गुजर लें, क्योंकि रात के सफर के लिए हाईवे अंधेरा होने की वजह से सुरक्षित नहीं हैं। मेरठ के हाईवे, विशेषकर दिल्ली-देहरादून हाईवे (एनएच-58) और आसपास के ग्रामीण मार्ग, रात के समय सुरक्षा और दुर्घटना के जोखिम के कारण चिंता का विषय बने हुए हैं।
शहर की लाइफलाइन कहे जाने वाली दिल्ली रोड रैपिड रेल के काम की वजह से जगह-जगह गड्डों में तब्दील हो गयी है। हालांकि रैपिड और मेट्रो तो धड़ल्ले से दौड़ने लगी है, लेकिन इसके निर्माण के लिए सड़कों पर डिवाइडर से स्ट्रीट लाइटें हटाकर वैरिकेड लगाए गए थे। इस वजह से रात में यह सड़कें अभी तक अंधेरे में डूबी रहती है। जगह-जगह बेतरतीब ढंग से बने कट, चौराहों और डायवर्जन पर सुबह से शाम तक जाम लगा रहता है। इससे कारोबार भी प्रभावित हो रहा है। इसमें संबंधित विभागों के बीच तालमेल के अभाव की बात सामने आई इन विभागों ने लंबे चौड़े दावे कर लाइटों को ठीक कराने की बात कही, लेकिन एक भी विभाग ने न तो नई स्ट्रीट लाइटें लगाई और न ही पुरानी और खराब लाइटों को सही किया, जिसका खामियाजा इन सड़कों पर चलने वाले यात्रियो को भुगतना पड़ता है। दिल्ली रोड, गढ़ रोड तथा दौराला क्षेत्र में नए क्षेत्रों में बनाए गए वार्डों को तो नगर निगम ने अब तक स्ट्रीट लाइटें ही अलॉट नहीं की हैं। जिसकी वजह से हाईवे से लेकर गांवों के संपर्क मार्ग व गली- मोहल्लों तक अंधेरा छाया है। शाम ढलते ही शहर की प्रमुख सड़कों और गांवों के संपर्क मार्गों पर अंधेरा छा जाता है। केवल वाहनों की लाइट के भरोसे ही लोग चल पाते हैं यही हाल मेरठ सिटी स्टेशन रोड का है।
रेलवे रोड चौराहे से लेकर स्टेशन तक कई जगह घुप अंधेरा छाया रहता है तो कई जगह स्ट्रीट लाइटें बंद हैं। अधिकांशतः पूरी सड़क पर अंधेरा छाया रहता है। रात में गंगा नगर तथा डिफेंस कॉलोनी की अंदरूनी सड़कों पर भी कई जगह अंधेरा पसरा रहता है। गढ रोड़ पर नई सड़क से लेकर बिजली बंबा बाईपास तक के भी बुरे हालात हैं।
खौफजदा है मवाना-बहसूमा बाइपास
मवाना से बहसूमा के बीच बने बाईपास पर तो पुलिस भी जाने खौफ खाती है। रात होते ही बैरियर लगाकर रास्ता बंद कर दिया जाता है और वाहन चालकों को मवाना करने के भीतर से गुजारा जाता है। दरअसल इस सुनसान हाईवे पर रात में जाना खतरे से खली नहीं यहां से गुजरने का मतलब लूटना तय है। विरोध करने पर जान भी जा सकती है। इस हाईवे का खौफ ऐसा है कि यहां दिन में भी सन्नाटा रहता है। लाइट का कोई इंतजाम नहीं होने से हर वक्त घटना का भय बना रहता है।
