मेरठ, 29 जनवरी (दैनिक केसर खुशबू टाईम्स)। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के उर्दू विभाग के प्रेमचंद सेमिनार हॉल में प्रेमचंद का साहित्य वर्तमान और भविष्य विषय पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार का उद्घाटन सत्र आयोजित हुआ। इसमें स्कॉलर डॉ. प्रदीप जैन ने मुख्य व्याख्यान देते हुए कहा कि प्रेमचंद ने तीन सौ से अधिक कहानियां लिखीं, लेकिन चर्चा सिर्फ कुछ ही कहानियों पर होती है। उन पर ब्राह्मण, इस्लाम और दलित विरोधी जैसे आरोप लगाए गए, जो गलत हैं। उन्होंने जोर दिया कि प्रेमचंद पर गहन शोध की जरूरत है।
मुंशी प्रेमचंद के क्रिटिक बहुत हैं, लेकिन रिसर्चर बहुत कम। प्रेमचंद ने तीन सौ से ज्यादा कहानियां लिखीं, लेकिन उनकी कुछ ही कहानियों पर चर्चा होती है। उन पर कई तरह के आरोप लगाए गए। कभी उन्हें एंटी-ब्राह्मण, कभी एंटी-इस्लाम और एंटी-दलित कहा गया। अतीत, वर्तमान और भविष्य’ विषय पर अंतरराष्ट्रीय सेमिनार के उद्घाटन सत्र में यह बात डॉ. प्रदीप जैन नहीं कही। अध्यक्षता प्रो.असलम जमशेदपुरी ने की। प्रो. प्रज्ञा पाठक ने कहा कि मुंशी प्रेमचंद का महत्व हर दौर में एक जैसा रहेगा।
इंग्लैंड से पहुंचे आमिर मेहदी ने कहा कि बहुत से लोग उर्दू को मुसलमानों की भाषा कहते हैं जबकि यह मुसलमानों की भाषा नहीं है। यह सिर्फ़ एक भारतीय भाषा है। आपने जो लिखा है वह कब्र और कफ़न दोनों हो सकता है। प्रेमचंद बिना कहानी का इतिहास अधूरा है। शहर काजी जैनुल सालिकिन, प्रो.असलम जमशेदपुरी, अफ़ाक अहमद खान, डॉ.शादाब अलीम, डॉ.आसिफ अली, मौलाना शाह आलम गोरखपुरी मौजूद रहे।
सीसीएसयू कैंपस के उर्दू विभाग में दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन
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