Thursday, April 23

आवासीय भवनों में चल रहे सभी स्कूलों पर सील की कार्यवाई क्यों नहीं? मेरठ पब्लिक स्कूल और गुरूतेग बहादुर पब्लिक स्कूल सहित अन्यों पर भी हो कार्रवाई

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मेरठ, 23 अप्रैल (दैनिक केसर खुशबू टाईम्स)। शास्त्रीनगर के सेंट्रल मार्केट प्रकरण के दौरान डीआरएस पब्लिक स्कूल सहित कई स्कूलों पर भी जो घरेलू भवनों में चल रहे थे पर सील लगायी गयी। मैं यह तो नहीं कहता यह गलत है या सही लेकिन यह जरूर है कि सील लगाने से पहले जो बच्चे यहां शिक्षा प्राप्त कर रहे थे उन्हें अन्य स्कूलों में हस्तानांतरित कराया जाता या सत्र 2026-27 तक पढ़ाई चलने दी जाती और परिणाम आते ही सील लगाई जाती तो ठीक था ऐसा नागरिकों का मानना है इसके अलावा इस क्षेत्र में लगभग 40 स्कूल अवैध रूप से रिहायशी भूमि पर बने भवनों में चल रहे हैं लेकिन उन पर आवास विकास के अफसरों ने कार्यवाही क्यों नहीं की यह विषय अब चर्चाओं में है। मेरा मानना है कि संविधान में सभी के लिए समान अधिकार और न्यायिक प्रणाली है जरूरी नहीं है कि हर मामले में उच्च न्यायालय ही आदेश दे। इसलिए जब कुछ स्कूलों को सील किया गया तो आवाज विकास, मेरठ विकास प्राधिकरण और कैंट क्षेत्र में रिहायशी भवनों में चलने वाले स्कूलों में सील की कार्यवाही माननीय न्यायालय के आदेशों के क्रम में अन्य भवनों पर भी सील लगायी जाती तो अच्छा था

बताते चलें कि शहर की सीमा में तो ज्यादातर छोटे-छोटे बच्चों इंटर तक और उच्चशिक्षा के स्कूल कॉलेज बड़ी संख्या में रिहायशी भवनों में चल रहे हैं जैसा माल रोड पर स्थित कालेज इसके अलावा वेस्ट एण्ड रोड पर मेरठ पब्लिक स्कूल, दीवान पब्लिक स्कूल, ऋषभ एकेडमी स्कूल, गुरूतेग बहादुर स्कूल, दर्शन एकाडेमी के अलावा गंगा नगर, मलियाना, साबुन गोदाम, रिठानी सहित सारी नई बसी कालोनियों में भी छोटे स्कूल रिहायशी भवनों में चल रहे है तो उन पर भी कार्रवाई होनी चाहिए थी भले ही इस सत्र में नोटिस देकर परीक्षा होने के बाद इन्हें सील किया जाता क्योंकि नागरिकों के अनुसार इनमें से ज्यादातर पुरानी कोठियों और आवासीय भवनों में चल रहे है। और क्योंकि यह सरकार की नई नीति आवासीय भवनों का कुछ हिस्सा कॉमर्शियल नीति में भी नहीं आता है ऐसा जानकारों का कहना है तो फिर इन्हें अभी तक नोटिस क्यों नहीं दिये गये जबकि इनमें से ज्यादातर अवैध निर्माण आदि के मुकदमें भी चल रहे हैं अब हमें तो सही ज्ञान नहीं है लेकिन कुछ जागरूक नागरिकों का कहना है कि सेंट मेरी और सोफिया स्कूल भी कोठियों में संचालित हैं सही क्या है और गलत क्या है यह तो जांच का विषय हैं लेकिन अगर नागरिकों का कथन सही है तो शिक्षा विभाग के अधिकारियों को पुलिस व प्रशासन के सहयोग से जिस प्रकार से शास्त्री नगर के स्कूलों पर सील लगाई गयी वैसे ही शहर में रिहायशी भूमि पर चल रहे अन्य स्कूलों पर भी सील की कार्रवाई करनी चाहिए क्योंकि ऐसी चर्चाएं है कि जब कार्रवाई हो रही है तो इस क्रम में आने वाले सभी स्कूलों पर हो कुछ पर नहीं। देशभर में सभी बड़े राजनीतिक दल संविधान का पालन कराने और उसे बनाएं रखने के लिए प्रयासरत हैं और शासन-प्रशासन तथा सरकार भी ऐसा कर रही है तो फिर स्कूल संचालकों के विरूद्ध कार्यवाई करने में भेदभाव क्यों?

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